ये कहानी मयंक की है मयंक की पत्नी का नाम दिशा हैऔर इन दोनो की एक बेटी भी है जिसका नाम है
निमिशा।
निमिशा नाम से मयंक की कुछ खास यादे जुड़ी है।
ये कहानी यँहा से शुरू हुई थी।
आज की सुबह बड़ी अलग सी लग रही थी धीरे-धीरे
ठंडी-ठंडी हवा मयंक को छूते हुए गुजर रही थी।
सड़क पर सब कुछ एक दम शांत सा नजर आ रहा था
बस पक्षियों की आवाज ही सुनाई दे रही थी जो कि
कानो को मधुर लग रही थी पेड़ो की पत्तिया भी होले-
होले डोल रही थी ऐसा लग रह था जैसे
वे खुशी से मुस्कुरा कर मयंक की ओर ही देख रही हो
ये सारा नजारा मयंक के लिए बडा ही आनन्दित
कर देने वाला था। सूरज की किरणे भी तपिश नही
बल्कि सुकुन दे रही थी वैसे मयंक को लग रहा था कि
सूरज भी शायद आज जल्दी निकला है लगे भी क्यों
न आखिर आज पहली बार वो जल्दी उठा था वो भी
छे बजे। नही तो जनाब रोज दस बजे के बाद ही उठते
है पर क्या करे प्यार की खातिर सब करना पड़ता है।
जल्दी उठना भी पड़ता है।
दरसल दिशा ने मयंक से कहा था की वो सुबह जल्दी
उठकर वॉक पर जाये।ये हेल्थ के लिये अच्छा होता है।
अगर उसने ऐसा नही किया तो वो उससे बात नही
करेगी। मयंक करता भी क्या दोस्तो को तो नाराज
किया भी जा सकता है पर प्रेमिका को नाराज बिल्कुल
नही किया जा सकता। इसलिए दिशा की बात को
मानते हुए आज मयंक जल्दी उठा भी और वॉक पर गया भी। वॉक के बाद मयंक एक पार्क मे जा बैठा।
जहा और भी कई लोग थे मयंक की नजर वही
पार्क में टेहल रही एक लड़की पर पड़ी जो एक
आंटी के साथ टेहलते हुए खूब बाते किये जा रही थी
काफी खुश लग रही थी
पता नही पर उस लड़की में कुछ तो ऐसा खास था
जिसकी वजह से मयंक की नजरे उस लड़की की ओर
जा रही थी। दिशा जैसी तो नही दिख रही थी वो और
ना ही जानी पहचानी थी फिर भी उसे देख मयंक को
ऐसा महसूस हो रहा था जैसे कोई अपना हो।
कुछ देर बाद वह लड़की मयंक जँहा बैठा था उसी
जगह आकर बैठ गई। पार्क की जो और सीटे थी वे
खाली नही थी इसीलिए शायद वह यंहा आकर बैठ
गई। वह जिन आंटीजी से बात कर रही थी वे अपनी
हम उम्र महिलाओं के साथ पार्क से जा रही थी। जाते-
जाते उन्होंने कहा बाय निमिशा
निमिशा।उस लड़की का नाम निमिशा था उसने भी
आंटीजी को मुस्कुराते हुए बाय कहाँ।
निमिशा नाम मयंक ने पहले कभी नही सुना था पर उसे ये नाम अच्छा लगा। निमिशा मयंक के बगल में
चुपचाप बैठी थी पर उसके चेहरे पर जो चमक थी वह
सूर्य की किरणों से भी तेज थी। मयंक निमिशा की ओर
देख रहा था शायद कुछ पूँछना चाह रहा था पर
फिर कुछ सोचकर उसने कुछ नही कँहा और दूसरी ओर देखने लगा।
निमिशा मन की बात जानने में माहिर थी उसने मयंक
की ओर देख लिया था सो खुद ही बोल बैठी। आप
कुछ कहना चाह रहे है।
मयंक ने लड़खड़ाये शब्दो में कहा जजी नही , नही,जी
हाँ,मेरा मतलब है हाँ। वो मैं आपको काफी देर से देख
रहा हूं आप बोहोत खुश नजर आ रही है क्या आप
हर वक्त इतनी खुश रहती है।
निमिशा ने हस्ते हुए कहा- क्यों क्या कोई हर वक्त
खुश नही रह सकता।
मयंक ने जवाब देते हुए कहा- मेरे ख्याल से नही।
निमिशा ने ज्यादा सवाल -जवाब ना करते हुए सिर्फ
इतना कहा-हो सकता हैं आप सही हो।
निमिशा ने अपनी घड़ी में टाइम देखा और वह
उठकर जाने लगी।
तभी मयंक ने कहा आप से मिलकर अच्छा लगा
निमिशा जी। निमिशा पलटी और मयंक फिर बोल
पड़ा वो आंटीजी को आपका नाम लेते हुए सुन लिया
था।
वैसे मेरा नाम मयंक है।
निमिशा ने कुछ नही कहा जरासा मुस्कुराई और चली
गई।
अगली सुबह जब निमिशा पार्क में आई तब मयंक
वँहा पहले से ही मौजूद था वो वही बैठा था जँहा कल
बैठा हुआ था। निमिशा भी पार्क में थोडा टेहलने के
बाद मयंक के पास जा बैठी। बैठते ही निमिशा ने पूछा
आज भी आपको कुछ कहना है। मयंक ने कहा नही
वैसे क्या आप यहाँ रोज आती है।
निमिशा ने सर हिलाते हुए हाँ कहा। फिर दोनो के बीच
बाते शुरू हो गई। कभी यहाँ की तो कभी वँहा की। अब दोनो रोज पार्क में मिलने लगे थे। वे इस तरह
घुलमिल गये थे जैसे की सालो से एक दूसरे को जानते हो। मयंक को निमिशा का हमेशा मुस्कुराकर बोलना अच्छा लगता था। निमिशा का सिर्फ चेहरा ही
खूबसूरत नही था उसका मन भी खूबसूरत था। कुछ ही दिनों की मुलाकात में दोनो एक दुसरे के मन की
बातो को समझने लगे थे। अब मयंक निमिशा को
निमिशा जी नही सिर्फ निमिशा कहकर पुकारता था।
निमिशा को शायरी पढ़ने का बडा शौक था वो मयंक को रोज कुछ ना कुछ सुनाती मयंक गंभीर होकर सुनता और फिर दोनो साथ में हँसते।
पर इन सबके बीच क्या मयंक किसी को भूल रहा था।
दिशा। कहीं वो दिशा को भूल तो नही गया था।
निमिशा और मयंक को साथ देख ऐसा ही लगता था
की शायद मयंक दिशा को भूल ही गया है।
मयंक और निमिशा का रिश्ता दोस्ती से कुछ ज्यादा आगे बड़ गया था।
आज भी मयंक रोज की तरह पार्क में बैठ कर निमिशा
का बेसब्री से इंतजार कर रहा था। शायद आज कुछ खास था।
निमिशा जैसे ही आई मयंक ने तुरन्त उसे
आवाज लगाई। निमिशा ने मयंक की ओर देखा और
प्यार से मुस्कुराते हुए मयंक के पास आई। और पास
आते ही खुशी से गले लग गई। और फिर तीनो साथ
बैठकर बाते करने लगे।
हाँ तीनो निमिशा,मयंक और दिशा। यही तो खास था
आज। निमिशा जिसके गले लगी वह दिशा ही थी निमिशा कब से दिशा से मिलना चाहती थी। और
आज मिल ही ली। मयंक ने दिशा के बारे में निमिशा
को पहले ही बात दिया था। और दिशा भी मयंक और
निमिशा की दोस्ती के बारे में अच्छी तरह जानती थी।
मयंक और निमिशा का रिश्ता दोस्ती से ज्यादा तो था
पर प्यार का नही था मयंक का प्यार तो दिशा ही है।
आज तीनो बोहोत खुश है खासकर निमिशा वो मयंक
और दिशा को साथ में देखना चाहती थी। निमिशा ने
मुस्कुराते हुए मयंक और दिशा से कुछ कहा- तुम ऐसे ही हमेशा साथ रहना
ज़िन्दगी का हर पल खुशी से
जीना कभी अगर हम मिल न
पाये तो उदास न होना बस
मुस्कुराकर एक बार याद कर
लेना यादो में ही मिल लेना।
ठीक है। इतना कहकर निमिशा हसने लगी।
मयंक उस समय निमिशा की बातो को समझ नही
पाया था उस दिन वो काफी देर तक पार्क में रुके थे
उस दिन के बाद भी निमिशा और मयंक की कुछ दिनों
तक मुलाकात होती रही। मयंक को तो अब मोर्निंग
वॉक की आदत ही पड़ गई थी। और निमिशा से
मिलने की भी।
लेकिन पता नही क्यों अभी दो दिनों से निमिशा पार्क में
टहलने नही आ रही थी मयंक काफी देर उसका
इंतजार करता और फिर चला जाता। मयंक को फिक्र
भी हो रही थी के निमिशा कही बीमार तो नही हो गई।
मयंक ने उन आंटीजी को देखा जो निमिशा के साथ
टेहला करती थी। उसने उनसे निमिशा के बारे में पता
किया।
उन्होंने जो बताया वह सुन मयंक के दिल को धक्का
सा लग गया। वह कुछ समझ नही पा रहा था के वह
क्या करे। उसने दिशा को फोन कर बुलाया और वे
दोनो हॉस्पिटल पोहोच गये। दूसरी मंजिल के रूम
नम्बर 11 में जैसे ही वे गये उन्होंने देखा हमेशा
मुस्कुराने वाली निमिशा आज चुपचाप बेड पर लेटी
हुई थी।कुछ भी नही कह रही थी सिर्फ देख रही थी
मयंक की आँखो से आँसू बहे जा रहे थे दिशा मयंक को सम्हाल ने की नाकाम कोशिश कर रही थी।
मयंक ने निमिशा का हाथ थामे हुआ था निमिशा ने
मयंक की ओर देखते हुए मयंक से कहाँ- उदास ना
होना बस मुस्कुराकर एक
बार याद कर लेना। ये निमिशा के आखरी शब्द थे जो
की उसने अभी भी मुस्कुराकर कहे थे।
निमिशा ने कभी भी मयंक को इस बात का पता नही
चलने दिया था की उसे एक गम्भीर बीमारी और उसकी जिंदगी कुछ दिनों की ही है।
निमिशा मयंक के जीवन का एक एहम हीस्सा थी जिसे
मयंक कभी नही भूल सकता।
निमिशा बहुत ही कम समय के लिए मयंक के जीवन
में आई थी। और बस यादो में ही रह गई ।

Nice 😋
ReplyDeleteHeart touching story
ReplyDeleteThankyou so much
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