जून का महिना सूरज के तीखे तेवर गर्मी इतनी के घर से बाहर निकलने का ख्याल भी डरा रहा है। और ऐसे में अगर बाहर जाना पड़े तो मन में गुस्सा तो आयेगा ही
पर क्या करे। जब घर में शादी हो तो काम भी कई होते है और घर से बाहर भी जाना पड़ता है फिर चाहे
तापमान कितना भी हो। ऐसे में डर से नही पूरी हिम्मत
के साथ कड़कती धूप में घर से बाहर निकलना पड़ता
है और सूरज का सामना भी करना पड़ता है।
आज ऐसी ही हिम्मत अनिकेत ने भी की। वह इस धूप में अपनी गाड़ी से मार्केट जा रहा है अनिकेत
के बड़े भाई अमित की शादी है उन्ही की वजह से
अनिकेत को इस चिलचिलाती धूप में मार्केट जाना पड़
रहा है। वरना अनिकेत तो धूप में निकले ही ना। उसे
डर रहता है की कही वह इस धूप से काला ना पड़
जाये। अनिकेत बहुत ही गोरा है उसे अपने गोरे होने पर बडा घमंड भी है।वह अपनी चचेरी बहन को इसी बात पर तो चिडाता है की वह उससे ज्यादा गोरा है।
दोपहर हो चुकी थी अनिकेत मार्केट जाने के लिए निकल गया था। अमित ने पहले ही शेरवानी पसन्द
कर बुक कर दी थी जिसे आज लेकर आना था उसे ही लेने अनिकेत मार्केट की उस शॉप पर गया है जहाँ
अमित ने शेरवानी बुक की है। धूप में जाते ही अनिकेत को ऐसा महसूस होता है जैसे वह तवे पर रखी रोटी की
तरह सिक रहा हो। वह बस यही प्रार्थना कर रहा होता है कि जल्दी से वह मार्केट पहुँच जाये। गर्म हवाओ की लपटे अनिकेत को छुकर गुजर रही होती है
जिस्से अनिकेत को सूरज की तपिश का और अधिक
अहसास हो रहा होता है। धूप और गर्मी से परेशान होते -होते
आखिर में अनिकेत मार्केट की शॉप पर पहुँच ही जाता है। जहाँ जाकर उसे थोड़ी राहत मिलती है। लेकिन उसका चेहरा तब थोड़ा उतर जाता है जब उसे पता
चलता है कि अभी कपड़े पूरी तरह तैयार नही हुए है
शॉप वाले भईया बताते है की उसे थोड़ी देर इंतजार करना पड़ेगा। अनिकेत मुँह लटकाकर दरवाजे के पास रखी कुर्सी पर बैठ जाता है।
और शॉप में बैठे हुए वह बाहर की ओर देखने लगता है। शॉप का दरवाजा काँच का बना होता है इसलिए अनिकेत को बाहर का नजारा साफ नजर आ रहा होता है। बैठे-बैठे उसके दिमाग में अपने भाई की शादी के ख्याल चल रहे होते है। कुछ समय बाद जब वह
गौर से बाहर देखता है तो दिखाई देता है के धूप गायब सी हो गई है आसमान में थोड़े बादल भी छा गये है।काली घटाये भी नजर आ रही है।
मौसम सुहावना सा हो गया है बाहर का सुहावना सा मौसम देखकर
परेशान अनिकेत के मन को कुछ सुकुन सा मिलता है।
वह अभी भी बाहर की ओर ही देख रहा होता है और
इतने में ही कुछ ऐसा हो जाता है जिसकी वजह से
अभी- अभी मिला सुकुन कही गायब हो जाता है।
होता दरसल ऐसा है कि अनिकेत जिस शॉप में बैठा
होता है उस शॉप के सामने भी एक शॉप होती है। और
जब वह बाहर देख रहा होता है तब उसे नजर आती है
एक लड़की। जो सामने वाली शॉप के बाहर खड़ी थी।जी हाँ एक लड़की जोकी सफेद
आसमानी दुपट्टा ओढे हुए होती है उसे देख ऐसा लगता है जैसे आसमान को दुपट्टा बनाये उसने ओढ़ लिया हो
उसकी आँखो में लगा गहरा काजल ऐसा लग रह था
जैसे आसमान में ये काली घटाये इसी के काजल से ही
छाई हुई है। उसके कानो में सुनहरे रंग की बालिया उसके सिर हिलाकर बात करने से ऐसे हिल रही थी
जैसे हवा के झोको से लेहरा रही हो। उसे देख कर तो
अनिकेत का दिल जैसा था वैसा थमा सा रह गया।
वो लड़की मुस्कुराते हुई अपनी साथ वाली लड़की से
कह रही थी जल्दी चलो बारिश की बूंदे आ रही है।
बाहर हल्की सी बारिश की बूंदे आना शुरू हो गई थी।
कुछ बूंदे उस लड़की के चेहरे पर भी आ गिरी थी जिससे उस लड़की को कैसा लगा पता नही पर अनिकेत को जरूर ये सब देख अच्छा लग रहा था।
अनिकेत बस उधर देखे जा रहा था तभी शॉप पर काम करने वाले एक भईया आते है और अनिकेत को
एक बेग थमाते हुए कहते है ये लीजिये आपका सामान।बेग लेते हुए जब वह दुबारा बाहर देखता है
तो उसे सामने वाली शॉप पर कोई नजर नही आता।
अनिकेत मन में कुछ सोचता है और फिर वो अपने घर के लिए निकल जाता है। अनिकेत घर तो आ जाता है पर उसे बार-बार अभी भी उस लड़की का ख्याल आ रहा होता है।खैर बाद में वो शादी के कामो
में व्यस्त हो जाता है। और शाम को उसका सारा ध्यान अपने भाई को तैयार कराने में और खुद तैयार होने में रहता है मतलब की वह बार-बार देख रहा होता है कि
भईया कैसे लग रहे है कपड़े उन पर जच रहे है की नही साफा ठीक से पहना है की नही। सहज महसूस
हो रहा है या नही। अपने भईया का ख्याल अनिकेत ऐसे रख रहा था मानो वही बडा भाई हो। भाई के तैयार
हो जाने के बाद बारी आती है अनिकेत की ।
बड़े भाई की शादी की खुशी ही कुछ और होती है अनिकेत तो ऐसे तैयार हो रहा था जैसे की आज तो भईया की सारी सालियो के उसे देखकर होश ही उड़
जाएंगे। और वो उसके इर्द-गिर्द घूमती नजर आएंगी।
तैयार होते वक्त कुछ ऐसे ख्याल ही तो अनिकेत के
दिमाग में पक रहे थे आईने में बार-बार खुद को निहारने और इस बात पर यकीन हो जाने की वह अच्छा लग रहा है के बाद ही अनिकेत अपने कमरे से बाहर आता है। अनिकेत को पूरा यकीन है की आज तो उसे देख कर कई लड़कियों के दिलो की धड़कने बढ़ ही जायेगी।
अनिकेत के अलावा बाकी सारे बाराती भी तैयार हो चुके होते है साथ ही बारात के निकलने का समय भी हो जाता है। कुछ ही देर में बारात अतिथि मैरिज गार्डन पहुँच जाती है।जहाँ बाराती जमकर नाचते है
अनिकेत तो खूब ही नाचा। नाच-नाच कर पसीने से तर-बतर हो गया था। बारात स्वागत द्वार पर पहुचती
है बारातियो का स्वागत कर उन्हें अंदर लाया जाता है।वर माला होती है और सब नये जोड़े के साथ फोटो
खीचा रहे होते है अनिकेत भी उस खूबसूरत स्टेज पर
अपने भाई के बगल में ही खड़ा था। और तब अनिकेत की नजर सामने कुर्सी पर बैठी हुई लड़की पर पड़ती है। जो अनिकेत भाई की सालियो के होश उड़ाने वाला
था खुद उसके होश उड़े दिखाई दे रहे थे। ब्लैक रेड साड़ी पहने हुए आँखो में गहरा काजल लगाये मुस्कुराते हुए अपने चेहरे पर आगे आ रहे बालो को अपनी उंगली में फसाकर कान के पीछे ले जाते हुए जो लड़की सामने नजर आ रही थी ये वही थी जो अनिकेत को
शॉप पर दिखी थी। अनिकेत को तो यकीन ही नही हो रहा था की वह उसके सामने है। अनिकेत उसे देखे जा रहा था और पलभर में वह उसकी आँखो से ओझल हो जाती है। अनिकेत यहाँ-वहाँ उसे ढूंढने लगता है वह कुछ बेचैन सा हो जाता है इतने सारे लोगों के बीच उसकी निगाहे बस उस लड़की को ही तलाश रही थी
उसकी तलाश बाहर स्वागत द्वार पर जाकर खत्म होती है जहा वो खड़ी होती है अकेली।
अनिकेत को उसके मिल जाने की खुशी भी होती है
और साथ ही फिक्र भी क्योकी इतनी रात को वो वँहा
अकेली खड़ी थी। अनिकेत खुद को रोक नही पाता है
और उसके पास जाकर पूछ ही लेता है - सुनिये
लड़की अनिकेत की ओर पलट कर देखती है
अनिकेत चेहरे पर एक सभ्य लड़के वाले भाव के साथ धीमे स्वरों में कहता है मुझे पूछने का कोई हक तो नही है पर माफ
कीजिये आप यहाँ अकेले क्यों खड़ी है। वो क्या है के
यह बाहर कोई भी नही है आप अकेली खडी दिखाई दी तो मैने सिर्फ इसलिए पूछ लिया।
लड़की ने उत्तर देते हुए कहा मेरे भाई मुझे लेने आने वाले है मैं उनका इंतजार कर रही हूँ।
अनिकेत ने पूछा आपको बुरा तो नही लगा मैने इस तरह आप से पूछ लिया। प्लीज़ आप गलत मत समझियेगा
लड़की ने कहा- नही मैं कुछ गलत नही समझ रही
वैसे आप दुल्हे के भाई है ना
अनिकेत आश्चर्य से उसकी ओर देखते हुए कहता है हाँ। अनिकेत की आँखो में सवाल था पर उसने पूछा
नही।
दोनो चुपचाप खड़े थे और बादल मुस्कुरा दिया। अरे भाई शाम को जो हल्की सी बूंदे पानी की आई थी अब
वो तेज होकर दोबारा आ रही थी। यानी बारिश होने लगी थी। वैसे होनी ही थी शाम से ही मौसम ऐसा ही था। कोई ये ना सोचे के इन दोनो की मुलाकात होने पर बादल पानी बरसा रहा है ये तो पूरी तरह मौसम की वजह से ही है। अनिकेत जल्दी से अंदर जाता है और कुछ ही समय में वापस आ जाता है आते वक्त उसके हाथ में छाता होता है।
लड़की को भी उसके भाई लेने आ जाते है। और वो
चली जाती है जाते वक्त उसके हाथ में होता है छाता।
ऐसी थी उनकी ये पहली मुलाकात।
पर कहानी अभी बाकी है आगे क्या होता है ये आप जानेंगे अगली पोस्ट में ।
तो जरूर पढ़े कहानी का अगला भाग।

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