गर्मी के बाद जब बरसात का मौसम आता है तब दिल को बड़ी राहत सी महसूस होती है ठंडी-ठंडी बूंदे जब चेहरे पर पड़ती है तो उन बूंदो का ठंडा एहसास मन को सुकुन पहुँचाने वाला होता हैं। सच में ये बरसात बड़ी कमाल की होती है बिना किसी वजह के चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान ला देती है। और बच्चे जितना मजा लेते है इस मौसम का उतना तो शायद ही और कोई ले पाता हो। ये मौसम ही ऐसा है जो सभी के दिल को भाता है पर शायद नही। कुछ लोग ऐसे भी है जिन्हें बरसात ज्यादा अच्छी नही लगती है उन्हें तो ये
समस्यां लगती है ये कहानी ऐसी ही एक लड़की नैना की है जिसे बरसात समस्या लगती है। तो कहानी शुरू करते है।हाँ तो बात उन दिनों की है जब नैना की पढ़ाई पूरी हो चुकी थी और वो नौकरी की तलाश में थी नैना कई
जगह कोशिश कर चुकी थी पर कही भी बात ना बनी।
नैना ने अपनी नौकरी के विषय में विनोद अंकल जो की
उसके पापा के दोस्त है उन्हें भी बताया था। उन्होंने
नैना को फोन कर बताया की उनके ऑफिस में असिस्टेंट का एक पद खाली है वो चाहे तो उस पद हेतु आवेदन कर सकती है नैना आवेदन कर देती है। उसे दो दिन बाद इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है। दो दिन
हो जाते है नैना इंटरव्यू देने जाने के लिए तैयार हो रही होती है क्योंकि बरसात का समय है और कल बारिश भी हुई थी ये सोचते हुए नैना बारिश से बचने के लिए
अपने साथ छाता भी रख लेती है। नैना घर से निकल जाती है बस स्टॉप घर से थोड़ा दूर था इसलिए नैना को वहाँ तक पैदल चलकर जाना था वैसे नैना को पैदल चलना बुरा नही लगता है पर बरसात के समय पैदल चलना उसे बिल्कुल पसन्द नही है। दरसल नैना को बरसात का ये मौसम कुछ खास पसन्द नही है उसे तो ये समस्या ही लगती है बरसात के बाद कई जगहों
पर थोड़ी गन्दगी सी फैल जाती है सड़क अगर खराब हो तो उस पर चलना बड़ा मुश्किल हो जाता है बस इसीलिए नैना को भी बरसात के समय सड़क पर पैदल चलना पसंद नही है पर अभी तो उसे चलना ही पड़ेगा बस स्टॉप तक जो जाना है। नैना घर से निकलने के बाद जब थोड़ा आगे पहुँचती है तब उसे सड़क पर जगह- जगह पड़ा कचरा नजर आता है जोकि बारिश की वजह से बहकर सड़क पर आया था साथ ही सड़क पर कहीं-कहीं गड्ढे भी थे जिनमे बारिश का पानी भर गया था जिसकी वजह से वहाँ से निकलने में थोड़ी दिक्कत हो रही थी। नैना जैसे तैसे चिडचिड़ाते हुए बस स्टॉप पहुँच जाती है जहाँ कुछ देर इंतजार करने के बाद बस आ जाती है और नैना बस में बैठ चली जाती है। ऑफिस पहुचने पर नैना को पता
चलता है की उसके पहुँचने से पहले ही किसी और व्यक्ति का चयन हो चुका है। इसलिए अब उसका इंटरव्यू नही होगा यह सुन नैना थोड़ी उदास हो जाती है। और ऑफिस से बाहर आ जाती है बाहर धीमे- धीमे बारिश हो रही थी यह देख नैना तुरन्त बैग से अपना छाता निकालती है छाता लगाकर बस स्टॉप की ओर जाती है। नैना को बारिश में भीगने से डर लगता है वह आज तक कभी-भी बारिश में नही भीगी
उसे डर रहता है की कही कोई इंफेक्शन नही हो जाये या कही बारिश में भीगने से वो बीमार ना हो जाये और
ना जाने कितनी बाते नैना सोचती है जिसकी वजह से
उसने कभी बरसात का मजा ही नही लिया। पर क्या
नैना का कभी मन नही हुआ की वो भी कभी बारिश का
मजा ले। खैर अभी तो नैना का मन थोड़ा उदास है उदास मन से नैना धीरे- धीरे चलते हुए बस स्टॉप पहुँच जाती है और वहाँ लोहे की बनी बेंच पर जाकर बैठ जाती है और बस के आने का इंतजार करने लगती है बारिश की वजह से और भी कई लोग वहाँ आ जाते है। बादल की गड़गड़ाहट के साथ
तेज बरसात होने लगती है सड़क पर कुछ लोग बारिश से बचने के लिए यहाँ- वहाँ छिपते नजर आ रहे थे कुछ सड़क किनारे बनी दुकानों की छतो के नीचे आसरा ले रहे थे तो कुछ ऐसे भी थे जो खुशी-खुशी बारिश में भीग रहे थे कुछ स्कूल के बच्चे थे जोकि शायद स्कूल से छुट्टी के बाद घर जा रहे थे पर फिर रुककर बारिश में भीगने का मजा लेने लगे और
पानी से भरे गड्ढ़े में कूद-कूद कर खेलने भी लगे इससे उन्हें कौन से आनन्द की प्राप्ति हो रही थी ये सिर्फ वही जानते है कुछ कॉलेज के लड़के लड़कियां भी बड़े हस्ते मुस्कुराते हुए आराम से भीगते हुए जा रहे थे जैसे कि उन्हें भीगते हुए जाने में बड़ा मजा आ रहा हो
ऐसे और भी कई लोग थे जो पानी में भीगते हुए जा रहे थे उनके चेहरे की खुशी से ऐसा लग रहा था जैसे की उन्हें इस बरसात का इंतजार था नैना बड़े ही ध्यान से
ये सब देख रही थी नैना के बगल में ही वहाँ बेंच पर बैठा एक शक्स फोन पर किसी से बात कर रहा था वो बाते नैना को भी सुनाई दे रही थी। वह शक्स फोन पर किसी से कुछ सवाल कर रहा था सामने वाले व्यक्ति का उत्तर सुनने के बाद वह कहता है कि अगर आपको को कुछ अच्छा लगता है तो उसे मान लेने में कोई बुराई नही है मन को बांधकर रखने से सब सही रहे ये जरूरी तो नही इसलिए कभी - कभी मन की बातो को भी मान लेना चाहिए खुलकर जी लेना चाहिए क्या पता ये पल फिर दुबारा मिले न मिले। नैना भी उस शक्स की बातो को सुन रही होती है। उसे तो ऐसा लग रहा था जैसे की वह शक्स ये सारी बाते उसी से कह रहा हो
इतनी बात होती है और बस आ जाती है नैना बस में बैठती है और पूरे रास्ते उस शक्स की बातो को सोचते हुए जाती है नैना समझ जाती है कि वो भी कही न कही अपने मन की बातो को अनसुना कर रही है नैना को भी बारिश अच्छी
लगती है उसे भी बरसात में भीगना पसन्द है लेकिन फिर भी उसने खुद को ये समझा रखा है की उसे बरसात पसन्द ही नही है और वो भी क्यों क्योंकि उसने अपने दिमाग में बारिश से पैदा होने वाली समस्याओ की लंबी लिस्ट जो बना रखी है।
लेकिन अब नैना को समझ आ गया है की कभी- कभी अपने मन का भी कर लेना चाहिए। उदास नैना अब थोड़ा खुश हो जाती है और बस से उतरने के बाद वो अपना छाता बैग से नही निकालती बल्कि भीगते हुए घर तक चलकर जाती है वो भी बिना चिड़चिड़ाये जबकि सड़क थोड़ी खराब थी। पर नैना को अभी वहाँ से निकलना बिल्कुल बुरा नही लग रहा था। वो खुश थी इतना ही नही घर पहुचने के बाद भी अपने घर की छत पर नैना खूब उछल- उछल कर बरसात के पानी में भीगती है और पानी की ठंडी बूंदो को हाथो
में ले उसकी शीतलता को महसूस करती है। बरसात की ये बूंदे आज नैना के मन को भी खुशी दे रही थी।
नैना यह अच्छी तरह समझ गई थी के बदलते मौसम से थोड़ी दिक्कते तो आती है पर इसका मतलब ये नही के हम मौसम को पसन्द ही न करे अब नैना को भी बरसात के मौसम का इंतजार रहेगा उसमे झूमकर
नाचने के लिये।
और साथ ही हम सब को भी।

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