आज मैं और अंकित दोनो ही बहुत खुश है हम दोनो ने
मिलकर आज माँ के लिए कुछ खास सोचा है। आज मदर्स डे जो है। वैसे ये जरूरी नही के सिर्फ इसी दिन ही हम अपनी माँ के लिए कुछ खास करे। हमें अपनी
माँ को खुशी देने और उनके लिए कुछ करने के लिए
किसी खास दिन के इंतजार की जरूरत नही। हम जब चाहे तब ही उनके लिए कुछ न कुछ कर सकते है।
क्योंकि माँ तो हमे प्यार देने के लिए किसी दिन का
इंतजार नही करती वह तो रोज ही हम पर अपना
प्यार लुटाती है हमारे लिए कुछ न कुछ करती रहती
है। सच में माँ बड़ी ही प्यारी होती है। जिस तरह माँ
हर पल हमारी ही परवाह करती है उसी तरह हमे भी कोशिश करनी चाहिए के हम भी उनका ख्याल रख
सके। उन्हें खुशी दे सके उनके कुछ सपनो को पूरा कर
सके।
आज ऐसी ही कोशिश मैं और अंकित भी करने जा रहे
है हम माँ को ऐसी जगह ले जा रहे है जहाँ जाकर
उन्हें खुशी जरूर मिलेगी। और शायद उनका सपना
भी कुछ हद तक पूरा हो सके ऐसी मुझे उम्मीद है।
माँ पूरे रास्ते यही पूछती रही की कहा जा रहे है पर
मैंने और मेरे भाई अंकित ने माँ को कुछ भी नही बताया हम बस मुस्कुराते रहे। और आधे घंटे में ही
हम वहाँ पहुच गये। हम गाड़ी से उतरे थोड़े आगे बड़े
और माँ ने दीवार पर लगे बोर्ड पर पढ़ लिया। संगीत
शिक्षा। यही तो लाये है हम माँ को। हमने माँ का हाथ
थामा और उन्हें अपने साथ अंदर ले गये। वहाँ की
मैडम से हम पहले ही मिल चुके थे इसलिए हम सीधे
ऑफिस में चले गये माँ को मैडम से मिलवाया। और
फिर उनका नाम दर्ज कराया। आज से माँ भी यहाँ
संगीत सीखने आएंगी। माँ को संगीत पसंद है मैंने उन्हें
गाते हुए देखा है लेकिन घर परिवार की जिम्मेदारी के
चलते वो कभी अपनी कला को निखार ना सकी।
आज उनमे पहले जैसा उत्साह तो नही है पर धीरे-धीरे उनमें फिर से वही उत्साह आ जायेगा। उन्हें अपनी
कला को प्रदर्शित करने का मौका मिलेगा। क्योंकि
यहाँ कलाकारों का आत्मविशवास बढ़ाने के लिए
स्टेज प्रोग्राम भी कराए जाते है। माँ भले ही बड़ी
गायिका ना बन सके पर यहाँ सबके सामने गाना गाने
से उन्हें खुशी जरूर मिलेगी। और उनकी खुशी से हमे
खुशी मिलेगी।
संगीत शिक्षा केंद्र से निकलने के बाद हम माँ को
उनकी फ़्रेंड से मिलाने ले गये वहाँ हम काफी देर रुके।
उसके बाद हम और भी कई जगह गये जहाँ जाकर माँ को अच्छा लगता है। दिन भर घूमने के बाद हम शाम
को घर पहुचे। मैने और अंकित ने माँ के लिए खाना बनाया। जिसे खाने के बाद माँ ने हमारी खूब तारीफ की। कितना अच्छा है ना सब कुछ पर आज से कुछ साल पहले ऐसा नही था।
मैं और अंकित हम दोनो जब छोटे थे सब कुछ ठीक
था पापा की अच्छी जॉब थी माँ हाउस वाइफ थी सबका
खूब ख्याल रखती सब अच्छा चल रहा था पर एक
दुर्घटना ने सब बदल दिया। पापा का एक्सीडेंट हो
गया था उनकी हालत काफी खराब थी ऐसी स्थिति में
सारी जिम्मेदारिया माँ के कन्धों पर आ गई। माँ स्कूल
में पढाने लगी और शाम को बच्चो की ट्यूशन क्लास
लेने लगी। पापा का ईलाज हमारे स्कूल और घर का
खर्च सब माँ ही सम्हाल रही थी माँ ने हर कोशिश की
के पापा ठीक हो सके पर वो उन्हें बचा ना सकी और
पापा हम सब को छोड़ कर चले गये। उस वक्त माँ
अंदर से पूरी तरह टूट चुकी थी पर उन्होने हमे
कभी भी टूटने नही दिया।जिंदगी में कई मुश्किलो के
बावजूद उन्होंने हमारी परवरिश में कोई कमी ना आने
दी। माँ ने हमे कभी अकेले न होने दिया वो हमेशा
हमारे साथ रही। पर एक वक्त ऐसा आया जब हमने
उन्हें अकेला छोड़ दिया। अपने-अपने स्वार्थ के कारण
मैं और अंकित उन्हें छोड़कर चले गये। मुझे अपना
करियर बनाना था और अंकित को शहर से बाहर जाकर पढ़ाई करनी थी। हम चले गये माँ अकेली रह
गई। तीन साल बाद हम वापस आये वो भी तब जब वो बीमार हो गयी थी । माँ की अचानक तबियत
खराब हो गई थी मुझे और अंकित को जब पता चला
हम माँ के पास आ गये। मैं तो घबरा ही गई थी क्योंकि
मेरे ऑफिस में ही काम करने वाली निर्मला आंटी को
कुछ समय पहले ही दिल का दोहरा पड़ा था।वो भी
अकेले ही रहती थी उनके बच्चे विदेश में थे। और
अकेलेपन के चलते उनकी ये हालत हुई थी। यही
सोचकर मैं घबरा गई थी की माँ भी अकेले रहती है
कही उन्हें तो कुछ नही भगवान की कृपा थी के माँ
ठीक थी बस वो पहले से थोड़ी कमजोर हो गई थी
और इसीलिए उन्हें बुखार आ गया था और वो बीमार
हो गयी थी। मुझे और अंकित को देखते ही मानो वो ठीक ही हो गई थी। मैने तय कर लिया था कि अब मैं माँ को छोड़ कर कही नही जाउंगी। उन्हें खो देने के
डर ने हमे उनके पास ला दिया। और अपनी गलती
का एहसास दिला दिया। अब मैं और अंकित यही माँ
के पास है यही रहकर जॉब कर रहे है।
जब माँ बिना स्वार्थ के अपना पूरा जीवन हमे खुशियां
देने में लगा देती है तो क्या हम उनकी खुशी के लिए
उनके साथ नही रह सकते। ना जाने उनके कितने
सपने थे जो उन्होंने हमारे लिए छोड़ दिये। उन्हें पूरा नही किया सिर्फ हमारे लिए ताकि हमारी परवरिश अच्छे से हो सके और आज
हम उनके लिए कुछ नही छोड़ सकते। इस तरह की
ना जाने कितनी बाते मेरे दिल में चल रही थी
बस तब से मैं और अंकित माँ के साथ है उनका ख्याल
रखते है और उन्हें तन्हा नही रहने देते। हर त्यौहार
साथ में मनाते है। खुश है और आज मदर्स डे मना रहे
है। और माँ के चेहरे पर आई खुशी को निहार रहे है।
उनसे कह रहे है हैप्पी मदर्स डे माँ।

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