हर पल ये सोचते हुए की अब वक्त बदलेगा , वक्त ही गुजर गया पर कुछ नही बदला जो जैसा था वो वैसा ही रहा ,हालात भी वैसे ही है कुछ भी तो नही हुआ, शायद ये सोचना ही गलत था मेरा, की वक्त बदलेगा वक्त नही बदला पर वक्त ने मुझे बदल दिया। मुड़ ऑफ था किसी काम मे मन भी नही लग रहा था तो टेरिस पर चला आया। सच मे ऊँचाई पर आकर जब नीचे की ओर देखते है ना ,तो सब कुछ बहुत छोटा नज़र आता है इतना छोटा की कभी - कभी तो नज़र ही नही आता। पर इसका मतलब ये नही की वो है नही, वो होता है पर जो ऊँचाई पर है उसे वो दिखाई नही देता या ये कहे कि वो देखना नही चाहता क्योंकि उसकी नज़र में वो खुद सबसे बड़ा बन जाता है।
एक साल पहले जब कॉल आया - हेलो, येस आई एम अपूर्व जोशी येस ओह! ओके थैंक्यू कुछ इस तरह बात हुई थी मेरी और फाइनल इंटरव्यू हुआ और मैं सिलेक्ट हो गया। बड़ी कोशिशों के बाद जब कुछ मन चाहा मिल जाये तो पाँव जमीं पर कहाँ पड़ते है वो तो हवाओं से बात करने लगते है मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही था। लंबे इंतजार के बाद मैंने एक बड़ी कम्पनी में वो पोस्ट हासिल की थी जो मैं चाहता था। अब हर दिन मेरा बिजी था मैं मन लगाकर अपना काम कर रहा था जो भी प्रोजेक्ट, टास्क मुझे दिये जा रहे थे मैं उन्हें वक्त से पहले कम्प्लीट कर रहा था काफी कम वक्त में मैं बहुत तेज़ी से सिख रहा था। मेरी इस ग्रोथ से सब सरप्राइसड़ थे इतनी जल्दी बहुत कुछ सिख लिया है तुमने मेरे सीनियर ने मुझसे कहा, अपनी तारीफ सुनकर मैं मुस्कुरा दिया। जब मैं कॉलेज में था तब अपने पड़ोस में रहने वाले विक्की भईया से बड़ा इम्प्रेस था उनकी पर्सनालिटी ड्रेसअप क्या? एटीट्यूट था उनका। कभी - कभी बाल्कनी में बैठे लैपटॉप चलाते दिखाई देते थे कभी - कभार छत पर टहलते हुए दिख जाते थे तो थोड़ी बहुत बात हो जाती थी उनसे, एक बार उन्होंने कहा था एक बार एक अच्छी कम्पनी में जॉब लग जाती है तो बस तरक्की ही तरक्की।
जब मेरी जॉब लगी तब मुझे विक्की भईया की बात याद आई थी और मुझे पूरा यकीन था कि यहाँ रहकर मेरी प्रोग्रेस जरूर होगी। आखिर इतनी बड़ी कंपनी और एक्सपिरियंसड लोग जो है मेरे आस - पास। जब हम स्मार्ट पर्सन्स के बीच काम करते है तो हमारा नॉलेज बढ़ता है और मैं जानता था कि मैं ऐसे ही लोगो के बीच हूँ वैसे मैं भी कम टेलेंटेड नही था मेरी स्किल्स भी अच्छी थी और मैंने हर वक्त कोशिश की अपना बेस्ट देने की और कुछ वक्त तक सब कुछ अच्छा रहा।
हर चमकती चीज़ सोना नही होती दूर से जो नजर आता है वही पास जाकर भी दिखाई दे ऐसा जरूरी नही। ये मान लेना कि सब कुछ बहुत अच्छा है ये हमारी ग़लतफ़हमी भी हो सकती है। आजकल मुझे ऑफिस में कुछ अजीब लगने लगा था या शायद मैंने अब इस बात को नोटिस करना शुरू किया था वैसे मेरे कुछ कलीग्स अच्छे थे सबसे अच्छी दोस्ती हो गई थी मेरी, पर सीनियर पोस्ट पर जो थे उनका बिहेवियर ज़रा अलग था। जाने क्यों वो थोड़े उखड़े- उखड़े से रहते थे और कुछ तो ऐसे पेशाते थे जैसे वही बॉस हो। ये मेरी पहली जॉब थी इसलिए ऑफिस के माहौल के बारे मुझे ज्यादा नॉलेज नही थी। मेरे कलीग्स को देखा था मैंने , सीनियर्स के इर्दगिर्द होते हुए उनकी तारीफ करते हुए और कुछ को बुराइयाँ करते हुए। शुरू में तो मुझे ये सब कुछ समझ ही नही आया पर धीरे- धीरे समझ आने लगा था कि चाहे आप जहां हो पर जिनका ओहदा आपसे ज्यादा हो उन्हें आपको खुश रखकर चलना होगा। काम ही नही मीठी बातें भी आनी चाहिये। पर ना मुझे झूठी तारीफे करना आता था और ना ही मक्खन लगी बातें मुझे सिर्फ मेरा काम करना आता था जिसके लिए मुझे अपॉइंट किया गया था। मुझे लगता था मेरे अपने फील्ड में बेहतर होने से , इंटेलिजेंट होने से सब मुझे लाइक करेंगे पर ऐसा हुआ नही बल्कि मेरे अपने कुछ कलीग्स मुझसे चिढ़ा करते थे और सबसे ज्यादा तो मेरे टीम लीड ही मुझसे चिढ़े रहते थे जोकि मुझसे उम्र में काफी सीनियर थे। ना जाने क्यों पर हर वक्त वो कुछ उखड़े नजर आते थे। जब कभी प्रोजेक्ट में कहीं कन्फ्यूजन होने पर मैं कोई सवाल कर लेता तो वो ऐसे मुझे घूरते जैसे मैंने कोई गुनाह कर दिया हो। अब जो ऑफिस में देख रहा था वो मेरी कल्पना से बिल्कुल अलग था विक्की भईया को देखकर में जितना खुश होता था अब खुदको उस जगह पाकर भी मुझे कोई खुशी नही हो रही थी। अब समझ आया कि कभी- कभी जब विक्की भईया ऑफिस से लौटते थे तो अपसेट क्यों नज़र आते थे शायद उनके साथ भी ऐसा ही कुछ होता होगा जहाँ कुछ लोग बेवजह ही उनसे चिढ़ते होंगे , उन्हें देखकर तानाकशी करते होंगे , कोशिश करते होंगे उनके कॉन्फिडेंस को कम करने की।
"तुम आगे बढ़ना चाहोगे पर लोग तुम्हे पीछे खिंचने की कोशिश करेंगे और ये एक बार नही बार- बार होगा" ये विक्की भईया ने कहा था उस दिन वो उदास थे हाथ मे फर्स्ट ईयर की बुक लिए जब मैं टेरिस पर पहुँचा तो वो खामोश अकेले किसी फिक्र में बैठे हुए थे हेलो भईया कहते हुए मैं उनके पास जाकर बैठ गया, वो हल्का सा मुस्कुरा दिए फिर हमने कुछ देर तक बात की और - और बातों ही बातों में उन्होंने कहा था जितनी मेहनत तुम आगे बढ़ने के लिए करोगे उतनी ही कोशिशें लोग तुम्हें पीछे धकेलने के लिए करेंगे, बड़ी कंपनीज़ में जॉब पाना ही मुश्किल नही रहता वहाँ टिके रहना भी मुश्किल होता है। उस वक्त विक्की भईया की बातें मुझे इतनी ज्यादा समझ नही आई थी। आज जब खुद उस जगह पर हूँ तो सब कुछ समझ पा रहा हूँ कि ऑफिस लाइफ़ सोचने में तो बड़ी अच्छी लगती है पर जीने में उतनी आसान नही होती। एक साल आज पूरा हो गया मुझे इस कम्पनी को जॉइन किये इस एक साल में मैंने बहुत कुछ देखा और सीखा, प्रोफेशनल लाइफ में कोई दोस्त या साथी नही होता हर एक आपका कॉम्पेटिटर होता है। मेरे इस एक साल के एक्सपीरियंस ने मुझे कुछ हद तक बदल दिया है मैं पहले जितना फ्रेंक नही हूँ और ना ही उतना सिंपल। "जो कमियाँ देखना चाहते हो वहाँ कितनी भी कोशिश कर लो उन्हें खूबियाँ नज़र आएँगी ही नही"। मैंने सालभर बहुत मेहनत की , कोशिश की अपनी बेस्ट परफॉमेंस देने की और मैने दी भी, जो भी प्रोजेक्ट मुझे दिए गए मैंने उन्हें वक्त से पहले पूरा किया, अपने आपको भी बदला अपना स्टाइल अपना लुक बिल्कुल प्रोफेशनल , जैसा वो चाहते थे वैसा बना पर फिर भी कुछ नही हुआ इतनी मेहनत और कोशिशों के बाद भी मुझे टर्मिनेशन लेटर दे दिया गया। मैंने अपने बॉस से बात भी की पर कुछ नही हुआ वो कुछ नही समझे , समझते भी कैसे जो खुद ऊँचाई पर खड़े होते है उन्हें जमीन पर चलने वाले नजर कहाँ आते है।
दुख इस बात का नही है कि जॉब चली गई , दुख इस बात का है कि इतनी मेहनत करने और काबिल होने के बावजूद हमे वो नही मिलता जो हम डिज़र्व करते है। विक्की भईया के साथ भी ऐसा ही हुआ था जो आज मेरे साथ हुआ और सिर्फ मैं ही नही मुझ जैसे और भी होंगे जिन्हें ऐसे एक्सपीरियंस मिले होंगे। खैर ये मेरी पहली जॉब थी जिसमे मुझे वो एक्सपीरियंस हुए जो शायद फ्यूचर में मुझे काफी काम आएंगे। मैंने इस एक साल में कुछ खोया नही बल्कि पाया है लोगो को करीब से जाना है समझा है ऑफिस लाइफ को जिया है और एक बात मुझे अच्छी तरह समझ आ गई कि कुछ भी आसान नही होता और हमारे सपनो जैसा कुछ भी नही होता, वो अलग होता है बिल्कुल अलग।
रात होती है तो सवेरा भी होता है, अंधेरे के बाद उजाला भी होता है और हर दिन के बाद एक नया दिन शुरू जरूर होता है इस आसमा के नीचे जी रहे लोगों की ज़िंदगी में हर पल बहुत कुछ होता है।
वैसे मैंने दूसरी कम्पनीज़ में जॉब के लिए अप्लाय कर दिया था और दो दिन बाद मैं जॉइन भी कर लूँगा। जहाँ फिर एक नई कम्पनी नया ऑफिस नये कलीग्स होंगे , कुछ नई प्रॉबलम्स होंगी और मिलेंगे नये एक्सपीरियंस इसी आसमा के नीचे।

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