दोस्ती का रिश्ता बड़ा चटपटा सा होता है जिसमे रूठना मनाना झूठमूठ लड़ना परवाह करना सबकुछ शामिल है हे ना। आज सुबह उठी तब रोज की तरह मैने सबसे पहले अपने मोबाइल में मैसेज चैक किये मैं रोज मैसेजेस
देखती हूँ की कही कोई जरूरी मैसेज तो नही है। क्योंकि ज्यादातर ऐसा हो जाता है की मैं कॉल रिसीव ही नही कर पाती दिन में ऑफिस में रहती हूँ और बिजी भी तो मेरे घर वाले और फ़्रेंड्स सभी मुझे मैसेज ही कर देते है जब कुछ जरूरी बात हो तो। जैसे ही मैने मैसेज देखे तो देखा की मेरी फ़्रेंड्स के मैसेज है उन्होंने
मुझे विश किया था हैप्पी फ़्रेंडशिप डे। मुझे तो याद ही नही था कि आज फ़्रेंडशिप डे है। मैने भी झट से सबको मैसेज कर विश कर दिया।
आज मुझे अपने दोस्तो की बड़ी याद आई और वो दिन भी जब हम सब साथ हुआ करते थे। क्या दिन थे वो। आज के दिन तो हम सब मिलकर कहीं न कहीं घूमने जाया करते थे। और खुब मस्ती भी किया करते थे हमारे लिए तो हर दिन ही फ़्रेंड्स का होता था। हम हर बात पर ही पार्टी करते थे कभी बर्थडे पार्टी कभी नई स्कूटी ली उसकी पार्टी कुछ नही तो नई ड्रेस ली उसकी भी पार्टी। ये पार्टी कोई होटल में नही होती थी बल्कि कॉलेज की केंटीन में तो कभी वही कॉलेज के पास सड़क किनारे जो चौपाटी थी वहाँ। जहाँ सब कुछ मिलता था इंडियन, साउथ इंडियन, चाईनिज फूड और बड़ा स्वादिष्ट भी होता था। हम सब खूब जाया करते थे उस चौपाटी।
और फ़्रेंडशिप डे पर भी वहाँ हम जाते थे उस दिन तो रंग बिरंगे फ़्रेंडशिप बैंड से पूरी कलाई ही भर जाती थी। और आज देखो कलाई एकदम खाली है। कर भी क्या सकते है पढ़ाई पूरी हो जाने के बाद हम सब दूर हो गये किसी की शादी हो गई तो किसी की जॉब लग गई मैं भी यहाँ जबलपुर आ गई मेरी जॉब यहाँ लगी इसलिए मुझे यहाँ आना पड़ा।
वैसे मैं घर पर बोर ही हो रही हूँ सोच रही हूँ कुछ नही तो शोपिंग ही कर आओ। दिन भी कट जायेगा।
मैं घर से निकली रास्ते में मुझे एक शॉप नजर आई मैं शॉप के अंदर गई वहाँ बहुत ही सुन्दर-सुन्दर फ़्रेंडशिप बैंड नजर आये जिनमे से एक मुझे बहुत ही अच्छा लगा वैसे क्योंकि यहाँ आये मुझे अभी ज्यादा समय नही हुआ और ना कोई दोस्त है इसीलिए मुझे ये बैंड लेना तो नही था पर मैने फिर भी ले लिया। मैं शॉप से बाहर आई के तभी मुझे कॉल आया जोकि मेरे ऑफिस में मेरे साथ ही जॉब करने वाली रिचा का था। उसने मुझे ऑफिस के पास जो एक होटल है वहाँ बुलाया मैं वहाँ पहुँची देखा तो मेरे ऑफिस के सारे कलीग्स वहाँ
पहले से ही मौजूद थे रिचा ने मुझे बताया की हर साल यहाँ इस दिन सब मिलकर पार्टी करते है और फ़्रेंडशिप डे सेलिब्रेट करते है और जो भी ऑफिस में नया आता है उसका वेलकम भी किया जाता है इस फ़्रेंड्स ग्रुप में। रिचा ने मुझे फ़्रेंडशिप बैंड पहनाया और अपने इस फ़्रेंड्स ग्रुप का हिस्सा बना लिया मैंने भी अपने बैग से वही फ़्रेंडशिप बैंड निकाला जो मैने उस शॉप से लिया था। शायद ये रिचा के लिए ही था मुझे नये दोस्त मिल गये वैसे कॉलेज फ़्रेंड्स की बात अलग ही होती है पर हाँ ऑफिस फ़्रेंड्स की बात भी अलग ही होती है। कॉलेज फ़्रेंड हो या ऑफिस फ़्रेंड मुझे लगता है की हर एक के पास कोई एक फ़्रेंड तो होना ही चाहिए क्योंकि लाइफ में एक फ़्रेंड तो जरूरी होता है।
तो ऐसा था मेरा फ़्रेंडशिप डे।
जो बिना वजह जाने हर वक्त आपके साथ चलने को
तैयार होता है वो सिर्फ एक दोस्त होता है।

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