मेरे दोस्त



मेरे दोस्त,

मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हूँ ,  तुम्हारी ज़िदंगी के हर पल में नही पर कुछ पल में ही सही मैं तुम्हारे साथ रहना चाहता हूँ। एक बार फिर से उन बीते लम्हों को तुम्हारे साथ जीना चाहता हूँ फिरसे हाथों में एक- दूसरे का हाथ लिये मस्तमौला चाल में तुम्हारे साथ चलना चाहता हूँ चाहे मेरे गले मे बंधी टाई तिरछी जा रही हो या फिर तुम्हारी शर्ट कमर में बेल्ट होते हुए भी थोड़ी बाहर आ रही हो पर तब भी मुस्कुराते हुए हम यूँ चल रहे हो जैसे हमारा ये मतवाला अंदाज देख सब हमसे जल रहे हो। 

हम फिर से मस्ती में एक - दूसरे के बाल बिगाड़ें और फिर अपने हाथों की उँगलियों से होले - होले उन्हें सुधारें , मेरी पेंसिल गुम हो जाने पर तुम अपनी पेंसिल मुझको दे देना , हो गई मुझसे गुम ये अपने घर पर कह देना। मैं फिरसे दो लड्डू चुपके से अपने बस्ते में छिपाकर तुम्हारे लिए ले आऊँगा तुम खाते हुए कहना हम्म अच्छा लगा मैं कल भी खाऊँगा। जब मैं होमवर्क करके ना लाऊँ तो तुम भी अपनी कॉपी छिपा लेना मेरे साथ - साथ तुम भी डाँट खा लेना। 

थोड़े बड़े होने पर जब हमारी क्लासें अलग हो जाएंगी तुम साइंस पढ़ रहे होंगे और मेरे बस्ते में कॉमर्स की किताबें आ जाएंगी। अब हम साथ नही बैठ पाएंगे पर फिर भी लंच में हम टिफ़िन एक - दुसरे का ही खाएंगे। कुछ तुम अपनी क्लास की बातें मुझसे कहना कुछ मैं तुम को सुनाऊँगा। भले ही दोस्त कुछ नये बन जाये पर छुट्टी के बाद तुम्हारे पीछे साइकिल पर बैठकर मैं ही साथ जाऊँगा। रास्तेभर हम बातें करतें जाएंगे जो कुछ नई - नई बातें अभी हमने सीखी है हम एक - दूसरे को समझाते जाएंगे।

धीरे- धीरे दिन आगे बढ़ेंगे और थोड़ा- थोड़ा वक्त बदल जायेगा। हमे एक - दूसरे का साथ पहले जैसा नही मिल पायेगा। हम कॉलेज में आ जायेंगे हमें मुस्कुराते खूबसूरत नए चहरे मिल जायेंगे अब हम दोनों की दुनिया बदलने लगेगी दोस्तों के साथ मौज - मस्ती , कभी पढ़ाई , करियर जिंदगी कुछ ऐसे चलने लगेगी। अब हम कभी - कभार ही मिल पायेंगे लेकिन फिर भी एक दिन में ही बीते दिनों की सारी कथा सुना देंगे जो कुछ भी होगा मन मे सब बता देंगे। इतने दिनों बाद हुई इस मुलाकत में बातें बहुत होंगी कुछ- कुछ कहकर हम खूब मुस्कुरायेंगे और फिर बाद में गले लगकर बाय फिर मिलेंगे यार, कहकर हम अपने - अपने रास्ते चले जायेंगे।

दिन अब तेज़ी से गुजरेंगे और वक्त पूरा बदल जायेगा हमारा साथ अब पूरी तरह छूट जाएगा। हम दोनों अपने - अपने सपनो अपनी- अपनी मंजिल की ओर दौड़ जायेंगे हम दूर और दूर होते जायेंगे। अपने साथ बिताए उन प्यारे लम्हों को हम अब कल के हाथों मे छोड़ जायेंगे। अभी एक शहर में रहते हुए भी हमे महीनों हो जाया करता था मिले हुए, अब तो सालों हो जायेंगे दो दोस्त मिल नही पायेंगे। अपनी मंजिल की ओर बढ़ते हुए हम बहुत आगे निकल जायेंगे हमारा अपना एक नया जहाँ बसायेंगे जिसमे हमारे अपने होंगे कई दोस्त होंगे जिनके साथ हम खुश होंगे और शायद तब तक हम एक- दूसरे को भूल भी चुके होंगे। 

मुझे नही पता कि मैं तुम्हे याद हूँ कि नही मेरे दोस्त पर, हाँ तुम मुझे याद हो। दोस्त तो मेरे कई है सब अच्छे है पर तुम , तुम हो जब सबके साथ होते हुए भी बोर मैं होने लगता हूँ या तन्हा सा महसूस करता हूँ तो बस झुकाकर अपनी पलके मन मे झाँक लिया करता हूँ और तब पहने स्कूल की यूनिफार्म सबके बीच खड़ा कोई मुझे देख मुस्कुराता है भोला सा चेहरा बिखरे से बाल शर्ट की तो उसके बड़े ही बुरे हाल, देखते ही उसे आँखें मेरी चमक उठती है और दिल मुस्कुराने लगता है यार मेरा मुझे नज़र आने लगता है।   

मैं नही कहता कि तुम हर पल मुझे याद रखो मैं तो इतना चाहता हूँ कि अपनी यादों में बस एक पल मुझे भी अपने साथ रखो। मैं नही कह रहा कि सिर्फ़ मैं ही तुम्हारा दोस्त हूँ बस इतना याद रखो की मैं भी तुम्हारा दोस्त हूँ। मैं नही कहता हर दम मेरा ख़्याल रखना बस इतना चाहता हूँ कि ख्यालों में अपने थोड़ी सी ही मगर जगह मेरे लिए भी रखना। मैं नही कह रहा की अपने नये दोस्तों के साथ वक्त मत बिताना मैं तो इतना चाहता हूँ  की कभी वक्त निकालकर आज नही कुछ सालों बाद ही सही पर मुझसे मिलने एक बार तो आना।  

मेरे दोस्त, मैं तुमसे कहना चाहता हूँ कि एक बार फिर से मैं तुम्हारे साथ बेपरवाह होकर जीना चाहता हूँ , अपने दिल की कुछ बातें कहना चाहता हूँ कुछ तुम्हारे मन का हाल मैं सुनना चाहता हूँ। फिर मनमौजी अंदाज में थामे तुम्हारा हाथ उसी रास्ते पर चलना चाहता हूँ जहाँ से हम कभी रोज़ गुजरा करते थे। मैं बेफ़िक्री के उस कल को आज के इस पल में लाना चाहता हूँ। माना कि अब वक्त पहले जैसा नही रहा और दोस्त हम पुराने है पर दोस्ती के तो आज भी ज़माने है। मेरे दोस्त मैं बस इतना कहना चाहता हूँ मैं दोस्त हूँ तुम्हारा और सदा रहना चाहता हूँ।


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