मुलाकात- भाग 2



पिछले भाग में हमने जाना की अपने भाई की शादी में अनिकेत की मुलाकात उसी लड़की से होती है जिसे
उसने मार्केट की शॉप पर देखा था। दोनो की इस छोटी
सी मुलाकात का अनिकेत पर क्या असर हुआ और क्या उनकी दुबारा मुलाकात हुई। ये हम जानेंगे कहानी के इस भाग में।
तो चलिये कहानी शुरू करते है।
अनिकेत के भाई की शादी बड़े अच्छे से सम्पन हो जाती है। नई दुल्हन का गृहप्रवेश भी हो जाता है। घर में सब नई
बहु के आने से खुश है अनिकेत भी भाभी
के आने से खुश तो था पर शायद उसके दिमाग में कुछ
चल रहा था कहीं ना कहीं उस मुलाकात का उस पर कुछ असर सा हो रहा था। उसे रह रहकर उस लड़की
का ख्याल आ रहा था। कुछ दिनों तक ऐसे ही चलता रहा ।अनिकेत यहाँ-वहाँ मन लगाने की पूरी कोशिश कर रहा था पर बार-बार उस लड़की
का चेहरा उसकी आँखो के सामने आ रहा था और
साथ ही उसे इस बात का अफसोस दिला रहा था कि
जाते-जाते उसने उस लड़की से उसका नाम जानने की कोशिश भी नही की।अब अनिकेत के मन में एक बेचैनी सी हो रही थी यह बेचैनी थी उसका नाम जानने की उसके बारे में जानने की और शायद उसे एक बार देखने की। ना उसे कुछ अच्छा लग रहा था और नाहि उसका कही मन लग रहा था अनिकेत यह तय नही कर पा रहा था की वह
उस लड़की के बारे में जानने की कोशिश करे या नही।
दिल और दिमाग दोनो ही अलग - अलग दिशा में
जा रहे थे हाँ और ना के बीच फसा अनिकेत हाँ को चुनता है यानी दिल की बात सुनता है वह ठान लेता है की वह उस लड़की के बारे में जरूर मालूम करेगा।
अब सवाल ये था की वह पता कैसे लगाये। काफी देर
सोचने के बाद अनिकेत जाता है भईया भाभी के पास
उनकी शादी की तस्वीरे देखने। तस्वीरों में वह उस लड़की को ही खोज रहा था मेहनत रंग लाती है और
शादी में आये लोगों के बीच बैठी वह एक तस्वीर में नजर आ जाती है। अनिकेत बातो को गोल-गोल घुमाकर
इसकी उसकी बाते कर अपनी भाभी से उस लड़की के बारे में जानने का प्रयास करता है यह सोच कर की शायद इन्हे पता हो की ये कौन है। अंधेरे में चलाया गया अनिकेत का ये तीर निशाने पर लगता है  भाभी से बातो ही बातो मे पता चलता है कि वह लड़की उनकी बहन पूजा की दोस्त है और उसका नाम नूपुर है। वह उनके घर कभी कभी आती- जाती भी रहती है। यह सब सुन खुशी से अनिकेत की आँखो में मानो तारे चमकने लगते है और नूपुर नाम  सोचते ही उसे कानो में घुंगरू की झंकार सी सुनाई देने लगती है। उसे इस बात से थोड़ा सुकुन मिलता है की उस लड़की के बारे कुछ तो पता चला।
अब अनिकेत ये सोच रहा था कि नूपुर से मिले तो मिले कैसे। उसे अच्छी तरह पता था कि भाभी की बहन पूजा ही है जिसके सहारे वो नूपुर तक पहुँच सकता है। और इसके लिए उसे पहले पूजा से दोस्ती करनी पड़ेगी जोकि मुश्किल बिल्कुल नही है क्योंकि
वो रिश्तेदार है मिलना जुलना होता ही रहता है और वो कभी-कभार भाभी से मिलने आ ही जाती है। बस अपनी योजना के अनुसार अनिकेत ने पूजा से दोस्ती कर ही ली। दोनो अच्छे दोस्त बन गये। अब अनिकेत
ऐसा मौका तलाश रहा था जिससे वह नूपुर से मिल पाये। और वो मौका मिल जाता है पूजा के जन्मदिन पर। पूजा के घर एक छोटी सी पार्टी रखी जाती है जिसमे वह अपने सारे दोस्तो को बुलाती है। और ये सलाह अनिकेत ही पूजा को देता है। पार्टी शुरू होती है पूजा के सारे दोस्त आ जाते है बस नूपुर ही अब तक नही आई थी जिसके आने का इंतजार पूजा से ज्यादा अनिकेत कर रहा था। पर कुछ देर बाद वो आ
जाती है नूपुर को देख अनिकेत के दिल की धड़कने
थोड़ी तेज हो जाती है। उन तेज धड़कनो के साथ वो बड़े ही प्यार से नूपुर को निहार रहा होता है।पूजा पहले ही अनिकेत को अपने दोस्तो से मिला चुकी होती है बस नूपुर ही रह गई थी नूपुर के आते ही वो उसे भी अनिकेत से मिलवाती है। नूपुर और अनिकेत दोनो एक दूसरे की ओर देखते है नूपुर का चेहरा देख अनिकेत को साफ पता चल रहा था की उसे वो मुलाकात याद है। वो दोनो पहले मिल चुके है  ये बात बस पूजा को नही पता थी।अनिकेत नूपुर से कुछ कहना चाह रहा था पर कह न सका। लेकिन पूरे
समय उसकी निगाहे नूपुर पर ही टिकी थी। बाद में हिम्मत कर वो नूपुर से जाकर पूछ ही लेता है- क्या हम दोस्त बन सकते है। नूपुर को भी अनिकेत शायद अच्छा लगा इसलिए वो कुछ पल सोचती है और फिर सिर हिलाते हुए हाँ कह देती है इसके बाद दोनो के बीच कुछ देर बाते भी होती है कुछ समय बाद पार्टी खत्म होती है और नूपुर चली जाती है।
क्योकि अब अनिकेत और नूपुर की दोस्ती हो चुकी थी इसलिए इनका मिलना जुलना भी शुरू हो गया था
कभी मार्केट तो कभी पार्क तो कभी कही इनकी मुलाकात होने लगी थी पर कभी भी दोनो अकेले नही मिले पूजा भी उनके साथ रहती थी। जिसे अनिकेत ही बुलाता था वो नही चाहता था के नूपुर किसी भी तरह से असहज महसूस करे। धीरे-धीरे  अनिकेत ने नूपुर से जुड़ी हर बात जान ली थी जैसे उसकी पसन्द उसकी आदते उसकी ख्वाईशें सब अब तो अनिकेत उसके मन की बातो को भी समझने लगा था हर दिन के साथ नूपुर के लिए उसका प्यार बढ़े चला जा रहा था अनिकेत के  दिल में क्या है इस बात से नूपुर अंजान नही थी उसने अनिकेत की आँखो में खुद के लिए प्यार बहुत पहले ही देख लिया था वो अच्छी तरह जानती थी की अनिकेत उसे कितना चाहता है और उसकी कितनी परवाह करता है। वो तो बस इंतजार कर रही है के अनिकेत कब उससे अपने दिल की बात कहेगा। पर अनिकेत है के कुछ कह ही नही रहा था।
और कुछ दिनों से दोनो की मुलाकात भी नही हुई थी।
अनिकेत किसी वजह से मिलने नही आ पा रहा था पर इससे नूपुर जरूर परेशान हो गई थी। उसे अनिकेत को देखने की आदत जो पड़ गई थी उसके ना देख से वो थोड़ी सी बेचैन हो जाती है। जब उसकी अनिकेत से फोन पर बात होती तो वो उस पर थोड़ा गुस्सा भी करती है और फिर उसे मिलने के लिए कहती है। शाम को अनिकेत और नूपुर दोनो झील के पास चौपाटी वाली जगह पर मिलते है अनिकेत ने पूजा को भी आने को कहा था पर वो कुछ काम आ जाने के वजह से नही आ पाती। इस बार नूपुर और अनिकेत दोनो अकेले थे अनिकेत को हल्की सी घबराहट हो रही थी और मन में थोड़ी उतलपुथल सी भी मची थी कुछ ऐसा ही हाल नूपुर का भी था उनके आस पास चौपाटी पर और भी कई लोग थे जोकि आपस में खूब बाते की किये जा रहे थे पर वो दोनो खामोश बैठे हुए थे कुछ बोल ही नही रहे थे नूपुर ने ही फिर बात करना शुरू किया वो भी इधर- उधर की बातो से तभी अनिकेत चाय के स्टॉल पर जाता है
और दोनो के लिए चाय ले आता है दोनो चाय का ग्लास पकड़े हुए थे और झील की ओर देखे जा रहे थे दोनो को ही एक दूसरे से बहुत कुछ कहना था पर कह ही नही पा रहे थे ये जहाँ खड़े थे वहाँ से झील की ओर देखने पर शाम का नजारा बहुत सुन्दर दिखाई दे रहा था नूपुर ये अनिकेत को बता रही थी और तभी दोनो की नजरे आपस में टकरा जाती है और दिल की बात आँखो से बया हो जाती है दोनो एक दूसरे को देखे जा रहे थे तभी अनिकेत अचानक से कहता है की शाम ज्यादा हो गई है हमे चलना चाहिए। अनिकेत नूपुर को घर छोड़ते हुए अपने घर चला जाता है। इधर नूपुर समझ नही पा रही थी की आखिर अनिकेत उसे अपने दिल की बात क्यों नही कह रहा। उधर अनिकेत भी परेशान था वो नूपुर को सब बताना तो चाहता है पर उसे डर है की कही वो नाराज ना हो जाये अगर वो नाराज हो गई तो जो दोस्ती का रिश्ता है शायद वह भी न रहे और अनिकेत नूपुर को खोना नही चाहता।इसलिए वह कुछ नही कह रहा।उस के बाद  कुछ दिनों तक दोनो की आपस में कोई बात नही होती और एक शाम नूपुर अनिकेत को फोन कर कहती है की वो उसका वही इंतजार कर रही है जहाँ  उनकी पहली मुलाकात हुई थी आवाज से ऐसा लग रहा था जैसे नूपुर रो रही हो
अनिकेत घबरा जाता है और जल्दी से अथिति मैरिज
गार्डन पहुँच जाता है वो जैसे ही वहाँ पहुँचता है उसे नूपुर सामने ही खड़ी मिलती है उसी साड़ी में जो उसने तब पहनी हुई थी जब वो दोनो पहली बार मिले थे अनिकेत समझ जाता है के नूपुर सब जान गई है वैसे अब कुछ कहना जरूरी तो नही था पर फिर भी अनिकेत प्यार भरे अंदाज में आखिरकार आज नूपुर से दिल की बात कह ही देता है जिसे सुन नूपुर तो अपनी खुशी सम्हाल ही नही पाती दोनो एक दूसरे का हाथ थामते है और उसी समय जोरो से बारिश होने लगती है इस बार ये बारिश मौसम की वजह से कम इनकी इस मुलाकात की वजह से ज्यादा हो रही थी
ये बारिश थी प्यार की जिसमे नूपुर और अनिकेत भीगे
जा रहे थे नूपुर के पास छाता था वही छाता जो उसे अनिकेत ने दिया था और आज दोनो उस छाता के नीचे थे। नूपुर अनिकेत को भीगने से बचा रही थी पर अनिकेत आज भीगना चाहता था इस मौसम की बारिश में। प्यार की बारिश में । एहसास की बारिश में।








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