कभी - कभी जाने क्यों कुछ अजीब लगता है
कभी सब सही तो , कभी गलत लगता है।
कभी सब अपना तो, कभी पराया लगता है।
कभी अच्छा तो , कभी सब बेकार लगता है।
कभी कोई पास तो , कभी दूर लगता है।
कभी जाना कोई तो , कोई अनजाना सा लगता है।
कभी सब सच तो , कभी सब झूठ लगता है।
कभी मुश्किल कुछ तो , कुछ आसान लगता है।
कभी कोई खुश तो , कोई कभी नाराज़ सा लगता है।
कभी मन उत्साहित तो , कभी हताश लगता है।
कभी दिन नया तो , कभी वही पुराना सा लगता है।
कभी कुछ भागता हुआ तो , कभी ठहरा सा लगता है।
कभी जैसे कैद तो , कभी आजाद सा लगता है।
कभी हर पल ख़ुशनुमा तो , कभी उदास लगता है।
कभी - कभी जाने क्यों कुछ अजीब लगता है।

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