मेरा मन



        मेरा मन उदास है जाने क्यों कुछ तो बात है।
        न दिल टूटा है न किसी का साथ छूटा है
        फिर भी ना जाने क्यों ये मन रूठा है।
        न जाने किस गम में ये डूबे जा रहा है
        बात कुछ नही है फिर भी ऊबे जा रहा है।
        चंचल बन यहाँ वहाँ घूम रहा है
        न जाने ये मनवा क्या ढूंढ रहा है।
        कभी मुस्का रहा है तो कभी गुस्सा दिखा रहा है
        पता नही मेरे मन को क्या हुए जा रहा है।
        कभी बेचैन तो कभी परेशान डोल रहा है
        न जाने ये आजकल कौनसी भाषा बोल रहा है।
        कुछ - कुछ ये मन बदल रहा है
        मेरे ईशारों पर बिल्कुल नही चल रहा है।
        खामोशियों के ये पंख लगा रहा है
        नाराजगियों के वन में उड़ें जा रहा है।
        न कुछ कह रहा है न कुछ बता रहा है
        जाने किन सवालों में उलझते जा रहा है।
        नादान मन बावरा हुए जा रहा है
        परेशानी नही है तो भी गम किये जा रहा है।
        बदला कुछ नही वही दिन वही रात है फिर भी
        मेरा मन उदास है जाने क्यों कुछ तो बात है।

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