जब भी मेरी लाइफ में कुछ स्पेशल होता है तो अपनी उस खुशी को खुद में समेटने के लिए मैं अक्सर यहां आ जाया करता हूँ। अच्छी जगाहें तो यहाँ और भी है पर मुझे सुकून यही आकर मिलता है। अच्छा लगता है मुझे यहाँ आना, यहाँ
बैठकर इस तालाब के पानी को देखते रहना। किसी के साथ न होते हुए भी उसके पास होने का एहसास होता है मुझे। बस इसलिए हमेशा यही आता हूँ क्योंकि यहां मैं खुदको अकेला
महसूस नही करता स्वरा मेरी यादों से निकल कर मेरे सामने आ जाती है। ऐसा लगता है जैसे कल को याद नही कर रहा हूँ बल्कि आज को जी रहा हूँ।
जरा- जरा सी बात पर रूठ जाने वाला लड़का केशव और हर छोटी सी बात पर अपनी मीठी बातो से मनाने वाली लड़की स्वरा। मिश्रा अंकल कुछ दिनों पहले ही घर खाली कर अपने गाँव लौट गए और सामने वाले घर मे रहने आये नये पड़ोसी।
स्वरा उसके पापा, मम्मी और एक छोटी बहन।
जब घर आमने- सामने हो तो आमना- सामना भी बहुत होता है। मैं जब बाल्कनी में बैठा होता तो कभी तो स्वरा की माँ नजर आती और कभी स्वरा और उसकी बहन हँसी ठिठौली करती दिखती। मैने आजकल अपने रूम में बैठकर पढ़ाई करना बन्द कर दिया था। क्योंकि मुझे लगता है खुले वातावरण में जहाँ शुद्ध हवा आपको छूती हुई जा रही हो वहां बैठकर पढ़ने से दिमाग ज्यादा तेज चलेगा और याद भी अच्छे से होगा। इसलिए मैं आजकल बाल्कनी में बैठकर पड़ता हुँ।
बड़ा मन लगता है यहां बैठकर पढ़ने में।
स्वरा भी कभी- कभी अपनी बहन के साथ बाल्कनी में टहल - टहलकर पढ़ाई करती है। एक दिन में न जाने कितनी दफा मेरी नजर यहाँ वहाँ से होते हुए सामने वाली बाल्कनी पर जाकर ठहर ही जाती है। नए पड़ोसी शायद ज्यादा अच्छे लग रहे है। और ये घर की बाल्कनी भी मुझे अच्छी लगने लगी है।और हाँ बाल्कनी मैं बैठकर पढ़ने का फायदा मुझे जरूर हुआ एक तो इम्तहान अच्छे गए और दूसरा ये की अब हमारे घर की और भी किसी की नजर जरा- जरा पड़ने लगी थी।
अब तो मैं एक अच्छा लड़का साबित होने में कोई कसर नही छोड़ रहा था। माँ जब कपडे सुखाने को डालने आती तो मैं झट से माँ की मदद करने लगता।और अपने छोटे भाई को जबरजस्ती पकड़ पढ़ाने लगता तो कहीं पापा का वो पुराना रेडियो जो कि कई दिनों से बंद पड़ा हुआ है उसे सुधारने लगता। और जब कभी स्वरा की माँ अकेले मार्केट से सामान लेकर आती दिखाई पड़ती तो मैं अक्सर उनकी हेल्प कर देता। अच्छे लड़के सबकी हेल्प करते है संस्कारी होते है।मेरी कई दिनों की मेहनत रंग लाई और स्वरा के दिल में मैंने प्यार की लहर दौड़ाई। और फिर शुरू हुई चुपके- चुपके वाली लव स्टोरी। जिसमे सहायक की भूमिका स्वरा की छोटी बहन ने निभाई। मैं और स्वरा हमेशा तालाब वाले पार्क में मिलते थे मैं हमेशा पहले से जाकर बैठ जाता और उसका इंतज़ार करता और वो हमेशा की तरह देर से आती मैं गुस्सा होकर बैठ जाता फिर वो अपनी प्यारी- प्यारी मीठी - मीठी बातों से मुझे मनाती। मैं जानबूझकर ही जल्दी जाता था ताकि वो मुझे मनाये। रूठना- मनाना तो हम दोनों के बीच चलता ही रहता था पर स्वरा के लिए मुझे मनाना आसान था लेकिन अगर वो रूठ जाए तो उसे मनाना तो मेरे लिए बड़ा ही मुश्किल होता उसे मनाने के लिए मुझे बड़े ही जतन करने पड़ते। एक बार किसी बात को लेकर हम दोनों की छोटी सी लड़ाई हो गई और स्वरा गुस्सा हो गई। मैं सुबह से स्वरा का बाल्कनी में आने का इंतजार करने लगा वो आई तो पर साथ मे उसकी मम्मी भी आई। अब कुछ कहूँ तो कहूँ कैसे वैसे तो हम ईशारों में ही बात करते है लेकिन अभी तो वो मेरी तरफ देख ही नही रही थी मैं बार - बार सॉरी कहने की कोशिश करता पर वो मुझे नजरअंदाज़ कर देती। इसी बीच आंटीजी ने मुझे देख लिया और पूछ लिया की मैं अपने कानों को पकड़े क्यों खड़ा हूँ मुझे कुछ समझ नही आया कि क्या कहूँ इसलिए कह दिया कि ये सॉरी योगा है मुझे मेरे एक सर ने बताया था बस कहकर जल्दी से कमरे में आ गया। स्वरा को तो बड़ा मज़ा आया। पर नाराज़ वो अभी भी थी। फिर मैंने एक तोफा लिया और हमारी सहायक यानी स्वरा की बहन के हाथों स्वरा तक पहुँचा दिया जब स्वरा रेड दुप्पटा गले मे डाले बाल्कनी में आई तो मैं समझ गया कि रूठी छोरी मान गई। फिर से हम दोनों की ईशारों- ईशारों वाली बातें शुरू हो गई। हम दोनों ही इस वक्त नादान थे न स्वरा ज्यादा समझदार थी न ही मैं। एक दिन स्वरा के पापा ने मुझे और स्वरा को ईशारों में बातें करते देख लिया और फिर वही हुआ जो होता है हीरोइन के पिता को ये रिश्ता कतई मंजूर नही होता वो अपना तबादला करवा लेते है और शहर छोड़कर चले जाते है और साथ मे हीरोइन को भी ले जाते है और हीरो अकेला रह जाता है मेरी तरह। स्वरा के पापा हमेशा के लिए शहर छोड़कर चले गए। मुझे मेरे घर वालो ने आगे पढ़ने के लिए मामा के घर पहुंचा दिया। और ये रिश्ता अधूरा रह गया। सात साल बाद वापस लौटा हुँ जब मैं अपने एग्जाम में पास हुआ था तो स्वरा दो चॉकलेट लाई थी एक तो पूरी उसके लिए और एक मेरे लिए जिसमे से भी आधी उसी ने खाली थी। वो ऐसे ही करती थी। इसलिए अभी भी अपनी किसी भी सफलता के बाद मैं यहाँ आता हूं दो चॉकलेट लेकर ।

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