याद है



आज मुझे अपनी गाड़ी का धीमी गति से चलना अच्छा
लग रहा था गाड़ी धीमे-धीमे चल रही थी और मैं कार
की खिड़की से बाहर की ओर बड़े ही शांत भाव से देख रहा था पेड़ो की हिलती पत्तियां, सड़क पर चलती गाड़िया, फुटपाथ पर चलते लोग आज ये सब देख मुझे बहुत अच्छा लग रहा था ऐसा नही था के मैं ये रोज नही देख पाता। ऑफिस जाते वक्त मुझे ये रोज ही नजर आता है पर आज की बात ही अलग है क्योंकि आज एहसास अलग है आज फिर सब कुछ अपना सा लग रहा है ये कॉलेज की ओर जाता रास्ता भी। इतने सालो बाद आज अपने कॉलेज ही तो जा रहा हूं मैं।आज कॉलेज में ओल्ड स्टूडेंट्स मिट नाम से प्रोग्राम रखा गया है जिसमें सत्र 93 बेच के सभी स्टूडेंट्स को बुलाया गया है। जहाँ आकर सभी अपने बीते पलो को एक बार फिर से जीने वाले है और बहुत सी यादो को याद भी करने वाले है। मैं गाड़ी में बैठे- बैठे सोच रहा था की अब तो बहुत कुछ बदल गया होगा कॉलेज में।शायद अब वहाँ कुछ भी अपना सा न लगे। मैं अपनी सोच में डूबा हुआ था की तभी गाड़ी रुक जाती है मैं कुछ सवाल करता उसके पहले ही ड्रायवर ने कहा - सर कॉलेज आ गया। मैं गाड़ी से उतरा उतरते ही मेरी नजर कॉलेज का जो बाहर वाला गेट था उस पर पड़ी वो बिल्कुल वैसा ही था जैसा पहले था कोई बदलाव नही था उसमे। मैं आगे बढ़ा आगे बढ़ते वक्त मुझे वो दिन याद आ रहे थे जब मैं बड़े इतराते हुए कॉलेज में इंटर होता था मैं और मेरे दोस्त ऐसा समझते थे जैसे मानो इस पूरे कॉलेज पर हमारा ही अधिकार हो। क्या सोचते थे ना हम। खैर अपनी यादो को रोकते हुए मैं  गेट से अन्दर गया। मेन गेट से अंदर होते ही मुझे सबसे पहले पार्किंग वाली जगह नजर आई वही जगह जहाँ कभी मैं अपने दोस्तो के साथ बैठा करता था हम सब के पास तो गाड़ी नही थी पर दो तीन दोस्त थे जिनके पास गाड़ी थी जिसका लाभ हम सब मिलकर लिया करते थे पार्किंग एरिया से थोड़ा आगे चलकर सीधे हाथ पर कॉलेज की बिल्डिंग का पहला गेट आता है जहाँ अंदर जाते ही बड़ा सा नोटिस बोर्ड नजर आता है जिस पर होने वाले कार्यक्रम, एग्जाम कोई नया नियम सब की सूचना दी जाती थी कोई खास नोटिस लगने पर  तो यहाँ पल भर में भीड़ इकट्ठा हो जाती थी आज भी इस पर कई सारे नोटिस लगे हुए है। पर आज इस नोटिस में क्या लिखा है ये जानने की कोई जल्दी मुझे नही है। नोटिस बोर्ड देख प्रिंसिपल डिपार्टमेंट के सामने से होता हुआ मैं हॉल में जा पहुँचा जहाँ मुझे पहुँचना था वहाँ पहले से ही कई पुराने स्टूडेंट मौजूद थे  जिनमे कुछ मेरे दोस्त भी थे जिन्हें देख मेरी आँखो को राहत मिली
क्योंकि हॉल में आते ही मेरी आँखे उन्ही को ढूंढ रही थी हम सब दोस्त एक दूसरे को देख खुश हुए आपस में गले मिले और फिर बैठकर बाते करने लगे। शुरुआत में तो हम ऐसे पेशा रहे थे जैसे कॉलेज फ़्रेंड नही साथ काम करने वाले सहकर्मी हो। लेकिन कब तक ऐसे सम्हल- सम्हल कर बात करते थोड़ी देर में ही अपने पुराने रंग में आ ही गये। और शुरू कर दिया
एक दूसरे की खिल्ली उड़ाना फिर वापस से वही मजाक मस्ती का माहौल जम गया जो तब हुआ करता था। मुझे अच्छी तरह याद है कैसे उस समय सबका अपना- अपना ग्रुप होता था। और हाँ झगड़ा भी कोई दो लोगों के बीच नही बल्कि दो ग्रुप के बीच चलता था। मेरे ग्रुप में हम आठ दोस्त थे दीपक, पंकज, आशीष, अरुण, विकास, शीतल, मालिनी, और मैं सागर गुप्ता। हम सब कॉलेज में साथ-साथ ही घुमा करते थे याद है मुझे किस तरह क्लास से ज्यादा समय तो हम कैंटीन में बैठकर गुजारा करते थे खूब गप्पे लड़ाना इसकी उसकी बाते करना , टेबल बजाबजा कर गाने गाना, अपने टीचर्स
की नकल करना, शीतल और मालिनी तो दूसरे ग्रुप की लड़कियों की बुराई करने में लगी रहती थी कितना इतराती है ना वो ,कैसे चलती है पता नही खुद को क्या समझती है। मुझे तो बिल्कुल पसन्द नही है वो। ऐसा मालिनी कहती और शीतल हाँ-हाँ  करती। हमे तो खूब हँसी आती थी दोनो की बातो पर । मालिनी को गुस्सा बहुत आता था और शीतल शीतल ही थी शीतल किसी पर भी ज्यादा ध्यान नही देती थी देती भी कैसे उसका सारा ध्यान विकास पर जो केंद्रित था।
पूरी क्लास की नजर इन दोनो पर रहती थी और ये दोनो थे की एक दूसरे की आँखो में खोये रहते थे। हमारे ग्रुप में यही एक जोड़ा था बाकी सब सिंगल थे।
पंकज और दीपक को सिर्फ अपने भविष्य की चिंता थी उन्हें अपना करियर बनाना था इसलिए वो प्रेम के चक्कर में पड़े ही नही। और आशीष अरुण दोनो को कभी किसी लड़की ने कोई भाव ही नही दिया। पर मेरे सारे दोस्त दिल के बड़े सच्चे थे मुझे आज भी याद है जब दी हुई तारीख पर फीस जमा करनी थी और घर में किसी परेशानी के चलते आशीष के पास फीस के पूरे पैसे नही थे मैं अरुण विकास हम तीनो अपने- अपने पैसे मिलाकर आशीष की फीस भरने जा रहे थे
तभी मालिनी सामने आ खड़ी हुई चेहरे पर झूठा गुस्सा दिखते हुए आशीष की ओर देखते हुए बोली कही जाने की जरूरत नही है मैने तेरी फीस भर दी है पर तु ये मत समझना के पैसे वापस नही करने पड़ेंगे।
तेरे पास जैसे ही पैसे आये चुपचाप दे देना समझा। मैं और शीतल लायब्रेरी जा रहे है तुम लोग कैंटीन जाओ हम थोड़ी देर में वही आ जायेंगे इतना कहकर वो चली गई। हम कुछ भी नही कह पाये बस खड़े रह गये। इस बात से याद आया मालिनी नही आई क्या उसे नही बुलाया गया है। मालिनी ने पीछे से आवाज लगाते हुए कहा आई हूँ मैं भी बस तुझे दिखी ही नही। मैं मुस्कुराया और जाकर मालिनी से मिला मालिनी साड़ी में अच्छी लग रही थी हम सबको लगता था के ये कभी शादी नही करेगी पर शुक्र है भगवान का के अजित इसे मिल गया उसने इसके मन के फैसले को बदल ही दिया और आखिर शादी कर ही ली।पंकज अरुण आशीष मैं मालिनी दीपक हम सब आ चुके थे और याद कर रहे थे कि कैसे क्लास में प्रेजेंट सर बोल कर एक दूसरे की अटेंडेंस लगवा दिया करते थे। मैं और विकास तो ज्यादातर क्लास से बाहर ही रहते थे। और एंवल फंक्शन उसमे तो क्या मजे करते थे याद है शीतल और विकास ने क्या कपल डांस किया था बेचारी शीतल विकास ने उसे इतना बुरा गिराया था कि पूरे 15 दिनों तक ठीक से चल भी नही पाई थी वो। खूब गुस्सा हुई थी वो विकास से पर विकास ने उसे बड़े प्यार से मना भी लिया था। अपने सारे दोस्तो में मैं ही था जो थोड़ा ज्यादा मस्तीखोर था मेरी वजह से भी मेरे दोस्तो को खूब डाट भी पड़ी। ऐसे ही हस्ते लड़ते
मौज करते कॉलेज की पढ़ाई पूरी हो गई थी फिर शुरू हुआ हमारा करियर शुरुआती साल मुशकिल भरे रहे
पर मेहनत और कोशिश से हमने अपने सारे सपने तो नही पर कुछ सपने जरूर पूरे कर लिए थे मालिनी ही हम सब में ज्यादा लक्की रही उसके सपने हमसे पहले पूरे हुए। आज भी इतने सालो बाद मिलने पर हम लोगों में कुछ नही बदला सारी आदते वैसी की वैसी ही है। बस अभी कमी हमे विकास और शीतल की महसूस हो रही है विकास पूरे एक घन्टे लेट आया
बोहोत खुशी हुई आज उससे मिल कर थोडा बदल गया है विकास पहले जैसा बिल्कुल नही है उसके चेहरे की मुस्कुराहट पहले से कम हो गई है इसकी वजह हम सबको पता है इसलिए हमने उससे कुछ नही पूछा। शीतल और विकास का रिश्ता कॉलेज की पढ़ाई के साथ ही खत्म हो गया था शीतल के घर वालो ने उसकी शादी कही और करवा दी। और फिर विकास के पापा ने भी अपने दोस्त की बेटी से विकास की शादी करा दी पर शायद विकास खुश नही है अभी भी उसके मन में कही ना कही शीतल ही है।हम सब यही चाहते है की विकास लाइफ में आगे बड़े और खुश रहे। और साथ ही यही कामना है की हम लोगों की ये दोस्ती हमेशा बरकरार रहे अपनी इन कॉलेज लाइफ की यादो को कभी ना भूले। सच में कॉलेज टाइम के पल बहुत ही खूबसूरत पल होते है। इन्हें कभी नही भुलाया जा सकता जब कभी भी दिमाग सवाल करेगा तो मन बस यही कहेगा याद है। हर बात याद है।





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