ठंड का मौसम सुबह के 6 बज रहे थे। ज़ोर- ज़ोर से बजता अलार्म मुझे नींद से जागने को कह रहा था पर नींद है की मेरी आँखो में और गहराये
जा रही थी सुबह-सुबह ठंड में रज़ाई से बाहर आने के की हिम्मत करना बिल्कुल ऐसा ही लगता है जैसे मानो हम किसी जंग पर जा रहे हो जहाँ बहुत सोच समझकर हम अपना कोई भी कदम आगे बढ़ाते है। अभी मुझे भी कुछ- कुछ ऐसा ही लग रहा था। बजते अलार्म का असर मेरे कानो पर तो हो रहा था पर आँखो पर बिल्कुल नही। नींद इतनी ज्यादा आ रही थी के उठने का मन ही नही हो रहा था। वैसे भी ठंड के मौसम में जल्दी कौन उठना चाहता है। एक तरफ अलार्म और दूसरी तरफ मेरी ये सुबह की नींद ऐसे में मैंने अपने मन की बात मानना ही ठीक समझा। मैं खुद को सिकोड़कर जोर से आँख बंद कर सो गया। पर अलार्म अभी भी बज रहा था अब मुश्किल ये सामने थी की मुझे इसे बंद करना था जिसके लिए ठंड में रज़ाई से हाथ बाहर निकालना मुझे बहुत ही बड़ा काम लग रहा था ऐसा लग रहा था जैसे बाहर बर्फ पड़ रही हो और अगर मैंने हाथ बाहर निकाला तो मेरा हाथ ठंड से जम ही जायेगा। पर अलार्म तो बंद करना था इसलिए मैंने बड़ी हिम्मत कर धीरे से पहले अपना थोड़ा हाथ रज़ाई से बाहर निकाला ये पता करने के लिये की ठंड ज्यादा है या बहुत ज्यादा। वैसे ठंड तो महसूस हो रही थी पर मैंने झट से हाथ आगे बढ़ाया अलार्म बंद किया और हाथ को वापस रज़ाई के अंदर कर आराम से सो गया।
एक घन्टे बाद मेरी आँख खुली मन तो अभी भी नही था उठने का, पर उठना पड़ा क्योंकि ऑफिस जो जाना था। फर्श पर पैर रखते ही ऐसा लगा जैसे मैंने बर्फ पर अपना पैर रखा हो, बहुत ही ठंडा था। मैं जैसे - तैसे
उठ तो गया पर अभी एक और हिम्मत का काम बाकी था। वो है नहाना। ठंड के मौसम में ये बहादुरी वाला काम हर कोई नही कर पाता। पहले तो मैं कुछ देर पानी को देखता रहा और फिर जोर से आंखे बंद कर मैंने जल्दी -जल्दी अपने ऊपर पानी डाल लिया ठंड से ऐसे कपकपाया के क्या कहुँ। नहाने के बाद
तैयार होते वक्त मैं खुद को ऐसे घमंड से आईने मैं देख रहा था जैसे मैंने ठंड पर फतेह हासिल की हो। और फिर अपना मोटा वाला कोट पहन हाथो में ग्लब्स डाल
सर से लेकर पैर तक खुद को पूरी तरह ढककर ताकि मुझे ठंडी हवा छु भी ना पाये, मैं अपनी गाड़ी लिए ऑफिस के लिए निकल गया। मेरी गाड़ी सीधे जाकर रुकी चाय की होटल के पास। जी हाँ चाय की होटल।
मैं रोज यहाँ रुककर चाय के साथ -साथ गर्मा गर्म समोसों का आनन्द लेता हुँ और उसके बाद ऑफिस जाता हूँ। एक यही तो है जो मुझे ठंड में अच्छा लगता है। ठंड का मौसम अदरक वाली चाय
और गर्मा- गर्म चटपटा नाश्ता ये मिल जाये तो भई दिन बन जाता है।

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