क्या कोई हमे तभी अच्छा लगता है जब उससे हमारा कोई रिश्ता हो , क्या हम फ़िक्र उसी की करते है जो हमारा कुछ लगता हो। क्या ये जरूरी है कि अगर किसी से हमारा कोई रिश्ता नही है तो हम उसका ख्याल मन में नही ला सकते उसकी परवाह नही कर सकते।
ये सवाल मेरे मन में यूँहीं नही आया है शोभना की कही बातों ने मुझे ये सोचने पर मजबूर कर दिया है। जब किसी का किसी से कोई रिश्ता होता है तब ही कोई किसी की परवाह करता है
मैं नही पर लोग ऐसा ही सोचते है शोभना का ऐसा कहना कहीं न कहीं मेरे लिए एक सवाल की तरह ही था। कि आखिर क्या रिश्ता है मेरा अनन्दिता से।
एक साल पहले मेरा प्रमोशन हुआ और मैं जबलपुर से भोपाल शिफ्ट हो गया। नई जगह नया ऑफिस और नए कलीग्स।
बॉस ने मुझे सबसे इंट्रोड्यूज कराया। मैं कल ही पूरे स्टाफ मैम्बर से मिल चुका था पर कोई एक है जिससे शायद कल मेरी मुलाक़ात नही हुई थी। वो अनन्दिता है जो कल ऑफिस नही आई थी। मैंने जब अनन्दिता को पहली बार देखा तो उसकी छवि मेरी आँखों मे ठहर गई। ऑफिस के सभी लोगो से मुझे अनन्दिता बहुत अलग सी लगी। न बहुत स्टाइलिश न बहुत सिम्पल एक अलग ही रूप है अनन्दिता का, जो शायद मुझे अच्छा लगा। वैसे मेरी अनन्दिता से बात बहुत कम ही होती थी क्योंकि हम दोनों का काम अलग था पर लंच सब साथ में करते है तो इस बहाने मेरी थोड़ी बहुत बातचीत अनन्दिता से हो जाया करती थी। कभी बातों से वो समझदार लगी तो कभी थोड़ी सी नादान।ऑफिस में नीलम ही अनन्दिता की ज्यादा करीबी दोस्त है मैंने जब कभी भी अनन्दिता को नीलम से बात करते देखा है तब मुझे वो बेफिक्र सी नजर आई है। एक अच्छे दोस्त का साथ ऐसा ही होता है।
कुछ वक्त के लिए ही सही हमे बेफ़िक्र कर देता है।
हम ऑफिस मेंबर्स की हर वीक बॉस के साथ मीटिंग जरूर होती है इस बार की मीटिंग में बॉस ने सभी को अलग- अलग सब्जेक्ट्स पर प्रजेंटेशन तैयार करने को दी है। ये पहली बार हुआ की अनन्दिता मुझसे हेल्प लेने आई मैं तब मीटिंग के बाद अपने कदम केबिन की ओर बढ़ा रहा था कि अनन्दिता ने मुझे रोकते हुए कहा विक्रांत सर मुझे आपकी हेल्प चाहिए।
आप मेरी हेल्प करेंगे ये पूछते वक्त अनन्दिता की आँखे कितनी मासूस सी लग रही थी मैंने कुछ पूछा नही बस फ़ौरन ओके कह दिया।
दरसल अनन्दिता को अपनी प्रजेंटेशन तैयार करने में मेरी मदद चाहिए थी मेरा वर्क एक्सपीरियंस ज्यादा है और अनन्दिता को साल भर भी नही हुआ ऑफिस जोइन किये
बस यही सोचकर अनन्दिता ने मुझसे हेल्प ली क्योंकि वो अपने काम को बेहतर से बेहतर करना चाहती थी।
इसी दौरान मैंने जाना कि अनन्दिता बहुत ऑनिस्ट और मेहनती भी है मैं अपने लेपटॉप पर हमारे वर्क से रिलेटिड
एक - एक पॉइंट को समझाता गया और अनन्दिता ध्यान से सब समझती गई वो कितना समझ पाई ये तो प्रजेंटेशन के वक्त ही पता चलेगा।
सारे ऑफिस मेम्बर्स मीटिंग रूम में आकर बैठ गए थे और बॉस का वेट कर रहे थे कुछ मिनिट बाद बॉस आये और प्रजेंटेशन स्टार्ट हुई अनुज के बाद अनन्दिता आई अभी उसने सबसे पहले मेरे और नीलम की ओर देखा तो हम दोनों
ने ही उसे इशारे में ऑल द बेस्ट कहा। उस वक्त मुझे नही पता था कि मेरी नजर भले ही सामने थी पर शायद एक दो नजरें मुझ पर भी थी। अनन्दिता की प्रेजेंटेशन अच्छी रही जिसके लिए उसने मुझे बाद में बड़े ही सौम्य तरीके से थैंक्यू कहा।
अब ऐसा नही था कि हमारे बीच कोई बहुत अच्छी दोस्ती हो गई या अनन्दिता बहुत फ्रेंक हो गई थी अभी भी पहले जैसे ही लंच में थोड़ी बहुत बातचीत होती थी वो भी अपने वर्क से रिलेटिड। बस इतना जरूर था कि एक - दूसरे को देखकर एक छोटी सी स्माइल जरूर कर देते थे हेलो या गुड मॉर्निंग के तौर पर।
दो - चार दिनों से अनन्दिता ऑफिस में नजर नही आई नीलम से पता चला कि वो बीमार है और उसने एक सप्ताह की छुट्टी ली हुई है ये सुनकर मुझे बहुत ज्यादा तो नही पर थोड़ी सी फिक्र अनंदिता की जरूर हुई। एक सप्ताह बाद जब अनन्दिता ऑफिस आई तो उसके नजर आते ही मैंने पूछ लिया आर यू ओके अनन्दिता, अपनी पलकों को झपकाकर और सिर को हिलाकर बड़ी ही नापी- तोली हुई मुस्कुराहट के साथ अनन्दिता ने हाँ कहा। अनन्दिता मुझे कुछ अपसेट सी लगी इसलिए मैंने उसे कुछ हेल्थ टिप्स दी वही हेल्थ टिप्स जो शोभना मुझे देती है जिसे सुनकर मेरे चहरे पर हँसी आ जाती है , अनन्दिता भी मुस्कुरा उठी। मैं अपने केबिन की ओर बढ़ गया पर न जाने क्यों मेरे कुछ कलीग्स की नजरें अनन्दिता की तरफ थी।
जो चेहरा हमेशा शान्त और सौम्य नजर आता हो और अचानक उस पर एक उदासी भरी फ़िक्र दिखाई दे तो कैसा लगता है कुछ दिनों से मैं देख रहा हूँ कि अनन्दिता कुछ ऐसी ही नजर आ रही है। शायद वो किसी बात को लेकर बहुत परेशान है। वैसे तो किसी की निज़ी जिंदगी में दखल देना सही नही होता है पर अनन्दिता एक अच्छी लड़की है उसे इस तरह परेशान देख मुझे अच्छा नही लग रहा था लेकिन ऐसे कैसे मैं उससे उसकी परेशानी की वजह पूछ सकता हूँ इसलिए अनन्दिता से तो नही पर कल जब नीलम एक क्लाइंट की फाइल लेकर मुझे देने आई तो, तब मैंने बात ही बात में नीलम से अनन्दिता का ज़िक्र किया नीलम शायद अनन्दिता ठीक नही है मुझे लगता है कि शायद वो किसी वजह से परेशान है क्या तुम्हें भी ऐसा लगा। हाँ कुछ फैमली प्रोबल्स की वजह से वो परेशान है बात हुई थी मेरी उससे नीलम ने जवाब देते हुए कहा।
शाम को घर पर डिनर करते वक्त मुझे पता नही क्यों अनन्दिता का ख्याल आ गया आज लंच टाइम में कितनी अपसेट लग रही थी वो। मैंने शोभना को भी अनन्दिता के बारे में बताया शोभना ने कहा प्रॉब्लम्स तो सभी की लाइफ में आती है शोभना की बात सुन मैं खामोश रहा और कुछ सोचने लगा।
शोभना ने कहा तो सही है पर मुझे अनन्दिता की परवाह हो रही है इसलिए अगले दिन ऑफिस पहुंचते ही मैं सीधा जाकर अनन्दिता से मिला बिना कुछ पूछे मैंने उससे कहना शुरू कर दिया प्रॉब्लम्स हमारी लाइफ का हिस्सा है इसलिए ज्यादा परेशान होना सही नही हर प्रॉब्लम का सॉल्यूशन होता है।
ठीक है अनन्दिता। मैं जानता था कि इस समय मेरे कुछ कलीग्स जोकि शोधकर्ता बने हुए थे उनकी शक भारी आंखे मुझ पर टिक्की हुई थी तो भी मैं अनन्दिता से जाकर मिला।
मैं सिर्फ इतना चाहता था कि अनन्दिता अपनी परेशानियों से लड़ना सीखे।
कुछ लोगो की आदत बातें बनाने की होती है बस वही मेरे साथ हुआ। हाँ अनन्दिता मुझे अच्छी लगती है क्योंकि वो अच्छी है मुझे कभी उसमे कोई बनावट नजर नही आई उसके चेहरे से उसकी आँखों में हमेशा सच्चाई ही दिखी है मुझे।
अनन्दिता से मेरा कोई रिश्ता नही न तो दोस्ती का और ना ही किसी और तरह का।कोई हमे उसकी अच्छाई से अच्छा लग सकता है हमे उसकी परवाह हो सकती है इसके लिए किसी रिश्ते का होना जरूरी नही।
आज भले ही भावुकता में आकर शोभना ने मुझसे सवाल किया है पर मैं जानता हूँ कि मुझे उसे कुछ समझाने की जरूरत नही, पत्नी है वो मेरी जोकि मुझे अच्छी तरह जानती है।




