सावन का महीना



गरजते बादल रिमझिम बरसता पानी और चारो ओर
फैली हरियाली ये बताती है की सावन की दस्तक हो गई है।
सावन का महीना यूँ तो सभी को पसन्द है पर मुझे तो ये बहुत ही पसन्द है क्योंकि इस समय जो हरियाली
रहती है और उससे प्रकृति का जो सुन्दर दृश्य बनता है। वह देखने में बड़ा ही मन मोहक लगता है।
थोड़े काले- थोड़े सफेद बादल हरे- भरे पेड़ , पेड़ो की पत्तियों पर ठहरा हुआ बारिश का पानी, पक्षियों की मधुर आवाज, सब कुछ बड़ा अच्छा लगता है। ये मन को एक अलग ही खुशी और सुकुन का एहसास कराता है।
वैसे सावन के महीने की बड़ी ही खास बात ये भी है की इस समय लड़कियों को मायके की बड़ी याद आती है।
वो घर का आँगन, वो सावन के झूले और वो गीत सब कुछ याद आता है। वैसे ये सब माँ के जमाने की बाते है क्योंकि उन्होंने ही सावन के झूलो का आनन्द लिया है
हमे तो ये अवसर मिला ही नही। क्योंकि हम शहर में रहते थे जहाँ ना तो बड़ा सा आँगन था और ना ही नीम का कोई पेड़ जिस पर रस्सी डालकर हम झूल सके। जब हम छोटे थे तब मामाजी माँ को लिवाने आते थे मतलब की वो उन्हें मायके ले जाने आते थे। क्योंकि ये रीति है की लड़कियाँ सावन में अपने मायके आती है राखी का त्यौहार मायके में ही मानती है। और फिर राखी के बाद वापस अपने ससुराल चली जाती है। तब माँ के साथ मैं भी मामाजी के घर जाती थी बड़ा मजा आता था वहाँ सबके साथ। उस वक्त मैं ये सोचती थी के जब मैं भी शादी करके ससुराल चली जाउंगी तब मुझे भी मेरा भाई ऐसे ही लेने आयेगा।
मुझे भी ऐसे ही सावन में अपने मायके की याद आयेगी। और जब मैं मायके जाउंगी तब सब मुझे बहुत लाड़ करेंगे।
आज वो वक्त आ गया। मैं अपने ससुराल में हूँ।
सावन की बुंदे बड़ी भा रही है ये मायके की याद दिला 
रही है। मैंने सावन के झूले तो नही झूले पर सावन के 
गीत जरूर माँ से सुने है जोकि आज मुझे याद आ रहे है। सावन आ गया और राखी भी करीब है। मेरे पडोस की अनिता तो मायके जा भी चुकी है बस मैं ही अभी तक नही गई। मैं इंतजार कर रही हूँ की मुझे भी मेरे मायके से कोई लेने आयेगा ये जानते हुए भी की ऐसा नही होने वाला। मैं अपनी माँ की तरह लक्की नही हूँ मेरी शादी से पहले ही पिताजी गुजर गये और मेरी शादी के बाद माँ भी तीर्थ पर चली गई। एक भाई है जोकि अमेरिका में शिफ्ट हो गया। इसलिए मुझे कोई लेने नही आने वाला। मैं राखी का त्यौहार अपने ससुराल में ही मनाऊंगी।हाँ थोड़ा बुरा जरूर लग रहा है पर मैं दुखी नही हूँ। क्योंकि मैं अकेली नही हूँ जो मायके नही जा पाई। कभी- कभी किसी ना किसी के साथ ऐसा हो ही जाता है की किसी वजह के चलते वो अपने मायके नही जा पाती। इसलिए ज्यादा दुखी नही होना चाहिए। क्योंकि हमारा  ससुराल भी तो किसी का मायका है मायके नही जा सके इसका दुख मनाने की वजह जो अपने मायके यानी आपके घर आई है उनके आने की खुशी मनाये। और सबके साथ मिलकर सावन का मजा ले।मैंने अपना सावन बड़ी ही खुशी के साथ मनाया। भाई को राखी भेज दी और वीडियो कॉल पर उससे बात भी कर ली। और साथ ही यहाँ सावन की बूंदो का जमकर मजा लिया। खूब भीगी मैं इस सावन के पानी में बस इस बार मैं अपनी सहेली के साथ नही बल्कि अपनी ननन्द के साथ हूँ पर खुशी अभी भी वही है जो हर सावन में रहती है।
मेरी यही कामना है कि आप सभी सावन की बूंदो का
जमकर मजा ले और रक्षाबन्धन का पर्व खुशी के साथ मनाये।

No comments:

Post a Comment

एक चुटकी प्रेम

मार्च बित गया था ठंड के नख़रे अब कम हो गए थे कम क्या यूँ कहें कि अब खत्म ही हो गये थे सूरज के तीखे तेवर जो शुरू हो गये थे। अब गर्मागर्म पकोड़े...

Sonal bhatt MULAKAT-KAHANIYO-SE STORY OF OUR LIFE