चिट्ठी



पुराने जमाने में चिट्ठियों का बोहोत ही उपयोग किया
जाता था  प्रेमी जोड़े अपने दिल की बात कहने के
लिए चिट्ठियों का ही सहारा लेते थे हमारी आज की
कहानी ऐसी ही एक प्यार भरी चिट्ठी से जुड़ी हुई है।
      राधिका घर की सफाई करते हुए बड़बड़ाये
जा रही थी कुछ दिनों के लिए मायके क्या चले जाओ
इन पतियो से घर की रेख देख भी नही हो पाती। क्या
हालत कर दी है पूरे घर की। सारा सामान यँहा वँहा
बिखरा पड़ा है। विनय भी ना कुछ नही होता इनसे
बस सब बिगाड़ सकते है ठीक करना तो आता ही नही
है। सफाई करने और अल्मारी  में सामान जमाने के
बाद राधिका की नजर अल्मारी के ऊपर रखे बॉक्स
पर पड़ती है। गुस्सा करते हुए राधिका - इस बॉक्स में
भी न जाने क्या भर कर रखा है पता नही काम का
सामान है भी के नही आज मैं इसे देखती हूँ ।
राधिका बॉक्स को नीचे उतार कर उसमे रखा सामान
देखने लगती है। बॉक्स में विनय का कॉलेज के समय
का कुछ सामान था। सबसे पहले उसमे से एक शर्ट
निकली जिस पर पेन से कुछ लिखा हुआ था
शायद  उसके
दोस्तो ने लिखा था याद रखना भूल मत जाना, किसी ने लिखा था खुश रहो सफल रहो, तो किसी ने
लिखा मेरी शादी में जरूर आना माय फ़्रेंड, तो किसी
ने कुछ कार्टून बनाया हुआ था। ये शर्ट शायद विनय ने
कॉलेज के लास्ट डे पर पहनी होगी। तभी तो विनय के
दोस्तो ने इस पर कुछ न कुछ लिखा है। शर्ट के बाद
राधिका का के हाथ कुछ ग्रीटिंग्स कार्ड और फ़्रेंडशिप
बेंड आये। जिन्हें राधिका ने देखा और फिर रख दिया
उसके बाद हाथ आई एक डायरी जिसमे शायरियां
लिखी थी। विनय को शायरियां आती है  ये तो राधिका
को पता ही नही था। राधिका की परेशानी यही से शुरू  होती है। क्योंकि इस डायरी से राधिका के हाथ
लगती है एक चिट्ठी। जिसे पढ़ राधिका परेशान हो जाती है। आखिर चिट्ठी में ऐसा क्या लिखा था
दरसल चिट्ठी में लिखा था-
 आज तुम ब्लैक सर्ट में बोहोत अच्छे लग रहे थे
 पता है में पूरे समय तुम्हे ही देखती रही एक भी
 लेक्चर ध्यान से नही सुना। और तुम हो की एक
 बार भी मेरी तरफ नही देखा। पर मैं तुम से नाराज
 नही हूँ।  और न ही हो सकती हूँ  तुम से इतना प्यार
जो करती हूँ। कल पार्क मिलेंगे

इसके आगे और भी बहुत कुछ लिखा था जो की
राधिका ने पढ़ा। चिट्ठी के
आखरी में लिखा था मेरे प्यारे विन्नू।
चिट्ठी लिखने वाली के चाहे कितने भी प्यारे हो विन्नू
पर राधिका को जरूर अभी विनय बिल्कुल भी प्यारे
नही लग रहे थे। राधिका ने बॉक्स का सारा समान
 बॉक्स में रख उसे वापस ऊपर रख दिया। और चिट्ठी अपने पास रख ली। अब वह शाम होने का
इंतजार करने लगी। राधिका ने सोच लिया था।
कि जैसे ही विनय आएंगे वह उनसे चिट्ठी के विषय में
बात करेगी। विनय के ऑफिस से आने के बाद
राधिका ने पूछना तो चाहा पर पूछ ना सकी।
अगले दिन राधिका ने बातो ही बातो में  मजाक करते
हुए विनय से कहा- कॉलेज  में तुम्हारी कोई प्रेमिका तो
जरूर रही होगी।
विनय ने हस्ते हुए कहा तुम्हे ऐसा क्यों लगता है
राधिका ने जवाब देते हुए कहा- तुम हो ही इतने अच्छे
कोई न कोई तो जरूर पीछे पड़ गई होगी तुम्हारे।
सच बोलो कोई थी क्या।
विनय ने कहा- ये क्या बाते कर रही हो कोई नही थी
यार। मैं ऑफीस जा रहा हूँ ठीक है बाय।
ऐसा कह विनय चला गया। लेकिन राधिका के मन में
अभी भी चिट्ठी वाली बात चल रही थी।
 उसी दिन दोपहर में विनय फोन करके बताता है की
शाम को कोई मेहमान आने वाले है तो वह उनके
लिए भी डिनर तैयार रखे।
शाम को विनय और राधिका मेहमान के आने
का इंतजार कर रहे थे काफी देर हो गई थी अब तक
कोई नही आया था। तभी डोर बेल बजी विनय और
राधिका दोनो दरवाजे के पास गये। विनय ने दरवाजा
खोला सामने एक खूबसूरत सी महिला खड़ी थी
जिसने लाल रंग की साड़ी पहनी हुई थी। विनय उसे
देखते ही मुस्कुरा दिया और कहने लगा बड़ी देर लगा दी आने में चलो अंदर आओ। महिला अंदर आती
है राधिका उसके लिए पानी लाती है और वही विनय
के बगल में आकर बैठ जाती है। विनय पूछता है तुम
अकेली ही आई हो अन्नू विजय क्यों नही आया। वह कहती है उसे कुछ काम था वह दो दिन बाद आयेगा।
राधिका कहती है आपका नाम अन्नू है।
अन्नू मुस्कुराते हुए कहती है कॉलेज में सारे दोस्त मुझे
अन्नू कहते थे। हम कॉलेज फ़्रेंड है ना इसलिए ये मुझे
अन्नू कह कर पुकार रहा है वैसे मेरा नाम अनामिका
है।
तीनो कुछ देर बैठकर बाते करते है और फिर डिनर करते है डिनर के वक्त अनामिका कहती है तुम्हे
चावल की खीर कितनी पसन्द थी ना विन्नू आज भी पसंद है
या नही। राधिका सुनते ही पूछ पड़ती है विन्नू
क्या इनको भी सब विन्नू कहकर पुकारते थे  विनय
राधिका को बताता है के सिर्फ अनामिका और विजय
ही उसे विन्नू के नाम से पुकारते थे।
राधिका को चिट्ठी याद आ जाती है उसमे भी तो यही
लिखा था विन्नू। राधिका सोचने लगती है कही
वो चिट्ठी अनामिका की ही तो नही है।राधिका के मन
में शक आ जाता है।
डिनर के बाद अनामिका और विनय साथ बैठ कर
बाते करने लगते है जोकि राधिका को मन ही मन बुरा
लग रहा होता है। राधिका अनामिका से कहती है
आप थक गई होंगी आप जाकर सो जाइये। बाते तो
कल भी हो जायेगी। लेकिन बीच में ही विनय बोल
पड़ता है अरे नही अन्नू थोड़ी देर और बात करते है
क्या तुम्हे नींद आ रही है। अन्नू कहती है नही
विनय कहता है तो बस बैठी रहो अरे राधिका तुम्हे
नींद आ रही हो तो तुम जाकर सो जाओ। विनय की
बात सुन राधिका को गुस्सा तो बोहोत आता है पर
वह कुछ कह भी तो नही सकती थी इसलिए खुद ही अपने कमरे में जाकर सो जाती है पर नींद भी कहा आने वाली थी। राधिका तो बस उन दोनो के बारे में ही
सोचे जा रही थी इसी बीच राधिका की आँख लग जाती है और वह सो जाती है।
अगली सुबह राधिका सबके लिए नाश्ता बना रही होती है तभी विनय आकर बताता है की वह आज ऑफिस से जल्दी  आ जायेगा। अनामिका को मार्केट
जाना है तो वह उसे ले जायेगा। राधिका ने बोहोत ही धीरे से कहा ठीक है।
राधिका मन ही मन घुटे जा रही थी।बस अब उसे सच
जानना था। काम से निपट राधिका अनामिका के पास
जा बैठी वह उससे कॉलेज के समय की बाते पूछने
लगी दरसल बातो में फसाकर राधिका अनामिका से
उसके और विनय के रिश्ते के बारे में जानना चाह रही
थी पर इस सब से राधिका के हाथ कुछ नही आया ।
बिचारी राधिका खुद के ही सवालो में उलझे जा
रही थी। परेशान राधिका अचानक उठकर जाती है
और कागज पेन लेकर आती है।वह अनामिक से
कहती है मुझे एक चिट्ठी लिखनी है क्या आप लिख
दोगी। मेरे ताऊजी गाँव में रहते है उन्हें ही यह चिट्ठी
भेजनी है। अनामिका ने कहा- तुम क्यों नही लिख रही
हो।
राधिका भोला सा चेहरा बनाते हुए कहती है वो मेरी उंगली में चोट लग गई है इसीलिए। अनामिका चिट्ठी लिख देती है।राधिका तुरन्त चिट्ठी लेजाकर उस चिट्ठी से लिखावट मिलाती है जो उसे डायरी में से
मिली थी। दोनो चिट्ठी की लिखावट बिल्कुल एक
जैसी थी राधिका को अब यकीन हो जाता है की विनय
के नाम चिट्ठी अनामिका ने ही लिखी थी।
शाम को जब विनय और अनामिका मार्केट से होकर
वापस आते है तब राधिका का व्यवहार अनामिका के साथ बहुत ही रूखा सा होता है। वह इस तरह नाराज
थी की उसने गुस्से में खाने में ढेर सारी मिर्च मिला दी
और खीर में शक्कर की जगह नमक डाल दिया।
जब विनय ने राधिका को बताया की उसने खीर में नमक डाल दिया शक्कर की जगह तो राधिका
नाराज हो गई। और अपने कमरे में चली गई।
अगले दिन भी राधिका अनामिका से रूखा सा
व्यवहार कर रही थी। अनामिका समझ नही पा रही थी के आखिर राधिका उससे क्यों नाराज है।
राधिका ने गुस्से में कल से कुछ नही खाया था जिसके
बारे में विनय को तो पता ही नही था। आज रविवार
था तो विनय घर पर ही था। वो अनामिका के साथ
बाहर गार्डन में बैठा था कुछ बात कर रहा था तभी
विजय भी आ जाता है। विनय विजय से मिल खुश हो
जाता है। दोनो कॉलेज की पुरानी बातो को याद करने लगते है।
इधर राधिका भूख से बेहाल हुए जा रही थी उसने सोचा विनय आकर मनाएंगे तभी वह खाना खाएगी।
पर ऐसा ना हो सका। राधिका से अब भूख बर्दाश
ना हो सकी इसीलिए उसने नाश्ता कर लिया।
वैसे भी वह खाने से थोड़ी नाराज थी।
यहाँ विनय राधिका के गुस्से की असल वजह से
अंजान अपने दोस्तो के साथ योजना बना रहा था की शाम को क्या खास करेंगे।
शाम को राधिका को सब व्यस्त नजर आते है सब उसे देखकर मन्द-मन्द मुस्कूराये जा रहे थे। पर राधिका
को कुछ समझ नही आ रहा था। अनामिका से उसे
इतनी चीड़ हो रही थी की उसने विजय से भी अच्छे से
बात नही की। विनय के साथ अनामिका को हँसते हुए
देख तो उसका खून जले जा रहा था। सब बैठक रूम
में थे और राधिका को वही बुला रहे थे। राधिका ने सोच लिया था कि अब वह विनय से सच सुन कर ही
रहेगी। तो बस गुस्से में राधिका विनय के पास जा
पहुँची और चिट्ठी दिखाते हुए पूछती है - ये चिट्ठी
तुम्हे अनामिका ने लिखी थी ना क्या रिश्ता था तुम
दोनो का बताओ सच बोलो। इतना बोल कर राधिका
रोने लगती है। सब हैरान भरी निगाहों से राधिका
को देख रहे होते है। विनय चिट्ठी देखता है और फिर
अनामिका और विजय को  दे देता है कमरे में सन्नाटा
सा छा जाता है। और कुछ ही देर में सब जोर-जोर से
हँसने लगते है राधिका चौक जाती है।और सब की
ओर देखने लगती है विनय हँसते हुए राधिका को गले
लगा लेता है और विजय से कहता है अब तुही सच बता।
विजय राधिका को बताता है की ये जो चिट्ठी है वह
अनामिका ने कॉलेज के दिनों में मुझे लिखी थी
दरसल उसे गलतफहमी हो गई थी की मेरा नाम
विनय है हमने भी अनामिका को कुछ दिनों तक खूब
मूर्ख बनाया और फिर सच बता दिया। पर विनय ने
उन दिनों को याद कर हँसने के लिए ये चिट्ठी अपने
पास ही रखली। बिचारे को पता नही था के ये आपके
हाथ लगेगी तो क्या होगा।
विनय मुस्कुराते हुए कहता है अब सच जान लिया । चलो केक काटो। आज शादी की सालगिरह है हमारी।
वो तो सच पता चल गया नही तो तुम तो तलाक दे
देती मुझे।
राधिका तो भूल ही गई थी क्या करे उसके दिमाग में
इतनी बाते जो चल रही थी। सालगिरह कैसे याद
रहती। खैर राधिका अब तो खुश थी।और उसने
अपने बुरे व्यवहार के लिए सब से माफी भी मांग ली
थी। विनय तो अभी भी चिट्ठी राधिका को दिखा कर
हँसे जा रहा था। और उसे चिढाए जा रहा था
बस इसी तरह हस्ते चिढ़ाते हुए
ये शाम खत्म हो गई। और ये कहानी भी।



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