कुल्फ़ी




माँ मैं जा रहा हूँ आवाज लगाकर अनुराग बोला और अपनी साइकिल लेकर नुक्कड़ की ओर चल दिया। नुक्कड़ पर दिनु भईया के चाय के स्टॉल के पास अपनी साइकिल खड़ी कर अनुराग लकड़ी के स्टूल पर बैठ गया और इंतजार करने लगा। इस नुक्कड़ पर लाइन से स्टॉल लगी हुई है दिनु भईया की चाय की स्टॉल , पोहे जलेबी की स्टॉल उसके बगल में चना जोर गर्म वाले भईया उनके बगल में जूस वाले भैया उनके बगल में आइसक्रीम वाले भईया और उनके बगल में है कुल्फ़ी वाले अंकल जिनकी मावा कुल्फ़ी पूरी कॉलोनी में बड़ी फेमस है अनुराग और उसके दोस्त को तो ये मावा कुल्फ़ी बड़ी ही पसन्द है रोज़ कुल्फ़ी खाने ही तो आता है अनुराग यहाँ, पर अपने दोस्त के बिना कभी भी अनुराग अकेले कुल्फ़ी नही खाता वो अपने दोस्त के आने का इंतज़ार करता है जैसे अभी कर रहा है।अनुराग अपने दोस्त का इंतज़ार कर रहा था और साथ ही बढ़ती लोगो की भीड़ देख उसे फ़िक्र भी हो रही थी कि कहीं कुल्फ़ी खत्म ना हो जाये अनुराग लोगो के बीच से निकलता हुआ कुल्फ़ी वाले अंकल के पास जा पहुँचा अंकल दो कुल्फी, नही अभी नही चाहिए मेरा दोस्त आ जाये फिर लूँगा पर आप दो कुल्फ़ी बचाकर रखना अनुराग कुल्फ़ी वाले अंकल से बोला, हाँ बेटा मैं जरूर बचाकर रखूँगा कुल्फ़ी वाले अंकल ने कहा। अब अनुराग रास्ते की ओर नजरें टिकाये देख रहा था कि शायद उसका दोस्त उसे आता दिखाई दे रास्ते से कई लोग आते तो दिख रहे थे पर अनुराग को उसका दोस्त नज़र नही आया कुछ देर बाद कोई स्कूटी नुक्क्ड़ की ओर आती दिखी,  एक 55 - 60 वर्ष का शख्स स्कूटी चलाकर लाया सड़क के किनारे अपनी स्कूटी खड़ी कर वो चाय के स्टॉल के पास आया, कितनी देर लगा दी दोस्त मैं कब से इंतज़ार कर रहा था सॉरी दोस्त वो कुछ काम आ गया था इसलिए देरी हो गई अनुराग के पूछने पर  उसके दोस्त ने कहा। ठीक है, चलो पहले कुल्फ़ी ले लेंते है नही तो खत्म हो जायेगी अनुराग ने कहा , इसके बाद कुल्फ़ी लेकर दोनों दोस्त चाय के स्टॉल के पास बैठ गये अनुराग को कुुल्फ़ी 
खाकर जो खुशी मिलती है उतनी तो तब भी नही मिलती जब वो अपनी टीचर से डाँट खाने से बच जाता है अनुराग बड़े चाव से कुल्फ़ी खा रहा था मज़ा आया अच्छी लग रही है ना कुल्फ़ी खाते हुए अनुराग ने अपने दोस्त से पूछा, हाँ बड़ी अच्छी लग रही है अनुराग के दोस्त ने खुश होते हुए कहा। तो बताओ आज का दिन कैसा रहा किसी से झगड़ा तो नही हुआ या फिर आज भी हुआ अनुराग के कन्धे पर हाथ रखते हुए उसके दोस्त ने पूछा। दोस्त मेरी कुल्फ़ी खत्म हो गई मैं एक और लेकर आता हूँ इतना कहकर अनुराग झट से कुल्फ़ी वाले के पास पहुँचा और एक और कुल्फ़ी ले आया। क्या बात है दोस्त आज बात करने का मूड नही है क्या कुछ बोल ही नही रहे हो अनुराग के दोस्त ने कहा। अनुराग उसे देखकर मुस्कुराया और बोला अरे ! नही दोस्त आज मेरा तो क्या किसी का किसी से झगड़ा नही हुआ , अच्छा क्यों? क्योंकि आज तो रिजल्ट था बहुत डर लग रहा था ऐसा लग रहा था कि आज इंग्लिश टीचर के हाथों फिर से पिटाई होने वाली है और हथेलियाँ टमाटर से भी ज्यादा लाल होने वाली है पर बच गया गहरी साँस भरते हुए अनुराग बोला, इस बार रिजल्ट पहले अच्छा रहा दोस्त थैंक यू ये तुम्हारी वजह से ही हो पाया । ऐसी बात नही है तुमने भी तो मेहनत की ना अनुराग के दोस्त ने कहा, और फाइनल एग्जाम के लिए हम और भी अच्छे से तैयारी करेंगे। ठीक है अब बताओ तुम्हारा दिन कैसा रहा अनुराग ने पूछा , मेरा दिन वैसा ही रहा जैसा रोज़ रहता है सुबह उठकर मॉर्निंग वॉक पर गया फिर वापस आकर कॉलेज के लिए रेडी हुआ दीपेश के हाथों का बना नाश्ता किया और अपना लंच लेकर कॉलेज के लिए निकल गया स्टूडेंट्स की क्लासेस ली और फिर शाम को घर लौट आया उसके बाद कुछ काम था मुझे, मैंने वो खत्म किया और फिर यहाँ तुमसे मिलने चला आया। क्या तुम्हारे स्टूडेंट्स तुम से डरते है अनुराग ने पूछा , अब ये तो मेरे स्टुडेंट्स ही बता पायेंगे पर मुझे नही लगता की वो डरते है। वैसे मुझे भी नही लगता कि वो तुमसे डरते होंगे अनुराग ने शरारती अंदाज में कहा। हाँ तुम भी कहाँ डरते हो अपनी टीचर से कुलदीप ने मुस्कुराकर अनुराग को छेड़ते हुए कहा। चलो बातें बहुत हो गई थोड़ी सी पढ़ाई करें कुलदीप और अनुराग नुक्क्ड़ के पास वाले गार्डन एरिया में जाकर बैठ गए, आज कुलदीप ने अनुराग को कुछ और इंग्लिश वर्ड्स बताये। ये सारे वर्ड्स जो है इनका बहुत यूज़ होता है इसलिए मैंने तुम्हें अच्छे से समझा दिए है इनको रिवाइज़ कर लेना ओके , ओके दोस्त अनुराग ने कहा।  अरे प्रोफेसर चतुरर्वेदी आप यहाँ, कैसे है आप एक शख्स ने कुलदीप से आकर पूछा ,  बढ़िया हूँ मैं अक्सर यहाँ आता रहता हूँ आप बताइये कैसे है आप, मैं भी ठीक हूँ अपने पोते- पोती को लेकर आया हूँ वो देखिए वहाँ खेल रहे है ये आपका पोता है , नही मैं तो इनका दोस्त हूँ अनुराग कुलदीप के कहने से पहले बोल पड़ा। अच्छा ठीक है तो प्रोफेसर साहब मिलते है कभी, अभी पोता- पोती वहाँ खेल रहे है ज़रा उनके साथ वक्त गुजरता हूँ। जी बिल्कुल। दोस्त ये कौन थे ये भी प्रोफेसर है संस्कृत के पर दूसरे कॉलेज में,  मीटिंग दौरान हमारी मुलाकात होती रहती है। कुछ देर पहले प्रोफेसर कुलदीप जो अनुराग से इतनी बातें कर रहे थे अब ज़रा खामोश से हो गए थे क्या हुआ दोस्त कुछ नही अनुराग के पूछने पर प्रोफेसर चतुरर्वेदी ने कहा। विकल्प भईया का फोन आज भी नही आया क्या?  अपने दोस्त के चेहरे की तरफ देखते हुए अनुराग ने पूछा नही कुलदीप ने कहा। तुम्हारी बात हुई तुम्हारे पापा से कुलदीप ने अनुराग से पूछा तो उदास होते हुए अनुराग ने भी कहा नही। जहाँ अभी सब कुछ ठीक था वहाँ अचानक से उदासी सी छा गई अनुराग और कुलदीप दोनों के मन मे आज फिर से एक उम्मीद के टूट जाने का दुख उभर आया। अनुराग और कुलदीप के आसपास अब लोगो की भीड़ बढ़ने लगी थी क्योंकि अब शाम गहराने लगी थी और इस वक्त कॉलोनी के लोग इस गार्डन एरिया में कुछ वक्त गुजारने आते है। अनुराग अब शाम बढ़ रही है इसलिए अब तुम्हे घर जाना चाहिए नही तो तुम्हारी मम्मी फ़िक्र करेंगी ,ओक दोस्त पर तुम , मैं कुछ देर बाद चला जाऊँगा लेकिन अभी तुम घर जाओ कुलदीप ने कहा। ओके बाये कहकर अनुराग चला गया। लेकिन प्रोफेसर कुलदीप वो बैठे रहे आसमान को देख रहे थे कितना दूर है ये आसमान जमीं से, देखने मे ये भले ही ये पास नजर आता हो पर जमीन ही जानती है की उनके बीच कितनी दूरी है। कुछ देर तक प्रोफेसर कुलदीप अकेले बैठे रहे ,घर जाने का उनका मन नही कर रहा था पर मन हो ना हो घर तो जाना पड़ेगा अपने मन को मनाते हुए प्रोफेसर साहब अपनी गाड़ी के पास आ गये और गाड़ी स्टार्ट कर घर की ओर चले गए। चार महीने पहले ऐसे ही शाम के वक्त प्रोफेसर साहब की गाड़ी यहाँ नुक्क्ड़ के पास रुकी थी चाय पीने आये थे वो यहाँ बेमन से दरसल प्रोफेसर साहब को ऐसे नुक्क्ड़ पर लगी स्टॉल के पास बैठकर चाय पीने की बिल्कुल भी आदत नही थी पर उस दिन फिर भी वो आये थे और तभी उनकी मुलाकात अनुराग से हुई थी जोकि अब उनका दोस्त है हाँ उम्र का फक्र है पर फिर भी दोनों दोस्त है। 

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