अंग्रेजी




टेबल पर पड़े हुए इस लेटर पर बार- बार मेरी नजर जा रही है मन हाँ और ना दोनों में ही जवाब दे रहा है। दरसल ये लेटर मेरे कॉलेज से आया है कॉलेज में एक फंक्शन है जिसमे कुछ पुराने स्टूडेंट्स को भी बुलाया गया है मेरा बहुत ज्यादा मन तो नही है क्योंकि मैं नही जाना चाहता। फिर कुछ देर बाद जाने क्या दिमाग में आया कि मेरा मन अचानक ही मान गया।
सुबह सूटबूट डटाकर अपने आप को आईने में कई बार देख लेने और खुद से ये पूछ लेने के बाद कि लग रहा हूँ न स्टाइलिश बन्दा, मैं कॉलेज के लिए निकल गया न जाने कितनी पुरानी यादें ताजा हो जाएंगी कुछ मीठी और कुछ कड़वी यादें। कॉलेज में इंटर होते ही मैं पहले प्रिंसिपल से नही मिला क्योंकि मेरे कदम तो क्लासरूम की ओर मुड़ गए थे वही क्लासरूम जिसमे दौड़कर सबसे पहले मैं ही जाता था। 
अंदर पैर रखते ही लगा जैसे फिर से संजू ही क्लास में एंटर हो रहा हो अपने उसी अंदाज में बोलते हुए मैं आई कम इन मेम। 
मुझे आज भी वैसे ही लग रहा है जैसे कि मैं फिर से पहली बार आ रहा हूँ पर कुछ बदला सा नही लग रहा वही ढेर सारी लाइन से रखी बैंच- डेस्क आज भी पेन से इन पर कुछ लिखा हुआ है ब्लैकबोर्ड वो भी पहले जैसा ही है। और दीवारों पर स्टूडेंट्स के तैयार किये पोस्टर्स लगे हुए है। आगे बढ़ते हुए मैं लास्ट रो की उस पीछे वाली बैंच के पास आ खड़ा हुआ हूँ इस पर थोड़ी धूल दिख रही है लगता है कि शायद इस लास्ट बैंच पर अब कोई नही बैठता। मैंने अपनी उंगलियों को उस धूल पर चलाते हुए संजू लिख दिया। मैं इतने गौर से इस क्लासरूम को देख रहा था किेे मुझे चारों ओर बीते वक्त की तस्वीरें नजर आने लगी वो सारे मेरे क्लासमेट्स , मेरे दोस्त , मेरे टीचर्स सब कुछ।
बाहर से आता स्टुडेंट्स का शोर जैसे ही कानो में पड़ा तो याद आया की मुझे तो ओडिटोरिम की ओर जाना है मैं वहां पहुँचा  बिल्कुल एक प्रोफेशनल पर्सन की तरह प्रिंसिपल से मिला और गेस्ट सीट पर जा बैठा जहाँ पहले से मेरे कुछ पुराने परिचित बैठे हुए थे। सूरज , लतिका , आदेश , ऋषि ,रुपाली , जयस , सीमा। जयस और सीमा कॉमर्स वाले थे सूरज ,लतिका , और रुपाली ये मेरे क्लासमेट थे ऋषि और आदेश ये दोनों मेरे सीनियर। लतिका ने मुस्कुराकर मेरी ओर देखा तो मैंने भी उसकी मुस्कुराहट का जवाब अपनी स्माइल से दे दिया।
मुझे कॉलेज का वो पहला दिन याद आ रहा है जब मैं क्लासरुम के बाहर खड़ा अपने टीचर से पूछ रहा था मैं आई कम इन तब पता नही क्यों कुछ स्टुडेंट्स मुझ पर हँस पड़े।
पर मैं तो अपने कॉलेज के पहले दिन को लेकर इतना खुश था कि मैंने किसी बात पर कोई ध्यान नही दिया सीधा लास्ट वाली बैंच पर जा बैठा क्योंकि पूरी क्लास फुल थी और लास्ट सीट ही खाली थी। टीचर ने पढ़ाना शुरू किया वो हर टॉपिक को बारीकी से बता रही थी कभी बुक में दिखाकर कुछ समझाती तो कभी बोर्ड पर लिखकर या ड्रॉ करके हमे बतातीं सारे  स्टूडेंट्स अपने सिर को हिलाकर ये जता रहे थे कि वो सब समझ रहे है पर मुझे तो कुछ समझ नही आ रहा था लेकिन सबको देखकर मैं भी सिर हिलाने लगा। बड़ा ही भयंकर दिन था ये मेरे लिए हर बेल के बाद दूसरे टीचर आते पढ़ाते और चले जाते। वो क्या कहते मुझे कुछ समझ ही नही आता क्योंकि वो अंग्रेजी में कह रहे थे। मैं तो बचपन से ही अपने गाँव के हिंदी मीडियम स्कूल में पढ़ा हूँ मुझे टूटी- फूटी अंग्रेजी पढ़ना आती है पर समझ पाना मेरे बस के बाहर था। एक दिन पहले मैं जितना खुश था आज उतना ही परेशान क्योंकि सब कुछ अंग्रेजी में ही पढ़ना था और अंग्रेजी में ही लिखना था
मेरे लिए तो बड़ी चुनौती ही थी। अब मेरा हाल ये था कि मैं क्लास में सबसे पहले आता और सबसे पीछे जाकर बैठ जाता क्योंकि मुझे डर लगता था डर इस बात का के कहीं टीचर ने मुझे खड़ाकर कुछ पूछ लिया तो मैं क्या करूँगा। करीब एक सप्ताह बीत गया अब तो मेरा एक दोस्त भी बन गया मोहन जोकि मेरे ही जैसा था। लेकिन मैं कोशिश कर रहा था क्लास में कोई ऐसा दोस्त बनाने की जो मेरी अंग्रेजी में मदद भी कर सके पर मेरी भाषा मेरा पहनावा उनसे अलग था और इसलिए मैं उनके लिए एक फुलिश बॉय था कोई मुझसे बात करने में इंट्रेस्टेड नही था और अगर कभी कोई मुझसे बात करता तो भी सूरज और रुपाली जोकि क्लास के एक्स्ट्रा स्मार्ट स्टूडेंट्स थे ये उनको बड़ा ही खटकता इसलिए वो कभी मेरा मजाक उड़ाते तो कभी कुछ तंज सा कसकर चले जाते जिसकी वजह जो मेरे साथ होता वो भी मुझसे दूर हो जाता।
न तो मैं स्टाइलिश था और ना ही मैं अंग्रेजी में गिटपिट कर पाता था सूरज और रुपाली को लगता था कि उन जैसे स्मार्ट स्टूडेंट्स के बीच मैं कहाँ से आ गया और इसलिए वो मुझसे चिड़ते थे।
कॉलेज में एक इवेंट रखा गया था जिसमे अलग- अलग कॉम्पटीशन में स्टूडेंट्स ने पार्टिसिपेट किया मैं सरप्राईज़ तब हुआ जब नोटिस बोर्ड पर बाकी स्टूडेंट्स के साथ मैंने अपना नाम भी देखा।
मिस्टर संजय सोनी प्लीज़ कम ऑन स्टेज पुकारा गया मैं एक गेस्ट के तौर पर आया हूँ तो मुझे कुछ शब्द तो कहने पड़ेंगे बस आज मैं फर्स्ट हूँ क्योंकि सभी गेस्ट में मुझे ही सबसे पहले बुलाया गया अपने बारे में कुछ कहने के लिए अपनी सक्सेस के बारे में बताने के लिए मैं 20 मिनिट तक लगातार बिना अटके बोलता रहा कुछ स्टूडेंट्स ने कुछ सवाल भी करें मैंने सरल शब्दों में उनका अंसर दिया और लास्ट में हिंदी मैं बस इतना कहा धन्यवाद। पूरा ऑडिटोरियम तालियों से गूंज उठा।
ये वही जगह है जहाँ कभी सब मुझ पर हँस रहे थे उस दिन इवेंट में मुझे अपने कॉलेज , अपनी स्टूडेंट लाइफ पर ही तो बोलना था वो भी सब इंग्लिश में। मेरा नाम कॉम्पिटिशन में सूरज ने लिखाया था मैं अपने टीचर के पास अपना नाम हटाने को कहने जा रहा था क्योंकि मैं अच्छी तरह जानता था कि अंग्रेजी में मेरा डब्बा गुल है तब आदेश और ऋषि जोकि मेरे सीनियर थे उन दोनों ने मुझे रोक लिया ये कहकर की वो मेरी हेल्प करेंगे।
और उन्होंने मेरी हेल्प की भी। चार दिनों तक उन दोनों ने मेरी प्रैक्टिस कराई और कंटेंट भी उन्हीं ने तैयार किया। और जब मैं स्टेज पर आने से डर रहा था तब मेरा हौसला बढ़ाते हुए उन्होंने मुझे स्टेज पर पहुँचाया। और फिर मैंने अटक - अटक कर पढ़ना शुरू किया मैं घबराहट के साथ कभी अपनी साँसों को तेजी से खिंचता तो कभी एक साथ सांसो को छोड़ देता मानो अपने डर को बाहर निकाल रहा हूँ और जैसे ही पन्ने की लास्ट लाइन पढ़कर थैंक्यू कहा सब जोर- जोर से हँसने लगे मैं आँखे झुकाकर वहां से बाहर आ गया तब लतिका ने मुझे बताया कि सब सिर्फ मेरी अटकती इंग्लिश पर ही नही बल्कि जो मैंने पढ़ा उस पर भी हँस रहे थे क्योंकि उसमें शब्दो की हेरा- फेरी थी। बाद में पता चला कि आदेश और ऋषि सूरज के फ्रेंड है। अब कुछ और जानने की जरूरत थी ही नही। अगले दिन लायब्रेरी के बाहर ऋषि और आदेश जब मुझसे टकराये तो मेरे पास आकर बोले सॉरी यार हम तो बस छोटा सा मजाक कर रहे थे तुम्हे हर्ट करने का कोई इरादा नही था हमारा ,सॉरी। तब मैंने उनसे कुछ नही कहा , कहा तो बस खुदसे
कुछ गलत नही है मुझे अंग्रेजी नही आती बस इतना ही गलत है।
आज मेरी नजर झुकी हुई नही है और न ही कोई मेरी अंग्रेजी पर हँसने वाला है आय एम इंग्लिश ट्रेनर। कितने लोग आज मेरे इंस्टीट्यूशन में सिर्फ इंग्लिश सीखने आते है संजू से अंग्रजी सीखने।
अंग्रेजी मेरे जैसे कई लोगो के लिए एक समस्या है जो कि मुश्किलें खड़ी करती है सिर्फ भाषा के न आने से हम लोगो के लिए अलग हो जाते है जो अंग्रेजी बोलता है वो इंटेलिजेंट है और इससे उसे सम्मान मिलता है ये कुछ बहुत समझदार लोगो का नज़रिया है और 'शायद संजय को भी यही लगता है पर संजू को नही'।





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