15 अगस्त



आज सुबह जब मैं टहलने के लिए घर से बाहर निकला देखा तो कॉलोनी के कुछ बच्चे स्कूल की यूनिफॉर्म पहने कुछ बच्चे कलर ड्रेस में हाथ में झंडा लिए अपनी स्कूल बस का इंतजार कर रहे थे। उनके मासूम चहरे की मासूम खिलती हँसी से ये साफ पता चल रहा था की वो कितने उत्साहित है। आज 15 अगस्त है।
15 अगस्त 1947 , ये वो दिन था जब भारत देश गुलामी की जंजीरो से पूरी तरह आजाद हो चुका था इस दिन हर एक देशवासी के चहरे पर आजादी की मुस्कान थी।
वो आजादी जिसे पाने के लिए ना जाने कितने देशभक्त वीरो ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। हर साल 15 अगस्त के
दिन हम अपने देश के आजाद होने की खुशी मनाते है
और साथ ही उन वीरो को याद करते है जिनके बलिदान की वजह से आज हम एक आजाद देश में रह रहे है। मुझे मालूम है की देश का हर एक व्यक्ति 15 अगस्त के बारे में बहुत अच्छे से जानता है इसलिए मुझे कुछ कहने या बताने की जरूरत नही है।
मुझे तो बस आज इन बच्चो को देख अपना बचपन याद आ गया और वो 15 अगस्त का दिन।
मैं 6-7 साल का था तब। 15 अगस्त का दिन मैं और मेरे दोस्त हम बड़े ही खुश। हम खुश इस बात से थे कि और बच्चो की तरह हम भी एक देशभक्ति गाने पर नाचने वाले है देशभक्ति गाने ये असल में क्या होते है इसका मतलब क्या होता है हमे नही पता बस हमे इतना ही समझ आ रहा था की
 हम भी और दूसरी क्लास के बच्चो की तरह एक गाने पर नाचने वाले है और इस बात पर हम खुश भी थे और साथ ही बहुत इतरा भी रहे थे। क्या करे बच्चे थे ना। ज्यादा पता कुछ होता नही है और जो थोड़ा बहुत पता होता है उसे हम बड़ा मानने लगते है। यही हमारे साथ भी हुआ।
हमारी नजर से 15 अगस्त का मतलब कुछ अलग था।  15 अगस्त को स्कूल में झंडा फहराया जाता है देशभक्ति गीत, कविता ,भाषण ,देशभक्ति गीतों पर डांस होता है और इन सब के बीच जब टीचर पूछे 15 अगस्त को क्या हुआ था तो सब बच्चे साथ में कहेंगे
15 अगस्त को भारत देश आजाद हुआ था हम बड़े ही ऊँचे स्वर में ये कहते जबकि हम इसका सही अर्थ जानते ही नही। और अपनी बात कहुँ तो मुझे तो यही इंतजार रहता की कब कार्यक्रम पूरा हो और मुझे वो स्वादिष्ठ लड्डू मिले जोकि हमेशा कार्यक्रम खत्म होने के बाद ही मिलते है उन लड्डुओं का स्वाद ही बड़ा अलग होता है। और उनके मिलने का इंतजार हम सब बच्चो को होता है।
पर अभी फिलहाल मैं और मेरे दोस्त हाथ में तिरंगा लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे अरे हम भी तो नाचने वाले थे ना। और हमारे ही पास एक और ग्रुप खड़ा था बच्चो का। वो भी अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। पर कुछ देर बाद ना जाने किस बात पर मेरे दोस्त और उस दूसरे ग्रुप के एक बच्चे के बीच झगड़ा हो गया वो दोनो आपस में भीड़ गये। सब लोग अब स्टेज की ओर देखने की वजह हमारी और ही देख रहे थे। तब एक स्कूल का बच्चा यही भाषण दे रहा था की हमारे देश में अनेकता में एकता है यहाँ सब प्रेम से भाई चारे के साथ रहते है यह हमारी विशेषता है इधर भाषण हो रहा था और उधर लड़ाई। ये सब देख हमारी टीचर जी उठकर हमारे पास आई और उन्होंने लड़ाई को खत्म कराया और बड़े ही प्यार से समझाया की हम भारतवासियो की पहचान हमारी एकता और आपसी प्रेम है हमे लड़ना नही है बल्कि एक साथ रहना है हम भविष्य है भारत का। हमे इसका गौरव बढ़ाना है। तब टीचर जी की सारी बाते हमे इतने अच्छे से समझ तो नही आ रही थी पर इतना जरूर समझ गये थे की लड़ना नही है दोस्त बनकर रहना है
टीचर जी ने कहा चलो गले मिलो फिर क्या था बच्चे गले मिले और दोस्त बन गये और फिर मिला लड्डू
अरे वहाँ मजा आ गया हमे तो आज पहले ही लड्डू मिल गया।
हम सब ने बड़े ही प्यार से आपस में मिलजुल कर लड्डू खाया और स्टेज पर नाचे भी और एक दूसरे के लिए तालिया भी बजाई सच में बहुत मजा आया। मैं तो पूरे दिन ही हाथ में तिरंगा लेकर घूमता रहा। और सबको दिखाता भी रहा की देखो मेरा वाला तिरंगा कितना अच्छा है।
आज मैं जान गया हूँ की तिरंगा मेरा या तेरा नही है ये हमारा है। और टीचर जी की भी सारी बातो का मतलब भी मैं आज अच्छी तरह जान गया हूँ। और साथ ही आजादी और बलिदान जैसे शब्दो का सही अर्थ व महत्व भी। 
मुझे गर्व है की मैंने ऐसी भूमि पर जन्म लिया जोकि हमारे वीरो की भी जन्मभूमि है। मुझे गर्व है अपने भारतीय होने पर ।
                   जय हिन्द जय भारत
धन्य है वो वीर जिनके बलिदान से सिंचित ये भारत देश है, धन्य है वो वीर जिनके आगे झुकते आज करोड़ो शिश है धन्य है वो वीर जिनके कारण आज आजाद ये भारत देश है।
धन्य है वो वीर जिन पर गर्वित आज ये पूरा देश ।
ऐसे भारत देश और ऐसे महान वीरो को मेरा शत शत नमन।

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