जिसे देखनो को आँखे तरस रही हो और वो अचानक सामने आ जाये तब कैसा महसूस होता है ये बता पाना थोड़ा मुश्किल है। देविका मेरे सामने है उसने मुझे देख भी लिया है बस कुछ कह नही रही। बल्कि उसने तो अपनी नजरे ही फेर ली।
बिना बताये बिना कुछ कहे देविका मेरी जिंदगी से दूर चली गई। मैंने उसके दोस्तो से उसके बारे में जाननाचाहा पर किसी ने कुछ नही बताया। वो मुझसे नाराज थी खफा थी पता नही। लेकिन शायद उसे मुझ पर भरोसा नही था। इसीलिए तो मेरी शादी की बात जोकि किसी और से उसे पता चली वो जानते ही वो
मुझे छोड़कर चली गई बिना सच को जाने।
आज दो साल बाद हम मिले है देविका तो कुछ नही कह रही पर मैं चुप नही रह सकता लेकिन अभी अपने ऑफिस के दोस्तो के सामने कुछ कह भी नही सकता।
बस अगले स्टेशन का इंतजार है।
अगले स्टेशन पर जब गाड़ी रुकी और देविका जैसे ही गाड़ी से उतरी मैं भी फ़ौरन उसके पीछे चला गया।
देविका आगे- आगे और मैं उसके पीछे - पीछे। वो एक टी- स्टॉल के पास रुकी। वो कुछ कहती उसके पहले मैं बोल पड़ा भईया दो ग्लास चाय देना। एक ग्लास मैंने अपने हाथ में लिया और दूसरा ग्लास देविका के हाथ में थमाया। हम दोनो उस लंबी सी चियर पर जाकर बैठ गये जो स्टेशन पर यात्रियों के लिए होती है। आज बिल्कुल वैसी स्थिति थी जैसी उस दिन मॉल
में थी। बात तो करना चाहते है पर शुरू कैसे करे ये समझ ही नही आ रहा था ज्यादा ना सोचते हुए मैंने ही
बात करना शुरू किया।
कैसी हो , उसने कहा- ठीक हूँ। और तुम ?
मैंने कहा मैं भी बढ़िया हूँ।
देविका ने दबी सी आवाज में पूछा - और तुम्हारी वाइफ।
ये सुनते ही मैं पहले तो समझ ही नही पाया की मैं इसे
क्या कहूँ पर फिर मैंने कह दिया हाँ ठीक है।
देविका को देखकर लग नही रहा था की उसकी शादी हो गई है पर फिर भी मैंने जानने के लिए उससे पूछ लिया तुमने शादी की या नही ये पूछते वक्त मन में एक घबराहट सी भी हो रही थी पर जब देविका ने कहा - नही।
ये सुनकर मन में खुशी की एक लहर सी दौड़ गई
पर देविका खुश नजर नही आ रही थी
इसके बाद देविका ने मुझसे एक और सवाल किया
बहुत ही हिचकिचाते दबी-दबी आवाज में उसने मुझसे
पूछा- तुम्हारी वाइफ बहुत खूबसूरत है।
मैंने कहा हाँ वो बहुत खूबसूरत है झील सी गहरी आँखे, सुनहरे बाल और बड़ी प्यारी सी उसकी मुस्कान।
देविका का चेहरा देखने लायक था ऐसा लगा जैसे उसे कुछ खास अच्छा नही लगा मेरी बाते सुनकर। इसके बाद तो मैंने जमकर अपनी वाइफ की तारीफ करना शुरू कर दिया।
ट्रेन चलने वाली थी देविका ने मुझे टोकते हुए कहा बस- बस बहुत है ट्रेन चलने वाली है चलते है।
हम जाकर वापस गाड़ी में बैठ गये। देविका उदास सा चेहरा बना चुपचाप बैठी हुई थी शायद मन ही मन कुछ सोचे जा रही थी उसका उदास चेहरा मुझे बिल्कुल अच्छा नही लग रहा था पर क्या करूँ दो साल तक मैं भी तो कितना परेशान रहा उदास रहा।
इसलिए इसे थोड़ा परेशान करना तो बनता है।
मैंने आने बहाने कर अपने दोस्त से अपनी जगह बदल ली। अब मैं देविका के बिल्कुल सामने बैठा हुआ था।
देविका की आँखो में मेरे लिए गुस्सा साफ नजर आ रहा था। मैं बस इस इंतजार में था की वो अपनी नाराजगी मुझ पर जताये। पर वो चुप रही। सफर खत्म होने वाला था ट्रेन कानपुर पहुँचने वाली थी।
ट्रेन के रुकते ही यात्री उतरना शुरू हो गये हम सब प्लेटफॉर्म पर थे देविका मुझसे बिना कुछ कहे चली जा रही थी मैंने उसका हाथ पकड़कर उसे रोक लिया
और कहा- पहले भी ऐसे ही बिना बताये मेरी लाइफ से चली गयी थी अभी भी बिना कुछ कहे जा रही हो।
मुझसे जिसकी इतनी तारीफ सुनी क्या एक बार उसकी फोटो भी नही देखोगी। मैंने अपने पॉकेट में से पर्स निकाला और देविका को पर्स में लगी फोटो दिखाई। देविका की आँखो से मोटे- मोटे मोती के जैसे आँसू छलकने लगे। मेरे पर्स में किसी और की नही बल्कि उसी की ही फोटो है। मैंने उससे कहा - कभी भी पूरी बात जाने बिना या सच को जाने बिना हमे कोई भी बड़ा फैसला नही लेना चाहिए।
मैंने किसी से शादी नही की। हाँ बस मेरे घर वाले मेरी शादी के लिए सोच रहे थे। लेकिन फिर मैंने देविका के बारे में अपने घर में सबको बता दिया था और उन्हें हमारे रिश्ते से कोई एतराज नही था पर ये बात मैं देविका को बता ही नही पाया क्योंकि उससे पहले ही वो जा चुकी थी।
और आज जाकर मिली है मैंने उसे सारी बात बता दी है देविका को इस बात का एहसास हो गया है की
उसे इतनी जल्दी फैसला नही लेना चाहिए था। उस वक्त मुझे इस बात से ज्यादा दुख पहुँचा था की उसने मुझ पर भरोसा क्यों नही किया। सोचा था जब भी मिलूँगा खूब गुस्सा करूँगा पर नही कर सका।
देविका को देखते ही सब भूल गया।
मैं खुश हूँ आखिर देविका और मैं फिर मिल गये।

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