रात को तो मुझे जल्दी नींद ही नही आई इस खुशी में की आज ईद है और मैं आज अप्पी और आसिफ भाई से पहले ही उठ गई। उठती भी कैसे नही मैंने रात को अलार्म जो लगा दिया था।मैंने पहले ही सोच लिया था की आज अप्पी और आसिफ भाई से पहले मैं ही अम्मी अब्बू को ईद की मुबारक बाद दूंगी। मैंने अम्मी अब्बू को ईद की मुबारक बाद दी और उन्होंने भी मुझे प्यार से गले लगाकर कहा ईद मुबारक हो जरीन। मैं सुबह से ही तैयार होकर घूम रही हूँ कॉलोनी के सारे बच्चे हम सब एक दूसरे को ईद मुबारक ,ईद मुबारक कह कर बड़े ही खुश हो रहे है। सच में बड़ा मजा आता है ईद पर। ईद की खुशी सबसे ज्यादा हमे ही तो होती है नये- नये कपड़े लजीज पकवान और जो हम बच्चो को सबसे ज्यादा अच्छा लगता है वो है ईदी मिलना। मुझे तो ईदी मिलने का बड़ा इंतजार रहता। अम्मी अब्बू हम तीनो को साथ में ईदी देते है अप्पी आसिफ भाई और मुझे। अप्पी को मुझसे ज्यादा ईदी मिली। मामू , खाला, शमीम अप्पी , इन सब से भी अप्पी को ईदी मिली। और मैं तो बाहर खेलने गई थी इसलिए मुझे उनसे ईदी नही मिल पाई। बस मैं इस बात का गम मनाने बैठ गई। पर पता है बाद में क्या हुआ मुझे ईदी मैं बहुत अच्छा तोफा मिला। अप्पी ने भी मुझे ईदी दी और ईदी मैं उन्होंने मुझे साइकिल दी जोकि मुझे चाहिये ही थी। मैं तो अपनी ईदी का तोफा देख खुशी से उछल पड़ी।अभी थोड़ी देर पहले भले ही मुझे लग रहा था की मुझे कम ईदी मिली पर अब लग रहा है की मेरी ईदी ही सबसे बेस्ट ईदी है। मैंने सबको बताया देखो अप्पी ने मुझे ईदी मैं क्या दिया है। मेरी ईद तो बड़ी ही अच्छी रही। इतनी अच्छी ईदी जो मिली। मेरी प्यारी अप्पी ने दी। मैंने भी अप्पी को गले लग कर ईद मुबारक ईद मुबारक कहा। अप्पी ने भी जोर से गले लगकर कहा ईद मुबारक हो जरीन।
मेरे सभी दोस्तो को मेरी ओर से ईद मुबारक हो।

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