हो रही कैसी ये अर्ज़ियां दिल चाहता है ये मेरा मनमर्जियां
आज की सुबह बड़ी ही अलग लग रही है ऐसा लग रहा है जैसे कई दिनों बाद आज सुबह हुई हो इस सुबह का एहसास ही बड़ा नया सा और खुशी भरा है। मन झूमकर नाचने को कर रहा है पर क्योंकि समय पर बस स्टॉप पहुँचना है तो अभी के लिए नाचना केंसिल। मैं तो बस स्टॉप पहुँच गई पर ये दोनों न जाने कहाँ रह गई। ट्रिप पर जाने वाले सारे स्टूडेंट्स आ गए है और इन दोनों का कुछ पता ही नही है। ये लो आ गई रिया और दिया। हम तीनों ही बेस्ट फ्रेंड्स है हमेशा साथ मे रहते है ऐसी कोई भी बात नही होगी जो हमारे बीच छुपी हो हम हर बात एक दूसरे से शेयर करते है।
अरे बस आ गई चलो दिया ने जोर से कहा। हम तीनों बस में चढ़ गए। ऐसा होता है ना के जब हम बस से या ट्रेन से सफर कर रहे होते है तो हमें विंडो वाली सीट ही चाहिए होती है इसलिए मैं झट से आगे बडी और विंडो वाली सीट पर जा बैठी। दिया मेरे बगल में बैठ गई और रिया हमारे आगे वाली सीट पर और हमारा सफर शुरू हो गया। वैसे इस ट्रिप पर आना मेरे लिए आसान नही था हर बार की तरह इस बार भी मम्मा ने साफ इनकार कर दिया था सभी पैरेंट्स की तरह मम्मा को भी मेरी बहुत फिक्र रहती है इसलिए वो आसानी से किसी भी बात के लिए परमिशन नही देती है। पर मेरा तो बहुत मन था इस ट्रिप पर आने का इसलिए मैंने तो कोशिश की ही साथ मे रिया,दिया ने भी अच्छी- अच्छी , मीठी- मीठी
बातें की मम्मा को मनाने की और फाइनली मम्मा मान गई।
जब कॉलेज स्टूडेंट्स साथ मे किसी सफर पर जा रहे हो तो
क्या वो सफर बोरिंग हो सकता है। बिल्कुल नही।
लास्ट सीट पर बैठे हुए गौरव और अवनीत ने अपनी गिटार बजाना शुरू कर दी है बाकी सब अपने अलग - अलग सुर के साथ एक ही गाने को साथ मे गा रहे है पर कुछ ऐसे भी है जो गा तो नही रहे पर इस आगे पीछे लगते सुर वाले गाने में कहीं
खो से जा रहे है। ये एक- दो जोड़िया है हमारे क्लास की जो एक दूसरे को देखे जा रहे है और धीमे- धीमे मुस्काये जा रहे है। और हमारी दिया वो उन्हें छेड़े जा रही है उसे बड़ा ही मज़ा आता है हमारे कपल्स को परेशान करने में। क्या करें ये थोड़ी शैतान ज्यादा है। ये कॉलेज लाइफ बड़ी ही दिलचस्प होती है
शायद इसलिए कि इस वक्त हमारी उम्र भी जरा कच्ची होती है। इस वक्त हम थोड़े समझदार थोड़े नादान से होते है। सब कुछ नया- नया और मन को बड़ा अच्छा लगता है क्योंकि हम स्कूल से कॉलेज में आ जाते है जहां हमे अपने मन का करने की थोड़ी आजादी सी मिल जाती है। हमारे मन में ख्वाइशें जगह लेने लगती है दिल दिमाग मे बहुत कुछ चलता रहता है करिअर को लेकर लाइफ को लेकर। ख्वाइशों को पंख लगने लगते है जिस पर बैठ कर दिल उड़ान भरने लगता है। कुछ हासिल करने के लिए। ये मनमर्ज़ियों का दौर होता है जहां हम सुन भले ही सबकी ले पर करना अपने मन का चाहते है
जो चाहे वो सपने बुनते है उनके पूरे होने उम्मीदे करते है
दोस्ती और यारियों का एक अलग ही रस घुलता है जिसमे शैतानियां शरारते मौज- मस्ती और खुराफातों का मिश्रण होता है जिसका स्वाद खट्टा- मीठा होता है।
कुछ नए एहसास कुछ अलग से जज्बातों का सामना होता है। दुनिया नई- नई और प्यारी सी लगती है। हमारा दिल खुशियों के पीछे दौड़ने लगता है जो मन चाहता है हम वही करने लगते है सूरज की रोशनी से चमकती सुबह ढलती शाम फूलो की खुशबू अच्छी लगने लगती है किताबों से भी दोस्ती हो जाती है वो भी सच्ची लगने लगती है।
जब सबका साथ हो तो चाहे सफर कितना भी लम्बा हो वो छोटा हो जाता है हम आ पहुँचे है एक बड़ी ही खूबसूरत जगह। ऊँचें - ऊँचे पहाड़ खूबसूरत नज़ारे और हाँ ये हसि वादियाँ सब कुछ मन को बड़ा ही खुश किये जा रहा है यहां- वहां घूमघूम कर हम तीनों ने एक दूसरे की और इस खूबसूरत नेचर की कई सारी फोटोज ली है। यहां ऊँचाई पर खड़े होकर हमने एक दूसरे का नाम भी जोर से चिल्लाया सच मे आवाज लौटकर आई। दिया , रिया , अनन्या ।
यहां आकर मैंने अपनी फ्रेंड्स के साथ खूब इंजॉय किया।
अब लग रहा है अच्छा हुआ कि थोड़ी ज़िद करके मैं इस ट्रिप पर आ गई वैसे अपने मन का करना वाकई मैं बड़ा अच्छा लगता है ये हमे खुशी देता है आज सुबह से लेकर शाम तक मैंने सिर्फ अपने मन की सुनी अपने मन का किया बड़ा ही सुकून महसूस हो रहा है इसलिए अगर थोड़ी मनमर्जियाँ कर ली जाए तो कोई बुराई नही है। हम सबकी सुनते है सबका कहा करते है पर कभी मन की भी सुन लेनी चाहिए मन का कहा कर लेना चाहिए। ये जो दिल है बस थोड़ी आजादी चाहता है खुलकर अपनी ख्वाइशें के लिए जीना चाहता कुछ तमन्नाएँ करना चाहता है कुछ नए रंग भरना चाहता ये मनमर्जियाँ करना चाहता है।
शाम ढल गई और सब वापस बस में आ बैठे गौरव और अवनीत ने फिर से अपनी गिटार थाम ली सब मिलकर एक सुर में गाना गुनगुना रहे थे बड़ा अच्छा लग रहा था ढलती शाम गिटार की धुन और छिड़ता तराना।
हो रही कैसी ये अर्ज़ियाँ दिल चाहता है
ये मेरा मनमर्जियाँ ।
ख्वाइशें बन गई के जैसे तितलियाँ
धड़के है दिल के जैसे बिजलियाँ
करने लगे है हम बेवकूफियाँ
होने लगी आजकल गलतियाँ
नई सी लगने लगी है ये दुनियाँ
शुरू जब से हुई है ये मनमर्जियाँ
मनमर्जियाँ हाँ मनमर्जियाँ।

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