थोड़ी सी समझ




भीड़ को पीछे छोड़ते हुए अपने लक्ष्य को सामने रखते हुए बड़ी जद्दो जेहद के बाद आखिर मैं ट्रेन में चढ़ ही गया। यहां एक सेकेंड की भी देरी का मतलब पूरा एक घन्टे का इंतजार शुक्र है की मुझे ये इंतजार नही करना पड़ा। मेरी मंजिल यानी अगला स्टेशन आ गया और मैं गाड़ी से उतर गया। मैं कुछ कदम ही आगे बढ़ा की मेरी नजर प्लेटफॉर्म की लम्बी वाली कुर्सी जो यात्रियो के लिये है उस पर बैठे एक यात्री पर पड़ी बगल में एक सफर बैग रखा हुआ हाथ में एक बुक लिए ये नीलिमा है मेरे कदम ठहर गये मन किया नजर भर कर देख लुँ। नीलिमा ने भी मुझे देख लिया और कुछ पल उसकी नजरे मुझ पर ठहरी भी पर फिर उसने अपनी नजरे फेर ली ठीक वैसे ही जैसे हम किसी अजनबी को देख नजरे फेर लेते है। तब मेरे कदम चल पड़े मैं स्टेशन के बाहर आया टेक्सी ली और होटेल पहुँचा। आठ महीने बाद नीलिमा को देखा उसकी उड़ती जुल्फें अभी भी उसकी आँखों पर पड़ रहीं थी ठीक वैसे जब मैं पहली बार नीलिमा से उसके घर मिलने गया था वो मेरे सामने बैठी थी और तब बार- बार उसकी जुल्फे उसकी आँखो पर पड़ रही थी।और वो अपने हाथो की उंगलियो से अपनी जुल्फों को कान के पीछे किये जा रही थी हम दोनो की अरेंज मैरेज थी शुरुआत के दिनों की बात है नीलिमा ज्यादा बाते तो नही करती थी पर एक बार उसने मुझसे कहा था कि रिश्ते आपसी समझ और विश्वास पर टिके होते है तब मैंने मुस्कुराते हुए कहा था हाँ बिल्कुल सही है। हम दोनो एक दूसरे के साथ से खुश थे बहुत ही कम वक्त में नीलिमा ने मुझसे जुड़ी सारी बाते जान ली थी मेरी आदते मेरी पसन्द सब कुछ। हम दोनो के बीच प्यार तो था बस समझ की कमी रह गई।
शादी को तीन साल होने जा रहे थे कुछ दिनों से नीलिमा ऑफिस से लेट आ रही थी उसने मुझे बता दिया था के अभी ऑफिस में काम ज्यादा है इसलिए सभी एक्सट्रा टाइम दे रहे है। ऑफिस के इस एक्सट्रा टाइम की वजह से नीलिमा मुझे टाइम नही दे पा रही थी। कुछ दिनो तक तो सब ठीक रहा पर बाद में मुझे जरा बुरा लगने लगा और ऐसा होता ही है जब हमारा अपना हमे वक्त नही दे पाता तो हमारे मन में उसके लिये नाराजगी आ ही जाती है। और कुछ वक्त से तो ऐसा लग रहा है जैसे नीलिमा कुछ बदल सी गई है उसे मेरी कोई फिक्र ही नही है पहले तो उसे मेरी छोटी से छोटी बात का ख्याल रहता था लेकिन आजकल उसे
मेरी कही बाते भी याद नही रहती। हम दोनो के बीच  दूरियां अपनी जगह बना रही थी।
मेरे नाराजगी भरे मन ने न जाने कितनी बाते सोचली
और ये मान लिया की नीलिमा मुझसे दूर हो रही है।
शायद उसके मन में मेरे लिए प्यार कम हो गया है।
और आखिर एक दिन मेरे मन की नाराजगी बाहर आ ही गयी नीलिमा और मैं साथ में डिनर कर रहे थे अभी मौसम जरा ठीक नही चल रहा था तो इसी को लेकर नीलिमा मुझसे कहने लगी
ये मौसम का भी कोई भरोसा नही है कभी भी बदलता रहता है , मौसम का क्या कहे आजकल तो अपने भी बहुत जल्द बदल जाते है उन्ही को समझना मुश्किल है फिर ये तो मौसम है मैंने नीलिमा से रूखे अंदाज़ में कहा। वो हैरान निगाहों से मुझे देखने लगी क्या हुआ कोई बात है नीलिमा ने मुझसे पूछा।
बात हो भी तो क्या मैंने फिर तीखे अंदाज़ में कहा। इसके बाद मेरे अंदर भरा गुस्सा बाहर आ गया मैं लगातार अपने कड़वे शब्दो का प्रहार नीलिमा पर करता गया नीलिमा ने कुछ नही कहा वो सुनती रही
ये रात मेरे और नीलिमा के लिए बड़ी ही मुश्किल रही
न उसे नींद आई और ना मुझे। सुबह जब हॉल में आया तो नीलिमा अपना बेग लिए नजर आई
हम दोनो ने ही अपने रिश्ते में समझदारी नही दिखाई
कुछ वक्त अलग रहेंगे तो शायद ये मालूम हो जाये कहाँ गलती हुई कुछ दिन का सफर है मंजिल मेरी अपना घर है नीलिमा ने कहा और वो चली गई।
मुझे इस बात का एहसास हो गया है की गलती हम दोनो से ही हुई नीलिमा अपने ऑफिस वर्क में  इतना ज्यादा व्यस्त हो गई के उसे हमारे बीच आती दूरियां नजर ही नही आई और मैं ना समझ भी नही समझ पाया की नीलिमा अगर अभी बिज़ी है अगर वो मुझे वक्त नही दे पा रही तो इसका मतलब ये नही की उसे मेरी परवाह नही है।
सब कुछ याद कर मेरा मन बेचैन हो रहा है नीलिमा ने जाते वक्त कहा था मंजिल उसकी अपना घर है बस ये याद आते ही मैं बिना मीटिंग अटेंड किये झट से दौड़ पड़ा टेक्सी वाले भैया को जल्दी स्टेशन चलने को कहा साँसे तेज - तेज चल रही है नीलिमा क्या अभी भी वहीं होगी मेरे दौड़ते कदम सीधे वही रुके प्लेटफॉर्म के पास। नीलिमा यही है शायद वो मेरा इंतजार कर रही थी मैंने नीलिमा को सॉरी कहा और वो रोते हुए मेरे गले लग गई।
हर एक रिश्ता परफेक्ट है चाहिए तो बस थोड़ी सी समझ।😊







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