नया घर और डर

गाड़ी से सामान लाकर घर में रखा जा रहा है पलक
पूरे घर में यहाँ से वहाँ दौड़ लगा रही है वो बड़ी खुश
है। और खुशी की वजह ये है की हम नये घर में आ 
गये है नये घर की खुशी हमे भी है पर साथ ही पुराना
घर छोड़ने का थोड़ा दुख भी है। उस घर से हमारी 
बहुत सी यादे जो जुड़ी हुई है। जोकि बहुत ही मीठी यादे है। पर फिलहाल यादो पर विराम लगाते हुए मैं
अपना काम शुरू कर लेती हूँ। घर में सामान की
सेटिंग। कौन सा सामान कहाँ अच्छा लग रहा है कैसे
रखना है मैं और ऋषि हम दोनो मिल कर यही सोच
रहे है धीरे-धीरे हम दोनो ने सामान की सेटिंग कर ही
ली बस कुछ तस्वीरे ही है जो दीवार पर लगानी है
इस बात पर मेरी और ऋषि की थोड़ी बहस भी हो गई
पर फिर हम दोनो ने मिलकर डिसाइड कर ही लिया
की हम तस्वीरों को हॉल की साइड वाली दीवार पर
लगाएंगे। चलो खूब मेहनत और थकान के बाद घर में
सारे समान की सेटिंग हो ही गई। पलक का रूम भी
अच्छे से तैयार कर दिया है क्योंकि मैडम भले ही अभी
सिर्फ 11 साल की है पर उसे सब परफेक्ट चाहिए वो बात अलग है की वो खुद ही बाद में पूरे रूम की हालत बिगाड़ देगी। वैसे मुझे मेरे नये घर में गार्डन ही है जो बोहोत भा रहा है मैंने यहाँ फूलो वाले पौधे लगाये है। देखते ही देखते पूरा एक सप्ताह हो गया है हमे यहाँ आये हुए। सुबह का सूरज निकल गया है और ये इशारा कर रहा है की मैं झटपट अपना काम शुरू करूँ क्योंकि ऋषि को ऑफिस और पलक को स्कूल जाना है। ऋषि के ऑफिस जाने के बाद मैं पलक को स्कूल बस में बैठाकर घर आ पलक के रूम की
सफाई करने लगी।तभी मुझे ऐसा एहसास हुआ की
जैसे कोई हॉल में है मुझे किसी के कदमो की आहट
सुनाई दे रही थी मैं तुरन्त हॉल में गई यहाँ वहाँ देखा
तो कोई नही था मैं इसे अपना वहम मानकर वापस
अपने काम में लग गई। रात को सारे काम से निपट मैं
हॉल की लाइट बंद कर अपने रुम में जा रही थी की
खिड़की की आवाज ने मुझे रोक लिया हॉल की
खिड़की खुली थी और उसी की ही आवाज आ रही थी
मैं खिड़की बंद करने गई। खिड़की बंद करते वक्त मेरी नजर गार्डन पर पड़ी मैने वहाँ किसी को देखा मैं घबरा
गई जल्दी से बाहर की लाइट ऑन की और जब मैने दुबारा वहाँ देखा तो कोई नही दिखा। तब मैंने सोचा की यहाँ वाकई में कोई था या मैं बेवजह ही डर गई।
ज्यादा ना सोचते हुए मैं अपने रूम में जाकर सो गई।
पर सच कहुँ तो मेरे मन में ना जाने कैसे-कैसे ख्याल
आ रहे थे और वही सोचते-सोचते मेरी आँख लग गई।
सुबह मेरी नींद जरा जल्दी खुल गई मैने सोचा उठ ही
जाती हूँ क्योंकि सुबह काम भी ज्यादा होता है मैं
उठकर रूम से बाहर आई हॉल की तरफ जा रही थी
की मुझे पलक के रूम से कुछ आवाज सुनाई दी मुझे
लगा पलक जाग गई है मैने पलक के रूम का दरवाजा
खोला देखा पलक तो सो रही है मुझे लगा की शायद
पलक की आवाज मेरे कानो में गूंजने लगी है इसीलिए
मुझे आवाज सुनाई दी। जबकि पलक सो रही है।
सुबह के 9 बज गये थे ऋषि ऑफिस के लिए निकल
गये थे पलक स्कूल के लिए तैयार हो रही थी लेकिन
वो मेरे पास आकर कहती है की उसकी तबियत ठीक
नही है वो आज स्कूल नही जाएगी। उसका चेहरा
देख लग रहा था की वो झूठ बोल रही है पर मैने उससे
पूछा नही और ठीक है बोल कर मैने उसे उसके रूम
में भेज दिया। वो अपना नाश्ता भी अपने रूम में ही ले
गई। मुझे पलक का बर्ताव कुछ अलग सा लग रहा है
पूरा दिन आज वो रूम में ही है बाहर ही नही आयी
और ना मुझे अपने रूम में आने दे रही है मुझे चिंता
सी होने लगी और थोड़ा डर सा भी लगने लगा आखिर हो क्या रहा है पहले मुझे घर में किसी के होने का एहसास हुआ और अब पलक ना जाने इसे क्या हो गया। मैं पलक के लिए जूस बनाकर उसके रुम की ओर ही आ रही थी तब मुझे कोई परछाई सी नजर आई। मैं दौड़कर पलक के रूम में गई और तब जो देखा वह देख में चोंक गई।
            पलक के रूम में एक छोटी सी बच्ची थी जो
करीब 5 साल की होगी। मासूम सा चेहरा थोड़े बिखरे से बाल वाइट कलर की फ्रॉक जोकि थोड़ी मेली से हो गई थी। कुछ ऐसी हालत में थी वो बच्ची। वो मुझे देख छिपने लगी। उस वक्त मेरे दिमाग में ना जाने कितने
सवाल आये जिनके जवाब मुझे ही ढूंढने है। पलक से
मैने उसके बारे में जाना वो लड़की दो दिन से घर में
है और हमे पता ही नही है। पलक को भी कल रात में
इसके बारे में पता चला। घर में जो घटनाएं हो रही थी
वो सब इसी की वजह से हो रही थी किसी के होने का
एहसास , रात में गार्डन में किसी का दिखना , और
पलक के रूम से किसी की आवाज आना। और मैं ना
जाने मन क्या- क्या सोचे जा रही थी। पलक ने
मुझे बताया की ये लड़की खो गई है ये अपने घर से
अकेली ही पार्क जाने के लिए निकली थी पर रास्ता
भटक जाने की वजह से ये यहाँ आ पहुँची और हमारे
घर में आकर छिप गई। पलक की बात सुनने के बाद
पहले तो मैने उस पर गुस्सा किया की उसने हमे
बताया क्यों नही पर फिर बाद में मैंने उसे प्यार से
समझाया की उसे हमसे ये बात नही छिपानी चाहिए
थी। मैंने ऋषि को फोन कर घर बुलाया सारी बात
बताई और फिर हम दोनो ने पुलिस को इसकी
जानकारी दी और उस बच्ची के माता- पिता को ढूंढा।
हम सब की कोशिशो ने उस बच्ची को वापस अपने
घर वालो से मिला दिया और तब जाकर मैंने चेन की
साँस ली। हम घर आ गये।मैं ऋषि और पलक हम
तीनो हॉल में बैठे हुए थे मैं बैठे- बैठे यही सोच रही थी की नये घर में आये ज्यादा वक्त भी नही हुआ और मैंने
यहाँ डर भी महसूस कर लिया। खैर अंत भला तो सब भला अब सब कुछ ठीक हो गया है और हम हमारे नये घर में खुश है।





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