हर रोज की तरह आज भी मैं बाहर घर के बागीचे में
बैठकर अखबार पढ़ रहा था। खबरें आज की भी वैसी
ही थी जैसी रोज की होती हैं। कुछ खास नया नही था
पड़ोस का लड़का राहुल रोज सुबह टहलने जाता है।
यहाँ से निकलते हुए वह मुझे गूड मोर्निंग शर्मा अंकल
जरूर कहता है। मैं भी कह देता हूँ गूड मोर्निंग बेटा।
मैं अखबार पढ़कर रखु उसके पहले राधा चाय लाकर
रख देती हैं। हम दोनो साथ बैठकर चाय पीते है
राधा हमेशा से ही मेरे साथ ही चाय पीती है। उसने
आज तक कभी अकेले चाय नही पी।
आज भी हम दोनो साथ बैठकर चाय पी रहे थे। और
यहाँ-वहाँ की बाते कर रहे थे। तभी एक युवती की आवाज आती है वह चीकू, चीकू बोलकर आवाज
लगाये जा रही थी। शायद उसे चीकू लेना होगा इसलिये वह चीकू वाले भईया को रोकने के लिए इस तरह से
आवाज लगा रही थी। मैं और राधा उसकी ओर देख
रहे थे। उसने हम से भी पूछा आपने चीकू को यहाँ से
जाते देखा है। हमने कह दिया नही। हमे तो समझ
ही नही आ रहा था की वह किसके बारे में पूछ रही है।
तभी एक बच्चा दौड़ता हुआ आता है और उस युवती
से लिपट जाता है। वह उसे डाटते हुए कहती है कहाँ
चले गये थे तुम चीकू।
चीकू उस बच्चे का नाम चीकू था। कैसे-कैसे नाम रखने
लगे है लोग चीकू। शायद अब किसी का नाम अंगूर भी सुनने को मिले। खैर वह बच्चा दिखने में बड़ा
प्यारा था। घुंघराले बाल , हल्की भूरी सी आँखे।
चेहरा मासूम था पर उसकी आँखो में शैतानी अलग ही
नजर आ रही थी। वह युवती जिस तरह उस बच्चे को
डांट रही थी उससे साफ पता चल रहा था की वह
उसकी माँ है। वो उसे डांटते हुए अपने साथ ले जाती
है। मैं और राधा उन दोनो को देखे जा रहे थे। तभी
राहुल वॉक से वापस लौटते हुए नजर आया उसी से
पता चला की ये नये पड़ोसी है।
अगली सुबह वह बच्चा चीकू हमारे घर के बागीचे में
आ जाता है उसे बागीचे में लगे फूल अच्छे लग रहे
होते है उनमें से एक फूल वह राधा से मांगने लगता है।
राधा मना नही कर पाती है। लेकिन वह उसके सामने
शर्त रखती है कि चीकू उसके पास आकर बैठे उससे
दोस्ती करे तोहि वह उसे फूल देगी। चीकू राधा की
बात मान लेता है। और उसके पास आकर बैठ जाता
है। राधा और चीकू दोनो की दोस्ती हो जाती है। राधा
रोज कुछ न कुछ चीकू के लिए बनाती और बड़े प्यार
से उसे खिलाती। चीकू मुझे भी अच्छा लगने लगा था।
चीकू अपने दोस्तो को भी साथ लेकर आता था।
बच्चो के आने से बगीचे में रोनक सी आ गई थी। अब
राधा के साथ मैं भी चीकू के आने का इंतजार करता
बस राधा पर जाहिर नही होने देता।
चीकू रोज आता और राधा के साथ खूब खेलता मस्ती
करता। अब तो मैं भी धीरे-धीरे उनके खेल में शामिल
हो गया था। चीकू की वजह से मैं और राधा जाने
कितने दिनों बाद खुलकर हँसे थे। चीकू ने अपनी
शरारतो और मस्ती से हमारे मन की उन कलियों को
फिर से खिला दिया था जोकि कई दिनों पहले मुरझा
चुकी थी।
राधा की मुलाकात चीकू की माँ निधि से भी होती रहती
है। निधि से राधा को पता चला की चीकू के पापा नही
है। कुछ महीनों पहले ही एक दुर्घटना में निधि और चीकू ने उन्हें खो दिया। निधि और उसके पति की
लव मैरिज थी घर वालो ने उन्हें स्वीकार नही किया था।
वे इतने नाराज थे कि उन्होंने निधि का चेहरा तक नही
देखा था। निधि के पति की जॉब दूसरे शहर में ही थी
इसलिये वो वही रहने चले गये थे। और अब
निधि वापस इस शहर में आई है। चीकू के पिता का
परिवार यही रहता है। पर अभी तक निधि उनसे
मिलने नही गई। इतनी बड़ी बात वह उन्हें कैसे बताएगी। और सब जान कर उनकी हालत क्या होगी
यही सब सोच कर वह अभी तक उनके पास नही गई।
निधि की सारी बात सुनाने के बाद राधा गंभीर सोच
में पड़ गई थी। मुझे पता था के उसके दिमाग में कौन
सी बात चल रही है पर मैंने कुछ नही कहाँ।
राधा को सिद्धार्थ की याद आ गई थी शायद उसका
मन सिद्धार्थ से मिलने का भी कर रहा हो। पर वो कहाँ
है कैसा है हमे नही पता था। पाँच साल हो गये थे।
सिद्धार्थ को घर से गये हुए। ना हमे उसकी कोई खबर
थी ना उसे हमारी। राधा तो रोज ही अपने बेटे को याद
करती है पर मेरे सामने कुछ नही कहती।
उस दिन गुस्से में मैंने उसे घर से जाने को कह दिया
था। सारे रिश्ते तोड़ दिये थे पर क्या उसे हमसे मिलने
की हमे मनाने की कोशिश नही करनी चाहिए थी।
मैंने गुस्से में घर से निकलने को क्या कह दिया वह घर छोड़कर ही चला गया। एक बार भी नही सोचा के
के उसके चले जाने से हमें कितनी तकलीफ होगी।
राधा ही नही मुझे भी उसकी बहुत याद आती है।
मेरा मन भी उससे मिलने को तड़पता है पर शायद वो
हमे भूल गया।
आज जब भी चीकू को देखता हूँ ऐसा लगता है जैसे
सिद्धार्थ वापस से छोटा होकर मेरे पास आ गया हो।राधा भी इसीलिए तो चीकू को इतना प्यार करती है।
क्योंकि चीकू कुछ-कुछ वैसा ही लगता है जैसा सिद्धार्थ
बचपन में लगता था। घुंघराले बाल, हल्की भूरी सी
आँखे, मासूम सा चेहरा। सिद्धार्थ की झलक नजर
आती है उसमे। चीकू कुछ वक्त के लिए ही सही चाहे
फूल तोड़ने आये या राधा के पास खेलने आये उसके
आने से हमे खुशी मिलती है। आज काफी देर से मैं
और राधा बागीचे में बैठे हुए थे पर
आज सुबह से ही चीकू नजर नही आया और बच्चो
के साथ खेलता हुआ भी नही दिखाई दिया। नही तो
रोज सुबह से ही यहाँ-वहाँ दौड़ता मस्ती करता नजर
आता है वह बीमार नही था बस आज उसका मन
खेलने को नही कर रहा था ऐसा उसके दोस्तो ने
बताया। हम दोनो उठकर घर के अंदर जा ही रहे थे
कि तभी चीकू आ गया उसे देख हमारा चेहरा खिल
उठा। चीकू ने आकर राधा का हाथ पकड़ा और हमसे
उसके घर चलने की जिद करने लगा। हमने उससे
बहाने भी बनाये पर वह नही माना। और हमे लेही
गया। हम उसके घर पँहुचे देखा निधि कुछ काम कर
रही थी शायद घर की सफाई कर रही थी। निधि जैसे
ही पलटी हमने देखा उसकी आँखो में आँसू थे। वह
एकदम खामोश थी वह जैसे ही हमारी ओर थोड़ा आगे बड़ी मैं और राधा भी खामोश हो गये। कहने को
शायद अब कुछ ना था। जो देखा उसके बाद मैं और राधा तो पूरी तरह टूट चुके थे। यकीन ही नही हो रहा
था कि हमारा बेटा हमसे इतनी दूर चला गया की जँहा से कभी वापस नही आ सकता।
निधि घर की सफाई नही कर रही थी दरसल वह तो
सिद्धार्थ की तस्वीर को साफ कर रही थी उस तस्वीर
पर माला चढ़ाते हुए उसकी आँखे भर आई थी। और
जब वह पलटकर आगे बढ़ी। तब हमारी नजर उस
तस्वीर पर पडी जिसे देख कुछ कहने या पूछने की
हालत में हम नही थे जो भी कहाँ निधि ने कहा हम तो बस सुने जा रहे थे।
निधि की कभी हिम्मत ना हो सकी के वह हमे आकर
बता सके की सिद्धार्थ हमसे बहुत दूर जा चुका है।
वो सिद्धार्थ के बारे में बताना चाहती थी और चीकू को
हमसे मिलाना भी चाहती थी इसलिए वह पड़ोसी
बनकर यहां रहने आई। चीकू को रोज राधा से मिलने
निधि ही भेजा करती थी। ताकि चीकू हमारे करीब आ
सके। हमारे साथ घुलमिल सके। निधि को डर था कि
हम चीकू को अपना मानेंगे या नही। इसीलिए निधि
सीधे हमारे पास नही आई। बल्कि एक पड़ोसी बनकर
यहाँ रहने आई।
निधि की सारी बात सुनने के बाद क्या कहूँ कुछ समझ
ही नही आ रहा था। अपने बेटे को खो देने का गम
मुझे अंदर ही अंदर तोड़े जा रहा था। जब चीकू की ओर मैंने देखा लगा सिद्धार्थ सामने आ गया उसे सीने
से लगा आज एक पिता खूब रोया इतना रोया की जैसे
आज उसकी जिंदगी ही खत्म हो गई हो। आज एक पिता की जिंदगी वाकई खत्म हो चुकी थी जो जिंदा थे वो चीकू के दादाजी थे।
कुछ महीने बीत चुके थे हमारी जिंदगी कुछ बदल चुकी थी। हमारी बेरंग जिंदगी में चीकू ही अपनी मुस्कान से
रंग भरे जा रहा था अब ये मेरा नही चीकू का घर था
जहाँ उसके दादाजी, उसकी दादी, उसकी माँ और
खुद चीकू रहता था। हम सब साथ थे।
और साथ थी सिद्धार्थ की यादे।

Very sweet n heart touching story....
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