दोस्तो हमारे साथ कभी-कभी कुछ ऐसा हो जाता है जो हमे बहुत कुछ सीखा देता है।और साथ ही हमारी सोच में बदलाव ला देता है।आज की कहानी ऐसी ही है। ये कहानी है अनुज की। माँ का दुलारा दोस्तो का प्यारा,मन का सच्चा,जिम्मेदारियो में कच्चा।दोस्तो के साथ मौज करने वाला अपने में ही मस्त रहने वाला।ऐसा है अनुज। जोर-जोर से मंत्रो के जाप के साथ घंटी की आवाज सुन बार-बार करवट बदलने के बाद आखिर अनुज नीद से जाग जाता है।माँ के जगाने पर अनुज कभी भी आसानी से नही उठता है पर क्या करे दादी के मंत्रो की शक्ति के आगे अनुज की नींद भक्ति कहा टिकने वाली थी। जागना ही पड़ेगा। दादी पुजा खत्म कर आँगन में आकार बैठ चुकी थी।अनुज के पिताजी भी दुकान पर जाने के लिये तैयार हो गये उनकी कपड़ो की दुकान है। जाने से पहले वे कुछ देर दादी के पास जरूर बैठते है। और कुछ देर बात करते है। माँ नाश्ता बनाकर बाहर ही ले आती है तभी अनुज हँसते हुए अपनी दादी के पास आकर बैठ जाता है और दादी के साथ हँसी मजाक करने लगता है दादी पोते के बीच हँसी मजाक रोज की बात है। पिताजी अनुज की तरफ देखते हुए बड़े ही शांत स्वर से कहते है बेटा पढ़ाई पर ध्यान दे रहे हो या सिर्फ दोस्तो के साथ मौज कर रहे हो। बड़े हो चुके हो जिम्मेदारियां समझो हँसी मजाक में समय बर्बाद ना करो। तुम्हे बहुत कुछ करना है जीवन में। अनुज चुपचाप सारी बात ऐसे सुन राहा था जैसे वह किसी नेता का भाषण सुन रहा हो। जिसे सिर्फ सुनना होता है समझना नही होता।जब कोई नेता हाथ हिला हिलाकर चेहरे के भाव बदलकर बोल रहा होता है वह सब देखकर बच्चो को जो अनुभूति होती है वैसी ही अनुभूति अनुज को भी हो रही थी।मानो के कोई फर्क ही नही पड़ रहा हो।पिताजी को अनुज पर अपनी बात का कोई असर ना होते हुए अलग ही दिख रहा था।वे नीराशा का भाव लिये दुकान चले जाते है।उन्हें अनुज के दोस्तो के साथ घूमने फिरने से कोई दिक्कत नही है वे जानते है कि इस उम्र में बच्चे थोडा मौज मस्ती करते ही है।लेकिन उन्हें जिम्मेदारी और कर्तव्य का भान होना चाहिये।सही गलत की पहचान भी होनी चाहिये। अनुज के पिताजी चाहते है की अनुज कभी दुकान पर आये वहाँ के काम को देखे समझे ताकि जरूरत पड़ने पर सहायता कर सके। काम को सम्हाल सके।लेकिन अनुज को दुकान पर जाना बिल्कुल पसंद नही है।उसे वह बोझ सा लगता है। हर रोज की तरह आज भी अनुज कॉलेज से निकलने के बाद दोस्तो के साथ पास स्थित चाय की होटल पर जाता है चाये समोसे ऑडर कर सभी बातो में लग जाते है।बातो के बीच चाय की चुस्कियां लेते हुए अनुज की नजर एक शक्स पर पड़ती है। जो दिखने में किसी दफ्तर के बाबू लग रहे होते है। वह होटल के मालिक चाचाजी से कुछ देर बात कर हिसाब वाला रजिस्टर देखते है फिर वह काम कर रहे लड़को से कुछ बोलते नजर आते है तो कभी चाये पीने आये ग्राहको से कुछ पुंछते नजर आ रहे थे।अनुज का पूरा ध्यान उस शक्स पे इस तरह था कि उसने अभी तक अपनी चाय भी खत्म नही की थी उसके मन में कई तरह के सवाल आ रहे थे जिन्हें वह उस शक्स से पूछना चाह रहा था।।जब अनुज उस शक्स को बाहर की ओर जाते देखता है तब वह उन्हें सर रुकिए कहकर रोक लेता है वह कहता है सर में आपको काफी देर से देख रहा हु आप दिखने में तो किसी दफ्तर के बाबू नजर आ रहे है। फिर आप चाचाजी की होटल में आकार काम क्यों कर रहे थे। उस शक्स ने उत्तर देते हुए कहा में एक सरकारी दफ्तर में अच्छी पोस्ट पर कार्यरत हूं। ये होटल मेरे पिताजी की है जिन्हें सब चाचाजी कहते है वह मेरे पिताजी है। उन्होंने यहां दिन रात मेहनत कर अपने परिवार की देखरेख की है और मुझे एक काबिल इंसान बनाया है।आज यहां उनकी सहायता के लिए कुछ काम करने वाले लडके भी है जो सारा काम सम्हालते है जिसका उन्हें वेतन मिलता है।लेकिन मेरे यहां आने से पिताजी के चेहरे पर एक अलग सा संतोष दिखाई देता है चाहे में कुछ ही देर यहां रुकु उतने समय के लिए वह निश्चिंत महसूस करते है।हर पिता की ख्वाइश होती है के उसका बेटा बडा होकर उसका सहारा बन साथ खड़ा रहे।मै वही कर रहा हूं।यह सिर्फ एक होटल नही है यह मेरे पिताजी की मेहनत की पूंजी है जिसे सहज कर रखना मेरी जिम्मेदारी है। उस शक्स की इतनी गंभीर बातो को सुन अनुज चुपचाप दोस्तो के पास जा बैठता है।और उनकी किसी भी बात पर कोई प्रतिक्रिया नही देता।रातभर भी अनुज को उस शक्स की बाते याद आती रही।
सवेरा हो चुका था आज अनुज किसी के जगाने के पहले ही उठ गया था दादी के पैर छुकर आशीर्वाद ले ।दादी से थोड़ी हँसी ठिठोलि कर अनुज पिताजी के पास जाता है ओर कहता है मेरी परीक्षा समाप्त हो गई है क्या खाली समय में मै आपके साथ दुकान पर आ सकता हूं मुझे भी तो थोड़ा पता होना चाहिए कि वहां काम कैसे सम्हाला जाता है और इस बहाने में आपकी कुछ सहायता भी कर पाऊंगा।आखिर मेरी भी कुछ जिम्मेदारियां है यह सुन सब आश्चर्य से अनुज की ओर देखते है अनुज पिता का हाथ थाम मुस्कुराते हुये कहता है चलें। अनुज कुछ ही दिनों में बहुत कुछ सिख जाता है और काफी जिम्मेदार भी हो जाता है। अब वह अक्सर दुकान पर आता जाता रहता है।दोस्तो के साथ मौज-मस्ती आज भी जारी थी।फर्क इतना है कि अब वह हर काम समय के अनुसार किया करता था।और आज अनुज वो एक दिन याद कर रहा था जिस दिन अनुज की मुलाकात उस शक्स से हुई थी जिसका काफी गहरा प्रभाव अनुज पर हुआ था।और अनुज की जिंदगी बहुत बदल गई थी।अनुज के लिए वो एक दिन हमेशा के लिए यादगार रहेगा।
