"तेरी बाहों में तेरी पनाहों में आज हूँ मैं। ऐ जिंदगी गले लगा मुझे अपना बना" यूँ तो जिंदगी बड़ी खूबसूरत है
पर इसकी खुबसुरती कभी- कभी हमे जल्दी नजर नही आती। क्योंकि हम अपनी छोटी-छोटी परेशानियों को
इतना बड़ा बना लेते है की बड़ी- बड़ी खुशियां भी उसके आगे छोटी नजर आने लगती है। पर मैं ऐसी नही हूँ। मैं अपनी जिंदगी उत्साह और खुशी के साथ जीती हूँ। और इसकी खुबसुरती को हर पल महसूस करती हूँ। मेरी लाइफ भी बिल्कुल वैसी ही है जैसी हर एक आम इंसान की होती है। सुबह जल्दी जागना , भागते दौड़ते नाश्ता करना और ऐसे ही ऑफिस पहुँच
जाना, दिनभर ऑफिस में काम करना और थककर शाम को घर आना। पर मेरे जीने का अंदाज़ थोड़ा अलग है। मैं जब सुबह उठती हूँ तो सबसे पहले खुद को गुड़ मॉर्निंग कहती हूँ और खुद को अपने इस नये दिन के लिए शुभकामनाये देती हूँ। फिर कुछ देर मैं अपनी माँ के साथ गार्डन में बैठती हूँ जहाँ में उगते हुए सूरज को देखती हूँ और जब उसकी किरणे मुझ पर पड़ती है तब ऐसा लगता है कि उसकी रोशनी से मैं
भी रोशन हो रही हूँ। और फिर कुछ देर बाद फटाफट
नाश्ता कर तैयार होकर अपने ऑफिस पहुँचती हूँ और पूरे ध्यान से अपना काम करती हूँ। जैसे ही लंच
ब्रेक होता है मैं मस्ती के मुड़ मैं आ जाती हूँ अपने कलीग्स के साथ खूब गप्पे लड़ाती हूँ हस्ती हूँ मुस्कुराती हूँ और जैसे ही लंच ब्रेक खत्म होता है मैं फिर से अपने काम में लग जाती हूँ। शाम को जब घर
पहुँचती हूँ 10-15 मिनिट रेस्ट करने के बाद मैं अपना बाकी का समय अपने परिवार को देती हूँ। उनके साथ बैठ कर दिनभर की बाते करती हूँ साथ में टीवी देखती हूँ डिनर करती हूँ और हाँ हर वो बात करती हूँ जिससे होंटो पर मुस्कान आये। और सन्डे बाहर कही घूमने
जरूर जाती हूँ कभी परिवार के साथ तो कभी अपने दोस्तो के साथ। और खूब इंजॉय करती हूँ। ऐसा नही
है के इस सब के बीच कभी कोई परेशानी नही आती।
आती है पर अब मैं परेशानी को इतना तवज्जो नही देती। बल्कि बिना ज्यादा परेशान हुए उन्हें हल करने की कोशिश करती हूँ।
कितनी सुलझी हुई हूँ ना मैं। पर आज से तीन साल पहले ऐसा नही था माँ की तबियत अचानक खराब हो
गई थी घर में टेशन का माहौल था। और उधर ऑफिस के काम का बोझ। मैं तो परेशानियों के तले दबी जा रही थी। ना हँसना ना मुस्कुराना बस हर वक्त परेशान रहना कुछ ऐसी हो गई थी मेरी जिंदगी। तब मुझे किसी ने समझाया की परेशानियां सबकी लाइफ में होती है पर इसके चलते जिंदगी की खुशियों को कम नही होने देना चाहिए। बल्कि खुश रहकर हर परेशानी को हल करने की कोशिश करनी चाहिए। और जिंदगी को दिल से जीना चाहिए इसकी खुबसुरती को महसूस करना चाहिए। बस तब से मैंने अपनी जिंदगी जीने का
अंदाज़ ही बदल दिया और खुश होकर जीना शुरू कर दिया। सच में वक्त के साथ सारी परेशानियां हल हो गई सब ठीक हो गया। और मुझे अपनी जिंदगी बड़ी खुबसूरत लगने लगी। अगर हम अपनी लाइफ मैं
खुशियों को ढूंढेंगे तो हमे वही मिलेगी। हर दिन एक नया दिन है जिसमे हमारे लिए बहुत कुछ नया है। बहुत कुछ अच्छा है बस जरूरत है उसे पहचानने की।
मुझे तो अपनी जिंदगी से बड़ा प्यार है मैं जब कही घूमने जाती हूँ तो यही गुनगुनाती हूँ ऐ जिंदगी गले लगा ले।
इस जिंदगी में कभी शहद की मिठास है तो कभी नीबू की खटास है। ये कभी नमकीन तो कभी बेस्वाद है।
पर तु जैसी भी है ऐ जिंदगी मुझे तुझसे प्यार है।
ऐ जिंदगी मुझे तुझसे प्यार है।
इतना बड़ा बना लेते है की बड़ी- बड़ी खुशियां भी उसके आगे छोटी नजर आने लगती है। पर मैं ऐसी नही हूँ। मैं अपनी जिंदगी उत्साह और खुशी के साथ जीती हूँ। और इसकी खुबसुरती को हर पल महसूस करती हूँ। मेरी लाइफ भी बिल्कुल वैसी ही है जैसी हर एक आम इंसान की होती है। सुबह जल्दी जागना , भागते दौड़ते नाश्ता करना और ऐसे ही ऑफिस पहुँच
जाना, दिनभर ऑफिस में काम करना और थककर शाम को घर आना। पर मेरे जीने का अंदाज़ थोड़ा अलग है। मैं जब सुबह उठती हूँ तो सबसे पहले खुद को गुड़ मॉर्निंग कहती हूँ और खुद को अपने इस नये दिन के लिए शुभकामनाये देती हूँ। फिर कुछ देर मैं अपनी माँ के साथ गार्डन में बैठती हूँ जहाँ में उगते हुए सूरज को देखती हूँ और जब उसकी किरणे मुझ पर पड़ती है तब ऐसा लगता है कि उसकी रोशनी से मैं
भी रोशन हो रही हूँ। और फिर कुछ देर बाद फटाफट
नाश्ता कर तैयार होकर अपने ऑफिस पहुँचती हूँ और पूरे ध्यान से अपना काम करती हूँ। जैसे ही लंच
ब्रेक होता है मैं मस्ती के मुड़ मैं आ जाती हूँ अपने कलीग्स के साथ खूब गप्पे लड़ाती हूँ हस्ती हूँ मुस्कुराती हूँ और जैसे ही लंच ब्रेक खत्म होता है मैं फिर से अपने काम में लग जाती हूँ। शाम को जब घर
पहुँचती हूँ 10-15 मिनिट रेस्ट करने के बाद मैं अपना बाकी का समय अपने परिवार को देती हूँ। उनके साथ बैठ कर दिनभर की बाते करती हूँ साथ में टीवी देखती हूँ डिनर करती हूँ और हाँ हर वो बात करती हूँ जिससे होंटो पर मुस्कान आये। और सन्डे बाहर कही घूमने
जरूर जाती हूँ कभी परिवार के साथ तो कभी अपने दोस्तो के साथ। और खूब इंजॉय करती हूँ। ऐसा नही
है के इस सब के बीच कभी कोई परेशानी नही आती।
आती है पर अब मैं परेशानी को इतना तवज्जो नही देती। बल्कि बिना ज्यादा परेशान हुए उन्हें हल करने की कोशिश करती हूँ।
कितनी सुलझी हुई हूँ ना मैं। पर आज से तीन साल पहले ऐसा नही था माँ की तबियत अचानक खराब हो
गई थी घर में टेशन का माहौल था। और उधर ऑफिस के काम का बोझ। मैं तो परेशानियों के तले दबी जा रही थी। ना हँसना ना मुस्कुराना बस हर वक्त परेशान रहना कुछ ऐसी हो गई थी मेरी जिंदगी। तब मुझे किसी ने समझाया की परेशानियां सबकी लाइफ में होती है पर इसके चलते जिंदगी की खुशियों को कम नही होने देना चाहिए। बल्कि खुश रहकर हर परेशानी को हल करने की कोशिश करनी चाहिए। और जिंदगी को दिल से जीना चाहिए इसकी खुबसुरती को महसूस करना चाहिए। बस तब से मैंने अपनी जिंदगी जीने का
अंदाज़ ही बदल दिया और खुश होकर जीना शुरू कर दिया। सच में वक्त के साथ सारी परेशानियां हल हो गई सब ठीक हो गया। और मुझे अपनी जिंदगी बड़ी खुबसूरत लगने लगी। अगर हम अपनी लाइफ मैं
खुशियों को ढूंढेंगे तो हमे वही मिलेगी। हर दिन एक नया दिन है जिसमे हमारे लिए बहुत कुछ नया है। बहुत कुछ अच्छा है बस जरूरत है उसे पहचानने की।
मुझे तो अपनी जिंदगी से बड़ा प्यार है मैं जब कही घूमने जाती हूँ तो यही गुनगुनाती हूँ ऐ जिंदगी गले लगा ले।
इस जिंदगी में कभी शहद की मिठास है तो कभी नीबू की खटास है। ये कभी नमकीन तो कभी बेस्वाद है।
पर तु जैसी भी है ऐ जिंदगी मुझे तुझसे प्यार है।
ऐ जिंदगी मुझे तुझसे प्यार है।

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