भारत में कृष्ण जन्मोत्सव का बड़ा महत्व है। इस उत्सव को सभी बड़े जोर शोर से मनाते है। और कृष्ण
भक्ति में डुबे नजर आते है। वैसे तो ये उत्सव पूरे भारत में सभी जगह मनाया जाता है। पर इसका सबसे ज्यादा प्रभाव मथुरा और वृन्दावन में देखने को मिलता है। यहाँ कृष्ण जन्मोत्सव बड़े ही विशाल और भव्य तरीके से मनाया जाता है। दूर -दूर से लोग यहाँ कृष्ण के जन्म उत्सव में शामिल होने आते है। इस दिन सभी कृष्ण के रंग में रंगे नजर आते है। ये सभी जानते है कि कृष्ण जी का जन्म भादो मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी को हुआ था। हर साल इसी दिन कृष्ण जन्मोत्सव कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है मंदिरो में बड़े ही श्रद्धा भाव से कृष्ण जी का भजन पूजन किया जाता है।
कृष्ण जी के लिए सुन्दर पालना सजाया जाता है और उस पालने में मोहनी सूरत वाले नन्हे से मोरपंख वाले कान्हा जी को बैठाया जाता। सभी श्रद्धालु पालने की डोर पकड़ कर पालना झूलाते है और उस आनंद को
प्राप्त करते है जो आनन्द माँ यशोधा को प्राप्त होता था जब वह नन्हे से बाल गोपाल को पालने में झुलाती थी और साथ ही कान्हा जी को उनका सबसे प्रिय माखन भी खिलाया जाता है। इस दिन एक और खास बात होती है वो ये की इस दिन दही हांडी भी फोड़ी जाती है। जगह -जगह आज दही हांडी फोड़ने की
प्रतियोगिता रखी जाती है इस प्रतियोगिता में गोविंदाओं की टोली होती है ( प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाला समूह) अलग-अलग जगह से ये टोलियां प्रतियोगिता में हिस्सा लेने आती है। दर्शको की भी बड़ी भीड़ होती है सभी के अंदर उत्साह नजर आता है। वाकई में बड़ा मजा आता है दही हांडी प्रतियोगिता
देखने में फूलो से सजी और दही से भरी मटकी को ऊँचाई पर बांधा जाता है टोली के गोविंदा एक दूसरे का सहारा लेकर ऊँचाई पर बंधी दही हांडी तक पहुँचने की कोशिश करते है इसमे वे कई बार असफल भी होते है पर आखिर
में कोई एक टोली सफल हो ही जाती है और गोविंदा
दही से भरी मटकी को फोड़ ही देते है। और फिर सब खुशी से नाचने लगते है गोविंदा आला रे आला तेरी मटकी सम्हाल ब्रिज बाला। सच में जो मजा इसे देखने में है उसे शब्दो में बताया ही नही जा सकता इसलिए एक बार तो इस प्रतियोगिता को देखने जाना ही चाहिए तो जरूर जाए।
वैसे सभी को पता है कि कृष्ण जी का जन्म रात्रि 12 बजे हुआ था इसलिए आज भी जन्माष्टमी के दिन सभी मंदिरो में घरो में रात्रि 12 बजे तक सभी लोग जागते है भजन पूजन करते है और कृष्ण जी का जन्म होते ही सभी खुशियां मनाने लगते है और फिर सभी बालगोपाल के दर्शन करते है यह उत्सव पूरी रात्रि तक चलता है। इस वक्त भक्तो के चहरे पर जो खुशी
और जो उत्साह नजर आता है वह देखने लायक होता
है सभी कृष्ण भक्ति में डूबे नाचते गाते कान्हा के जन्म की खुशी मनाते दिखाई देते है। नन्द के आनंद भयो जय हो नन्द लाल की हाथी घोड़ा पालकी जय हो नन्द लाल की, जय यशोदा लाल की।
मेरी ओर से आप सभी को कृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाये 🌼जय श्री कृष्णा🌼

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