विजया



एक बार चलना शुरू कर दो तो वो रास्ते भी नज़र आने लगते है जो कुछ देर पहले दिख भी नही रहे थे। किसी एक जगह खड़े रहकर ये कहना कि आगे रास्ता है ही नही ये खुद को चलने से रोकने का एक अच्छा बहाना है जो मुझे किसी रास्ते या किसी मंजिल तक कभी नही ले जाएगा,  मैं अभी जहाँ हूँ ये मुझे वहीं खड़े रखेगा और मैं ये नही चाहती थी इसलिए रास्ते पर चल पड़ी थी इस वक्त मेरे मन मे मंजिल तक ना पहुँच पाने का कोई डर नही था क्योंकि मेरा लक्ष्य मंजिल को पाना नही था मेरा लक्ष्य तो चलते जाने का था, नये रास्ते बनाने का था वो रास्ते जो किसी को उसकी मंजिल तक पहुँचा सके। बिल्कुल मुश्किल नही था सब आसान रहा मैं अपने रास्ते पर चलती गई और सब हासिल होता गया ये कहना भले ही आसान हो पर इसे मान लेना आसान नही है। सच यही है आसान कुछ भी नही होता है हमे उसे आसान बनाना पड़ता है। जैसे कोई कच्ची सड़क, ऊँची- नीची कहीं- कहीं पर गढ्ढ़े कहीं सकरी ऐसे रास्ते पर चलना ज़रा कठिन होता है लेकिन जब उसे पक्की सड़क में बदल दिया जाता है तो उस पर चलना आसान हो जाता है। हमारे जीवन की सड़क भी ऐसी ही है कच्ची , जिस पर होसलों की गिट्टी और विश्वास की रेत को डालकर उसे पक्का और मजबूत बनाना है ताकि हमारा उस पर चलना आसान हो सके। 
सिर्फ रास्ते ढूंढने में ही दिमाग़ मत लगाओ रास्ते बनाने की भी कोशिश करो। कौन तुम्हारे साथ है ये तलाशना बंद कर दो तुम खुद , कितने साथ हो खुदके ये देखना शुरू कर दो क्योंकि खुद से बेहतर साथी तुम्हारा कोई और हो ही नही सकता। इसलिए ज्यादा सोचो नही बस खुद का हाथ थामकर खड़े हो जाओ और चल पड़ो उस राह पर जो तुम्हारी है उस रास्ते पर जो तुमने बनाया है उस मंजिल की ओर जो सिर्फ तुम्हारी है विजया की इन बातों ने रात के अंधेरे में पस्त होकर सोए हौसलों को जैसे सुबह के उजाले मे तेज़ आवाज़ लगाकर फिर जगा दिया हो।हॉल में बैठा हर एक शक़्स अपनी आँखें विजया पर टिकाये खोमशी के साथ उसकी बातों को सुनता जा रहा था।अपनी बात खत्म कर जैसे ही विजया ने अपने हाथ का माइक टेबल पर रखा तालियाँ गूँज उठी और दस मिनट तक ये गूँज हॉल में बनी रही। सब विजया से बहुत प्रभावित हुए उसकी बातों में वो असर या कहे जादू है जो उस शख्स को भी दौड़ की रेस में खड़ा कर सकता है जिसके चलने की उम्मीद भी न के बराबर हो। कितने साहस और विश्वास से भरी है विजया शर्मा हर एक शक़्स विजया को देख यही सोच रहा था। कॉलेज इवेंट से जाते वक्त फूल एनर्जी के साथ विजया ने सबको शुभकामनाएं दी उनकी भविष्य की जीत के लिए और बड़ी सी मुस्कुराहट के साथ बाय जल्द ही मिलेंगे कहकर विजया चली गई पर सबके मन की आवाज़ में वो कहीं न कहीं खुदको थोड़ा छोड़ गयी। 
हेलो आई एम विजया शर्मा आँखों मे चमक और चेहरे पर तेज़, कॉन्फिडेंट से भरी ये आवाज़ जब लोगो के कानों में पड़ती है तो जोश की एक तरंग दिल और दिमाग से होती हुई पूरे शरीर मे दौड़ पड़ती है और एक नया जज़्बा जगा देती है। कितने लोगो की जिन्दगी बदली है विजया की वजह से ,हजारों लोग है जो विजया को सुनना चाहते है सुनते है उसे पसन्द करते है उसकी बातें इतनी पावरफुल होती है कि सुनने वाले का नज़रिया बदल देती है। कहाँ से आया विजया में इतना आत्मविश्वास शायद बचपन से ही विजया ऐसी ही होगी निडर।
कॉलेज इवेंट से घर आने के बाद विजया धृति के रूम में गई पर धृति सो गई थी और आई धृति के पास बैठी हुई थी तुम आ गई आई ने कहा हाँ बस अभी आई हूँ आई विजया ने आई से कहा। 
अच्छा आप कॉफी पियोगी विजया ने आई से पूछा विजया बेटा मैं बना देती हूँ ना रोज़ तो तुहि बनाकर पीती है थक गई होगी तू, नही आई आज भी मैं ही बनाऊँगी। विजया ने दोनों के लिए कॉफी बनाई और कॉफी का मग आई के हाथ मे देते हुए बोली आई आप आराम करलो मैं हूँ यहाँ धृति के पास ,ठीक है कहकर आई अपने रूम में चली गई। हाथ मे कॉफी का मग लिए विजया खिड़की के पास जा बैठी और सोती हुई धृति को देखने लगी कितने सुकून और बेफ़िक्री के साथ सो रही है धृति, अभी जागी हुई होती तो सबको दौड़ा रही होती अपने पीछे- पीछे पर सोते हुए कितनी शांत लग रही है बिल्कुल मासूस जबकि एक नम्बर की शैतान है। मेरी प्यारी बच्ची कहते हुए विजया ने धृति का सिर चुम लिया। इसके बाद विजया कुछ देर आई के पास बैठी आज का दिन कैसा रहा क्या हुआ सब कुछ बताया जितने चाँव से विजया सारी बातें बताती है उतने ही मन लगाकर आई उसकी सारी बातों को सुनती है आई को भी विजया की बातें सुनना अच्छा लगता है। आसमान में अकेला चाँद होता तो आसमान कितना खाली- खाली लगता चाँद के साथ तारों का होना भी जरूरी है , चाँद के साथ टिमटिमाते तारों से आसमान किसी खूबसूरत चादर की तरह लगता है। भले ही तारे चाँद से छोटे नज़र आते है पर चमकते वो भी है वजूद उनका भी है। 
खिड़की के पास खड़ी आसमान की ओर देख रही विजया यही सोच रही थी तभी मोबाइल स्क्रीन पर लाइट चमकती दिखाई दी आज जिस कॉलेज इवेंट में विजया गई थी वहाँ की प्रिंसिपल का कॉल था हेलो विजया जी आज आपके आने से स्टूडेंट्स बहुत मोटिवेट हुए ऐसे ही सभी को प्रेरित करती रहे, आप एक आत्मविश्वासी और साहसी महिला है अपने कार्य मे इसी तरह आगे बढ़ती रहे हमारी शुभकामना आपके साथ है जी शुक्रिया प्रिंसिपल की बात सुनने के बाद जवाब देते हुए विजया ने कहा। जब कोई तारीफ़ करता है तो हमारा चेहरा खुशी से खिल उठता है पर विजया वो तो किसी गहरी सोच में पड़ गई उसे कॉलेज का वो एग्जाम हॉल नज़र आ रहा है जहाँ स्टूडेंट अपना एग्जाम दे रहे है दो टीचर्स भी है जो स्टूडेंट्स पर नजर रखे हुए है एक स्टूडेंट अपने काँपते हुए हाथों से जल्दी- जल्दी अंसर शीट में कुछ लिखने की कोशिश कर रही है हॉल में लगी घड़ी का काँटा जैसे- जैसे आगे बढ़ रहा था उसके मन की बेचैनी और घबराहट भी उसके साथ बढ़ती जा रही थी तभी पैन हाथ से छूटकर नीचे गिर गया विजया ऐनी प्रॉब्लम, मैम वो पैन विजया धीमी आवाज में बोली ठीक है उठा लो टीचर ने कहा। तब पैन उठाकर मैंने फिर लिखना शुरू कर दिया कुछ देर बाद बैल बज गई एग्जाम का समय खत्म हो गया मैं तेज़ी से हॉल से बाहर आ गई और जल्दी- जल्दी कॉलेज से बाहर निकल टैक्सी में जा बैठी मैंने क्या लिखा कुछ याद नही जो भी सब पढ़ा वो एक साथ दिमाग़ में ऐसे घूमने लगा कि कुुुछ समझ ही नही आ रहा था किस सवाल के लिए मुझे क्या लिखना था मैं भूल गई बहुत कन्फ्यूज हो गई थी। घर पहुँचते ही मैं सीधा माँ के पास गई कहा कुछ नही बस जाकर उनके पास बैठ गई माँ की तबियत ठीक नही हुई थी वो अभी भी बीमार थी। मैं बचपन से ही डरपोक रही हूँ मैं डरती रही और माँ मुझे हिम्मत देती रही। जब भी माँ- पापा के बीच झगड़ा होता तो मैं डर जाती पापा मुझ पर चिल्ला पड़ते तो मैं सहम जाती। स्कूल में मैं ना किसी के साथ खेलती थी और न ही झगड़ती थी ,डरती थी खेलते हुए अगर किसी ने धक्का दे दिया तो में गिर जाऊँगी अगर किसी बच्चे से झगड़ा हुआ तो पनिशमेंट मिलेगी। जब भी मैडम बुक पढ़ने के लिए मुझे क्लास में खड़ा करती तो में ये सोचकर डर जाती की अगर कुछ गलत पढ़ दिया तो मैडम कितना डाँटेगी मुझे उस डर से मैं बुक पढ़ ही नही पाती। एग्जाम में फेल न हो जाऊँ इसलिये दिनरात खूब पढ़ाई करती पर एग्जाम पेपर देखते ही सब भूल जाती। मुझे लेकर माँ को फिक्र होती थी पर वो कभी मुझे पर नाराज़ नही हुई बस हमेशा मुझे समझाती रही। माँ मन से बहुत मजबूत थी पापा ने उन्हें डिवोर्स देकर दूसरी शादी कर ली पर माँ इस बात से टूटी नही, वो मुझे अच्छी परवरिश देने की कोशिश करती रहीं
वो न तो बीते कल को याद करके रोतीं और न ही हमारे आज की प्रोबल्स को देखकर दुखी होती। जब जीवन हमारा है तो चलना भी हमे ही होगा ना, दुखी होकर बैठने और डर कर घबराने से कुछ नही होगा तुम जहाँ हो वही रह जाओगे जबकि जीवन का मतलब चलते जाना है रुकना नही इसलिए घबराना डरना छोड़ दो हिम्मत करके आगे बढ़ना सीखो समझ गई ना बेटा माँ ने जब मुझसे कहा था तो मैंने हाँ में सिर हिला दिया था। पर समझ तब आया जब माँ मुझे छोड़कर चलीं गई अपने आख़री पल में माँ ने मुझसे कहा था जिनकी साँसे थम जातीं है सफर उनका खत्म होता है लेकिन अगर तुम्हारी साँसे चल रही है मतलब तुम्हारा सफ़र जारी है तुम्हे चलना होगा रास्ता न मिले तो घबराना नही खुद रास्ता बनाना पर चलना जरूर।
माँ जाते- जाते मुझे आत्मविश्वास से जीना सीखा गई। मैं अपने कॉलेज एग्जाम में फेल हो गई थी पर दुखी होकर बैठी नही मैंने फिर से तैयारी की फिर एग्जाम दिया इस बार मे पास हो गई कुछ दिन बाद मैं रजनी ताई जोकि माँ की सहेली थी।माँ जहाँ  नौकरी करती थी ताई भी वहीं नौकरी करती थी माँ के बीमार होने पर बहुत साथ दिया था उन्होंने हमारा , वो अकेली थी कोई नही था उनका अपना इसलिए मैं उन्हें घर ले आई। इसके बाद मैंने पार्ट टाइम जॉब जॉइन करली और साथ ही आगे की पढ़ाई करती रही।पर मैं कुछ अलग करना चाहती थी मैंने अलग- अलग तरह के लोगो से मिलना शुरू किया उनकी लाइफ की प्रोबल्स को समझने की कोशिश की , जब उनके जीवन मे कोई दिक्कत या परेशानी होती है तो वो क्या सोचते है उसे लेकर। मैंने सबसे मुलाकातें की शिक्षित अशिक्षति ,स्टूडेंट्स ऑफ़िस वर्कर ,हाउस वाइफ, बिज़नेसमेन ,चिल्ड्रन्स सबको समझने की कोशिश की। ये सब आसान नही था क्योंकि कोई बात करने को तैयार होता और कोई नही भी होता पर मैं हार नही मानती थी मैंने आप के जीवन के सात साल इसी में लगा दिए और इसी बीच मुझे धृति भी मिली मैंने उसे अडॉप्ट कर लिया। मैं अपनी बनाई राह पर चलती गई और कब लोगो के लिए प्रेरक बन गई मुझे पता ही नही चला आज मेरी पहचान एक मोटिवेटर की है। मैं किसी का हाथ पकड़कर उसे चलाना नही चाहती थी मैं बस इतना चाहती थी लोग अपने हौसलों से चलना सीखे। रात आज छोटी हो गई या मैं ही कुछ ज्यादा सोचने बैठ गई 1 बज गये मुझे पता ही नही चला आई को पता चलेगा तो डाँट लगाएँगी मैं और धृति रजनी ताई को आई कहकर बुलाते है आई ही तो है वो हमारे लिए। 
आज फिर एक सैमिनार ,हैलो आई एम विजया शर्मा कोई तुम्हे तराशेगा तुम तभी चमकोगे ये सोचकर मत बैठो तुम खुद , खुदको तराशना शुरू कर दो तुमसे अच्छा तुम्हे कोई और नही निखार सकता। मुश्किलें देखकर तुम कल भले ही लड़खड़ा गए हो पर आज तुम चलना सिख गए हो,  मतलब कल चाहे जैसा भी रहा है जिसका भी रहा हो पर आज तुम्हारा है सिर्फ तुम्हारा।

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