गाड़ी न छूट जाए इसलिए मैंने टैक्सी वाले भईया को गाड़ी जरा तेज चलाने को कहा हम टाइम पर स्टेशन पहुंच गए थे प्लेटफॉर्म की तरफ जाते हुए मेरे कदम जितने तेज थे मनस्वी के उतने ही धीमे। प्लेटफॉर्म नम्बर 3 पर ट्रेन आने वाली थी
इसलिए हम वही बैंच पर जा बैठे और ट्रेन का इंतजार करने लगे। कुछ देर में पता चला कि यमुना एक्सप्रेस 20 मिनिट की देरी से आएगी। मैं बैंच से पीछे टिक्कर बैठ गया मनस्वी मुझे एक टक देखे जा रही थी मैं जानता था पर मैंने मनस्वी की नजर से नजर नही मिलाई। क्योंकि अगर नजर मिलाता तो भावुक हो जाता और शायद खुद को सम्हाल न पाता। नाराज़ हो नही तो मनस्वी ने पूछा तो मैंने उत्तर देते हुए कहा। मैं और मनस्वी अभी कितने पास बैठे हुए थे पर फिर भी हमारे बीच दूरी थी वो दूरी जो धीरे - धीरे हमारे बीच आ गई और हम समझ भी नही सके।
आज हम दोनों जैसे खामोश है ऐसे हमेशा नही रहते थे एक वक्त वो भी था जब इंगेजमेंट के बाद फोन पर घन्टो हम बातें किया करते थे और कभी - कभी इस फोन की वजह से हमारे बीच मीठी नोकझोंक भी हो जाती। मेरा कॉल क्यों रिजीव नही किया तुमने मैं बिज़ी थी यार अच्छा मुझ से ज्यादा इम्पोर्टेन्ट काम था तुम्हे मतलब मेरी कोई फिक्र नही तब मनस्वी नाराज़ होते हुए कहती हाँ नही है बस और फिर मैं ज़ोर से हसने लगता। तब हमें एक - दूसरे की बातें बुरी नही लगती थी। शादी के बाद भी सब कुछ ठीक ही तो था।
मुझे ब्लैक कलर कभी पसन्द नही था पर जब मनस्वी मेरे लिए बड़े प्यार से ब्लैक कलर की शर्ट लाई तो मैंने उसे पहना मनस्वी के लिए और मनस्वी को भी कुकिंग कुछ खास पसन्द नही लेकिन फिर भी मुझे खुश करने के लिए उसने मेरी फेवरेट गुजिया बनाई हाँ गुजिया बनाने में उसे बड़ी परेशानी हुई पर उसने कोशिश की। शुरुआती दिनों में हमारा रिश्ता उतना ही खूबसूरत था जितना की आसमान में चमकता हुआ चाँद। जब कभी मैं अपना लेपटॉप लिए ऑफिस का कोई काम करता तो मनस्वी मुझे खूब तंग करती कभी मेरे सामने आकर मुस्काती , गाने गाती तो कभी होले- होले अपनी उंगलियों को मेरे हाथों पे चलाती।पर इसका बदला मैं भी उससे ले लेता था जब वो अपने किसी काम में बिज़ी होती या माँ के साथ किचन में होती तब मैं भी उसे परेशान करता कभी फूल फेंककर उसकी पीठ पर मारते हुए उसे छेड़ता तो कभी बेवजह ही चिल्लाता मेरे मोबाइल का चार्जर कहाँ है मिल नही रहा मनस्वी मनस्वी और जब मनस्वी आती तो मैं झट से उसका हाथ पकड़कर उसे अपनी ओर खींच लेता उसकी जुल्फों को सहलाते हुए उसकी तारीफ में प्यार भरी शायरी सुनाता तो कभी उसका हाथ पकड़ उसके साथ नाचने लगता जैसे कि सारा प्यार अभी ही उमड़ रहा हो। वो समझ जाती की मैं उसे जानबूझकर परेशान कर रहा हूँ इसलिए पहले मुस्कुराती और फिर हाथ छुड़ाकर इतराते हुए चली जाती।
प्यार ऐसा ही होता है शरारती मीठा - मीठा सा।
एक बार मनस्वी और मैं छत पर तारे देख रहे थे अच्छा लगता था मनस्वी को तारे देखना। उसके साथ - साथ मैं भी तारों को बड़े गौर से देखने लगा हम भी इन तारों की तरह हमेशा साथ रहेंगे मैंने पूछा तो मनस्वी ने मेरा हाथ थामते हुए हाँ में सिर हिला दिया।
मुझे कुछ आवाज सी आई देखा तो मनस्वी बैग से कुछ निकाल रही थी मैंने यहाँ - वहाँ देखा और फिर अपने मोबाइल में टाइम देखा तो 2 बजकर 15 मिनिट हो रहे थे बस पांच मिनिट और इंतजार करना था ट्रेन के आने का।
जब वक्त आगे बढ़ता है तो थोड़े बदलाव भी आते है हमारी शादी को 6 महीने से ज्यादा समय हो गया था। पहले हम एक - दूसरे की कुछ आदतों को ही जानते थे पर अब हर एक आदत से वाकिफ हो गए थे। हमारी आदतें ही थी जो एक- दूसरे को खटकने लगी थी। मुझे सुबह का सूरज देखना अच्छा लगता था इसलिए सुबह जल्दी उठकर खिड़कियाँ खोल दिया करता था ताकि उसकी रोशनी मुझ पर पड़े पर मनस्वी इस बात से नाराज़ होने लगी थी क्योंकि रोशनी की वजह उसकी नींद खराब हो जाती थी। मैं जानता था कि मनस्वी को कुकिंग में इंट्रेस्ट नही है पर मैं उससे उमीद करने लगा था कि वो भी माँ की तरह मेरे लिए मेरी पसन्द का खाना बनाये। एक बार घर मैं एक फैमली फंक्शन था मैं मनस्वी के लिए एक साड़ी लाया था हमारे बहुत से रिश्तेदार आज आने वाले थे इसलिए मैं चाहता था कि मनस्वी यही साड़ी पहने पर उसने मेरी बात नही मानी और जब उसने मेरी बात नही मानी तो गुस्से में मैं भी कल देर से आया मुझे पता था कि मनस्वी की फ्रेंड ने हमे डिनर के लिए इनवाइट किया है पर मैं फिर भी देर से घर पहुंचा मनस्वी नाराज हुई।
उसकी आदत गुस्से में चिल्लाने की थी और मेरी आदत गुस्से में खामोश हो जाने की। एक तरफ अब हमारी जिम्मेदारियां बढ़ने लगी थी मनस्वी पर घर की और मुझ पर मेरे काम की और साथ ही हमारे रिश्तें जो हम से जुड़े हुए है उनके लिए भी हमारे कुछ फ़र्ज कुछ जिम्मेदारियां थी उनकी ओर भी हमे ध्यान देना था। दूसरी तरफ हम दोनों की मेल न खाती आदतें जो पहले इतनी बड़ी प्रॉब्लम नही थी जितनी अब हो गई थी मनस्वी अब हर बात पर चिड़ने लगी थी शायद इसलिए कि सब कुछ पहले जैसा क्यों नही मैंने कहा भी हमेशा सब कुछ एक जैसा नही रह सकता बदलाव आते है। ये बात मैं समझ गया था।
अब पहले की तरह मैं उसकी हर बात का ख्याल नही रख पाता और न ही पहले की तरह हर रोज़ एक गुलाब लाता हुँ जो पहले लाकर मैं उसे दिया करता था और कहता था माय स्पेशल माय लाइफ। क्योंकि मैं भूल जाता हूँ और कभी इतना बीज़ी हो जाता हूँ कि घर भी लेट ही पहुँचता हुँ। लेकिन इसका मतलब ये नही कि अब वो प्यार नही, प्यार है पर सिर्फ प्यार ही नही हमे हमारे रिश्ते में समझदार भी होना पड़ता है।
मुझे पता है की जब बदलाव होता है तो हमारे लिए उसे एक्सेप्ट करना थोड़ा मुश्किल होता है लेकिन सभी की जिंदगी में बदलाव आते ही है और हमे उसे समझना पड़ता है।
कल जब घर आया तो मनस्वी नाराज़ सी नजर आई पहले तो मैंने कोशिश की के न पूछूं पर खुदको रोक न सका क्या हुआ तुम ऐसे चुप क्यों बैठी हो , कुछ पहले जैसा नही है मेरी लाइफ पूरी बदल गई है मैं बिल्कुल भी खुश नही हुँ मैं ऐसे नही रह सकती ये कहकर वो रोने लगी। मैं क्या कहता इस वक्त कुछ कहना समझाना या समझना सब बेबुनियाद सा लग रहा था। मनस्वी को लगता है कि उसकी लाइफ बदल गई क्यों क्या मेरी लाइफ पहले जैसे है अगर वो पत्नी बनी तो मैं भी तो पति बना उसकी जिम्मेदारियां बढ़ी तो क्या मेरी नही बढ़ी।
मुझे भी आदत नही थी किसी के साथ अपना रूम शेयर करनी की लेकिन जब मनस्वी आई और उसने अपने हिसाब से रूम डेकोरेट किया तब मैंने तो कुछ नही कहा जबकि जो पेंट उसने वॉल पर कराया वो मुझे खास पसन्द नही था। जब रिश्ता जुड़ता है हम साथ रहते है तो हमे एक - दूजे की आदतों को भी एक्सेप्ट करना होता है अपनी आदतों को बदल दे ये जरूरी नही है पर कुछ नई आदतों को अपना लें तो उसमें कोई बुराई भी नही है ये सिर्फ मेरा मानना है सब ऐसा सोचे ये जरूरी नही।
मैं और मनस्वी हमारे रिश्ते को सम्हाल न सके हम प्यार तो बहुत करते है एक - दूजे से पर फिर भी साथ चलते हुए हमारे रास्ते आज अलग हो रहे है मनस्वी कुछ दिनों के लिए अपने मायके जा रही है या फिर हमेशा के लिए मैंने उसे रोकने की कोई कोशिश नही की।क्यों नही की पता नही। जब हम एक रास्ते पर साथ चल रहे होते है तो हमारा टकरा जाना स्वभाविक है मगर हाथ छूट जाए तो इसका मतलब ये है कि हाथ कसकर थामा ही नही था
ज़ोर से आवाज करती आ रही ट्रेन ने मुझे मेरे वर्तमान में ला दिया मैं मनस्वी का ट्रोली बैग खिंचते हुए आगे बढ़ा पर मनस्वी बैठी रही मनस्वी उठो ट्रेन जा रही है छूट जाएगी उठो मैं कहता रहा वो नही उठी ट्रेन चली गई मैं मनस्वी के पास जाकर खड़ा हो गया वो गर्दन झुकाये बैठी रही मनस्वी क्या हुआ वो तेजी से उठकर मुझसे लिपट गई उसके आँसुओ से मेरे कंधे की शर्ट गीली हो गई थी मैंने प्यार से कहा माय स्पेशल माय लाइफ।
मनस्वी और मेरे हाथ छुटे नही बस उंगलियां जरा फिसल गईं थी।
आज हम दोनों जैसे खामोश है ऐसे हमेशा नही रहते थे एक वक्त वो भी था जब इंगेजमेंट के बाद फोन पर घन्टो हम बातें किया करते थे और कभी - कभी इस फोन की वजह से हमारे बीच मीठी नोकझोंक भी हो जाती। मेरा कॉल क्यों रिजीव नही किया तुमने मैं बिज़ी थी यार अच्छा मुझ से ज्यादा इम्पोर्टेन्ट काम था तुम्हे मतलब मेरी कोई फिक्र नही तब मनस्वी नाराज़ होते हुए कहती हाँ नही है बस और फिर मैं ज़ोर से हसने लगता। तब हमें एक - दूसरे की बातें बुरी नही लगती थी। शादी के बाद भी सब कुछ ठीक ही तो था।
मुझे ब्लैक कलर कभी पसन्द नही था पर जब मनस्वी मेरे लिए बड़े प्यार से ब्लैक कलर की शर्ट लाई तो मैंने उसे पहना मनस्वी के लिए और मनस्वी को भी कुकिंग कुछ खास पसन्द नही लेकिन फिर भी मुझे खुश करने के लिए उसने मेरी फेवरेट गुजिया बनाई हाँ गुजिया बनाने में उसे बड़ी परेशानी हुई पर उसने कोशिश की। शुरुआती दिनों में हमारा रिश्ता उतना ही खूबसूरत था जितना की आसमान में चमकता हुआ चाँद। जब कभी मैं अपना लेपटॉप लिए ऑफिस का कोई काम करता तो मनस्वी मुझे खूब तंग करती कभी मेरे सामने आकर मुस्काती , गाने गाती तो कभी होले- होले अपनी उंगलियों को मेरे हाथों पे चलाती।पर इसका बदला मैं भी उससे ले लेता था जब वो अपने किसी काम में बिज़ी होती या माँ के साथ किचन में होती तब मैं भी उसे परेशान करता कभी फूल फेंककर उसकी पीठ पर मारते हुए उसे छेड़ता तो कभी बेवजह ही चिल्लाता मेरे मोबाइल का चार्जर कहाँ है मिल नही रहा मनस्वी मनस्वी और जब मनस्वी आती तो मैं झट से उसका हाथ पकड़कर उसे अपनी ओर खींच लेता उसकी जुल्फों को सहलाते हुए उसकी तारीफ में प्यार भरी शायरी सुनाता तो कभी उसका हाथ पकड़ उसके साथ नाचने लगता जैसे कि सारा प्यार अभी ही उमड़ रहा हो। वो समझ जाती की मैं उसे जानबूझकर परेशान कर रहा हूँ इसलिए पहले मुस्कुराती और फिर हाथ छुड़ाकर इतराते हुए चली जाती।
प्यार ऐसा ही होता है शरारती मीठा - मीठा सा।
एक बार मनस्वी और मैं छत पर तारे देख रहे थे अच्छा लगता था मनस्वी को तारे देखना। उसके साथ - साथ मैं भी तारों को बड़े गौर से देखने लगा हम भी इन तारों की तरह हमेशा साथ रहेंगे मैंने पूछा तो मनस्वी ने मेरा हाथ थामते हुए हाँ में सिर हिला दिया।
मुझे कुछ आवाज सी आई देखा तो मनस्वी बैग से कुछ निकाल रही थी मैंने यहाँ - वहाँ देखा और फिर अपने मोबाइल में टाइम देखा तो 2 बजकर 15 मिनिट हो रहे थे बस पांच मिनिट और इंतजार करना था ट्रेन के आने का।
जब वक्त आगे बढ़ता है तो थोड़े बदलाव भी आते है हमारी शादी को 6 महीने से ज्यादा समय हो गया था। पहले हम एक - दूसरे की कुछ आदतों को ही जानते थे पर अब हर एक आदत से वाकिफ हो गए थे। हमारी आदतें ही थी जो एक- दूसरे को खटकने लगी थी। मुझे सुबह का सूरज देखना अच्छा लगता था इसलिए सुबह जल्दी उठकर खिड़कियाँ खोल दिया करता था ताकि उसकी रोशनी मुझ पर पड़े पर मनस्वी इस बात से नाराज़ होने लगी थी क्योंकि रोशनी की वजह उसकी नींद खराब हो जाती थी। मैं जानता था कि मनस्वी को कुकिंग में इंट्रेस्ट नही है पर मैं उससे उमीद करने लगा था कि वो भी माँ की तरह मेरे लिए मेरी पसन्द का खाना बनाये। एक बार घर मैं एक फैमली फंक्शन था मैं मनस्वी के लिए एक साड़ी लाया था हमारे बहुत से रिश्तेदार आज आने वाले थे इसलिए मैं चाहता था कि मनस्वी यही साड़ी पहने पर उसने मेरी बात नही मानी और जब उसने मेरी बात नही मानी तो गुस्से में मैं भी कल देर से आया मुझे पता था कि मनस्वी की फ्रेंड ने हमे डिनर के लिए इनवाइट किया है पर मैं फिर भी देर से घर पहुंचा मनस्वी नाराज हुई।
उसकी आदत गुस्से में चिल्लाने की थी और मेरी आदत गुस्से में खामोश हो जाने की। एक तरफ अब हमारी जिम्मेदारियां बढ़ने लगी थी मनस्वी पर घर की और मुझ पर मेरे काम की और साथ ही हमारे रिश्तें जो हम से जुड़े हुए है उनके लिए भी हमारे कुछ फ़र्ज कुछ जिम्मेदारियां थी उनकी ओर भी हमे ध्यान देना था। दूसरी तरफ हम दोनों की मेल न खाती आदतें जो पहले इतनी बड़ी प्रॉब्लम नही थी जितनी अब हो गई थी मनस्वी अब हर बात पर चिड़ने लगी थी शायद इसलिए कि सब कुछ पहले जैसा क्यों नही मैंने कहा भी हमेशा सब कुछ एक जैसा नही रह सकता बदलाव आते है। ये बात मैं समझ गया था।
अब पहले की तरह मैं उसकी हर बात का ख्याल नही रख पाता और न ही पहले की तरह हर रोज़ एक गुलाब लाता हुँ जो पहले लाकर मैं उसे दिया करता था और कहता था माय स्पेशल माय लाइफ। क्योंकि मैं भूल जाता हूँ और कभी इतना बीज़ी हो जाता हूँ कि घर भी लेट ही पहुँचता हुँ। लेकिन इसका मतलब ये नही कि अब वो प्यार नही, प्यार है पर सिर्फ प्यार ही नही हमे हमारे रिश्ते में समझदार भी होना पड़ता है।
मुझे पता है की जब बदलाव होता है तो हमारे लिए उसे एक्सेप्ट करना थोड़ा मुश्किल होता है लेकिन सभी की जिंदगी में बदलाव आते ही है और हमे उसे समझना पड़ता है।
कल जब घर आया तो मनस्वी नाराज़ सी नजर आई पहले तो मैंने कोशिश की के न पूछूं पर खुदको रोक न सका क्या हुआ तुम ऐसे चुप क्यों बैठी हो , कुछ पहले जैसा नही है मेरी लाइफ पूरी बदल गई है मैं बिल्कुल भी खुश नही हुँ मैं ऐसे नही रह सकती ये कहकर वो रोने लगी। मैं क्या कहता इस वक्त कुछ कहना समझाना या समझना सब बेबुनियाद सा लग रहा था। मनस्वी को लगता है कि उसकी लाइफ बदल गई क्यों क्या मेरी लाइफ पहले जैसे है अगर वो पत्नी बनी तो मैं भी तो पति बना उसकी जिम्मेदारियां बढ़ी तो क्या मेरी नही बढ़ी।
मुझे भी आदत नही थी किसी के साथ अपना रूम शेयर करनी की लेकिन जब मनस्वी आई और उसने अपने हिसाब से रूम डेकोरेट किया तब मैंने तो कुछ नही कहा जबकि जो पेंट उसने वॉल पर कराया वो मुझे खास पसन्द नही था। जब रिश्ता जुड़ता है हम साथ रहते है तो हमे एक - दूजे की आदतों को भी एक्सेप्ट करना होता है अपनी आदतों को बदल दे ये जरूरी नही है पर कुछ नई आदतों को अपना लें तो उसमें कोई बुराई भी नही है ये सिर्फ मेरा मानना है सब ऐसा सोचे ये जरूरी नही।
मैं और मनस्वी हमारे रिश्ते को सम्हाल न सके हम प्यार तो बहुत करते है एक - दूजे से पर फिर भी साथ चलते हुए हमारे रास्ते आज अलग हो रहे है मनस्वी कुछ दिनों के लिए अपने मायके जा रही है या फिर हमेशा के लिए मैंने उसे रोकने की कोई कोशिश नही की।क्यों नही की पता नही। जब हम एक रास्ते पर साथ चल रहे होते है तो हमारा टकरा जाना स्वभाविक है मगर हाथ छूट जाए तो इसका मतलब ये है कि हाथ कसकर थामा ही नही था
ज़ोर से आवाज करती आ रही ट्रेन ने मुझे मेरे वर्तमान में ला दिया मैं मनस्वी का ट्रोली बैग खिंचते हुए आगे बढ़ा पर मनस्वी बैठी रही मनस्वी उठो ट्रेन जा रही है छूट जाएगी उठो मैं कहता रहा वो नही उठी ट्रेन चली गई मैं मनस्वी के पास जाकर खड़ा हो गया वो गर्दन झुकाये बैठी रही मनस्वी क्या हुआ वो तेजी से उठकर मुझसे लिपट गई उसके आँसुओ से मेरे कंधे की शर्ट गीली हो गई थी मैंने प्यार से कहा माय स्पेशल माय लाइफ।
मनस्वी और मेरे हाथ छुटे नही बस उंगलियां जरा फिसल गईं थी।

No comments:
Post a Comment