कहते है बिना गुरु के ज्ञान नही मिलता अगर आप ज्ञान चाहते है शिक्षा चाहते है तो गुरु का होना जरूरी है। आज जब ऑफिस से घर आया तब मेरे बेटे ने मुझसे कहा कि पापा आपको पता है कल टीचर्स डे है हमारे स्कूल में कल टीचर्स डे मनाया जायेगा। मैं भी अपनी टीचर के लिए फूल ले जाऊंगा। मैने कहा हाँ बेटा जरूर ले जाना। इतनी बात कह वो अपने खेल में लग गया पर मुझे तो अपना बिता कल याद आ गया।
और याद आई अपनी टीचर की। लीना मेम मेरी फेवरेट टीचर। लीना मेम बहुत ही स्वीट मेम थी। मुझे आज भी याद है जब पापा मुझे होस्टल छोड़ने गये थे मैं बहुत नाराज था क्योंकि मुझे होस्टल में नही रहना था। मैं बहुत जिद कर रहा था और बार-बार पापा का हाथ छुड़ा कर भागने की कोशिश कर रहा था। मैं भागा कि सामने लीना मेम आ गई मैं उनसे टकरा गया। मेम ने मुझे रोते देख लिया था उन्होंने पहले मुझे चुप कराया और फिर पापा के पास ले गई। आप बस 5 दिन यहाँ रहकर देखो अगर आपको यहाँ अच्छा नही लगा तो मैं खुद आपको आपके घर छोड़कर आउंगी। बस इतना कहकर लीना मेम चली गई। मैं होस्टल में
रह गया अपने मन से नही बल्कि पापा आखिरकार मुझे छोड़ ही गये। सुबह जब रेडी होकर मैं अपने रूम से बाहर आया तो लीना मेम मुझे बाहर मिली उन्होंने मुझे मेश ,होस्टल और स्कूल की क्लासेस सब के बारे में अच्छे से समझा दिया। और यहाँ के रूल्स भी बताये। मेश का नाश्ता मुझे ज्यादा पसन्द तो नही आया पर भुख भी लग रही थी इसलिए मैंने खा लिया।
और उदास मन लिए जैसे - तैसे अपनी क्लास में पहुँचा बैल बज गई थी मेम आने वाली थी सबने बुक निकाल कर सामने रखली। थोड़ी देर में मेम भी आ गईं ये कोई और नही लीना मेम ही थी पहले मैं यही सोच रहा था की मेम शायद केयर टेकर है जब कि वो यहाँ टीचर है। लीना मेम सभी बच्चो को बहुत ही प्यार से पढ़ाती थी मुझे उनकी क्लास अटेंड करना अच्छा लगने लगा। पढ़ाई में कमजोर बच्चो को लीना मेम एक्सट्रा क्लास लेकर पढाती थी धीरे-धीरे मुझे यहाँ अच्छा लगने लगा था क्योंकि हमारा स्कूल दूर था इसलिए हमारी टीचर्स के लिए भी वही पास में होस्टल था लीना मेम शाम को होस्टल के ही गार्डन में कुछ और टीचर्स के साथ मुझे अक्सर दिखा करती थी मैं भी मेम को देखकर वहाँ चला जाता था क्योंकि मुझे मेम के पास रहना अच्छा लगता था। मेम भी मुझे अपने पास बहुत ही प्यार से बैठाती थी। मैं मेम से अपनी हर बात शेयर करने लगा था मेम ने मुझे हमेशा मोटिवेट किया , क्या सही है क्या गलत ये भी मुझे मेम ने ही बताया। मेम मुझसे हमेशा कहती थी कभी भी कोशिश करना मत छोडना प्रयत्न करते रहो। और हार मत मानो रुको मत चलते रहो अपने आपको इतना सरल रखो के कभी उलझो नही मेम की सारी बाते मैंने ध्यान से सुनी। एक बार मैंने भी टीचर्स डे पर मेम को गुलाब दिया था बड़े ही खुश होते हुए तब मेम ने कहा था कि ये फूल भले ही मुझे मत दो अगर तुम मुझे कुछ देना ही चाहते हो तो बस ये करना के अपने जीवन में एक अच्छे और सफल इंसान बनने की कोशिश करना और हो सके तो कभी किसी की पढ़ाई के लिए सहायता जरूर करना। बस यही बहुत है। मेम की बाते आज भी याद है। मैने पूरी कोशिश की उनके बताये रास्ते पर चलने की और एक अच्छा इंसान बनने की।
गुरु वो प्रकाश है जिसकी चमक से बच्चो का भविष्य उज्वल होता है। गुरु वो है जो हमे अंधेरे से प्रकाश की ओर ले जाते है। गुरु ज्ञान का सागर है।
अपने गुरु का हमेशा आदर करे।

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