आज रात का अँधेरा कम है या गार्डन एरिया में लगी लेड सीरीज के छोटे- छोटे बल्ब कुछ ज्यादा ही तेज़ जल रहे है या शायद कुछ देर पहले मद्धम से चमकते इस चाँद की रोशनी में हल्की सी बढ़त हो गई है हाँ तभी तो इतनी रोशनी है यहाँ।होलिका दहन की तैयारी करते इन लोगों के चेहरों पर खुशी की झलक भी आती - जाती दिख रही है। बस ये समझना मुश्किल है कि ये सच्ची है या फिर झूठी। सबसे कुछ दूरी पर खड़ी ममता के मन मे यही सब चल रहा था। सभी ने मिलकर पहले पूजा की होलिका दहन हुआ और साथ ही होली के चक्कर लगाये गये इस वक्त सभी के होठों पर मुस्कान थी पर ममता के चेहरे पर ना तो कोई खुशी थी और ना होंठों पर मुस्कान, उनकी आँखें कोई पुरानी बात याद कर भर आयीं थी और चेहरे पर उदासी छा गई थी शायद ममता को अपने घर अपने परिवार की याद आ गई जिसे कभी खुद ममता ने सँवारा था जिसकी हर खुशी अपने परिवार के बिना अधूरी थी आज वो खुद अकेली है कोई नही है उसका अपना। यहाँ गार्डन में होली के चक्कर लगाने के बाद सब साथ खड़े बातें कर रहे थे लेकिन पुष्पा जीजी का ध्यान बार - बार अकेली खड़ी ममता की ओर जा रहा था उसे इस तरह उदास और अकेले देख जीजी का मन बातों में नही लग रहा था आखिर उनसे रहा ना गया और वो ममता से बात करने उसके पास आ पहुँची। ऐसा नही था कि बाकी सबको ममता की कोई फिक्र नही थी ओमप्रकाश जी , गीता दीदी और संध्या जी सबने ममता को कहा कि वो भी आये सबके साथ रहे बातें करें पर ममता किसी की समझाईश को नही सुनना चाह रही थी। ममता को आये 15 दिन ही तो हुए है उसके मन में कई सवाल गुस्सा दर्द भरा हुआ है वाक़िफ़ है सब ममता के मन की इस स्थिति से इसलिए किसी ने ज़ोर देते हुए उसे होलिका दहन की पूजा विधि में शामिल होने को नही कहा। लेकिन पुष्पा जीजी तो जा पहुँची ममता के पास उम्र भले ही 70 हो गई है पर आवाज़ में अभी भी बड़ा दम है कोई ऐसा नही है जो उनकी बात ना सुनता हो क्योंकि उसके आलावा और कोई रास्ता कहाँ होता है उनके पास, बड़ी धौंस जमाती है वो सब पर। क्या हुआ अकेली काहे बैठी हो पुष्पा दीदी ने ममता से कहा ममता ने जीजी की ओर देखा और कुछ नही बोली। अरे तुम तो बड़ी अजीब हो हम तुमसे बात कर रहे है और तुम हो कि कोई जवाब ही नही दे रही जैसे गम का पानी पीके मौन रख लिया हो और सोच लिया की अब तो किसी से न बोलेंगे। हँसी का माहौल अब खामोशी में बदल गया था सबकी नज़रे पुष्पा दीदी और ममता पर अटकी थी ममता ने पहले सब लोगो को की ओर देखा फिर पुष्पा जीजी को देखा ममता को मन ही मन रोना आ रहा था पर अपने आँसुओ को बाहर आने से रोक रहीं थी वो इसलिए उसकी आवाज़ मैं भारीपन था अपने भारी गले से ममता ने कहा- मुझे नही आता सबकी तरह झूठा मुस्कुराना झूठी खुशी दिखना कहकर ममता वहाँ से चली गई। कुछ देर बाद सभी घर मे चले गए और अब बाहर गार्डन में कोई नही था
जो खुद चोंट खाये होते है उन्हें किसी और की चोंट का एहसास ज्यादा बेहतर तरह से होता है क्योंकि वो उस दर्द को पहले ही महसूस कर चुके होते है यहाँ पुष्पा जीजी और ममता की चोंट एक जैसी ही है। ममता अपने दर्द को इतना भी गले से ना लगा ले कि वो जीना ही भूल जाये , हर वक्त अगर दुख में डूबी रहेगी तो खुशी का एहसास उस तक कभी पहुँच ही नही पायेगा रात में अकेले जागते हुए पुष्पा जीजी यही सब तो सोच रहीं थी फ़िक्र हो रही थी उन्हें ममता की। सुबह सब फिर एक साथ बाहर गार्डन में जमा थे बड़े प्यार से सब एक- दूसरे को रंग- गुलाल लगाते गले मिलते हुए होली मना रहे थे बस ममता बाहर नही आई थी पुष्पा जीजी ने ठान लिया था कि आज कुछ भी हो जाये वो ममता को होली खिला कर ही रहेंगी। हाथ मे गुलाल लिए वो सीधा अंदर पहुँच गई ममता के पास चल अपनी हथेलियाँ आगे कर जीजी ने कहा ममता को समझ नही आ रहा था कि जीजी उसे अपनी हथेलियों को सामने करने को क्यों बोल रही है कोई पटाखा नही फोड़ रहे है तेरे हाथ मे डर मत जीजी ने कहा ममता ने अपने दोनों हाथों की हथेलियाँ सामने करी तो जीजी ने अपने हाथों की बंद मुठियों का गुलाल ममता की हथेलियों पर रख दिया रंग लगाने नही देने आयी हूँ। यहाँ जितने भी लोग है कोई किसी का कुछ नही लगता पर फिर भी सब साथ है क्या लगता है तुमको, जब हम सब यहाँ आये थे तो बहुत खुश थे परिवार होते हुए भी अकेले होकर, जिस परिवार की नींव कभी खुद हमने रखी थी अब हम ही उस परिवार में नही आते। किसी को उसके अपनो ने छोड़ दिया और किसी ने खुद अपना घर छोड़ दिया अपने की बेरुखी बड़ी चुभती है जिन बच्चों की ज़िदंगी बनाने में सारा जीवन लगा दिया उन्ही के लिए बोझ से हो गए ,ओमप्रकाश भाईसाहब खुद अपना घर छोड़कर आये है और वो कुसुम अम्मा उसे उसका बेटा पूरे सम्मान और उसके सामान के साथ यहाँ छोड़ गया ये कहकर की दूसरे शहर में सब अच्छी तरह जम जाए घर मिल जाये फिर आकर साथ ले चलूँगा 5 साल तो हो गए इतंज़ार करते। अब तो अम्मा ने भी उम्मीद छोड़ दी उसके आने की। वो दयाल काका बहुत बड़ा परिवार है उनका जिनकी जिम्मेदारी कभी वो अकेले उठाये थे पर जब वो बीमार हो गए तो उनकी जिम्मेदारी कोई नही ले पाया। जीवन जी और किरण दोनों पति - पत्नी का अपना कहने को कोई नही है बाकी जीवन तो निकाला जा सकता है पर ये बुढापा ये अकेले नही काटा जा सकता हमे लोगो का साथ चाहिए होता है अपनी बात कहने सबके साथ हँसने को बस इसीलिये वो इस परिवार का हिस्सा बन गए। और हम, हम तो अनपढ़ है कुछ नही आता हमे कैसे बोलना चाहिए कैसे चलना चाहिए बात कैसे करना चाहिए हमारी वजह से हमारी पोती पर बुरा असर पड़ रहा था कौनसी बास्केट बॉल है कौनसी फ़ुटबॉल समझ ही नही आता था इसलिए कुछ का कुछ बोल देती थी चम्मच को स्पून बोलना है परी के सामने भूल जाती थी मैं। कभी- कभी हमारी नकल उतारते हुए वो हमारे जैसी बोली बोल पड़ती इसलिए सबको फ़िक्र होने लगी की परी पर हमारा असर ना हो जाए। एक दिन रवि ने आकर बताया कि उसने दो कमरों का एक छोटा सा घर देखा है बिल्कुल बुरा नही लगेगा वहाँ आस- पड़ोस के लोग भी अच्छे है और हम सब मिलने भी आते रहेंगे। उसने कहा तो मन को जैैसे कोई धक्का सा पहुँचा जुबान के साथ मन भी चुप होकर बैठ गया। अगले दिन हम खुद ही घर से निकल गए अपनी बहन के घर जा पहुँचे और उसके बाद यहाँ आ गये ओल्ड एज होम। कुछ दिन तक रोये दुखी हुए लेकिन फिर सम्हल गए और अपना नया परिवार बना लिया सबने हमको अपना मान लिया और हमने सबको अपना बना लिया। हाँ दिल को चोंट तो बडी गहरी पहुँची पर चोंट को देखते रहने से दिल मे दर्द बना ही रहता और हम इस दुख दर्द के साथ नही जीना चाहते थे इसलिए दर्द को पीछे छोड़ दिया। जब हमारे बिना सब खुशी से रह रहे है तो हम क्यों रो - रोकर जीये। हम सबने कल का हाथ छोड़ इस आज में एक - दूसरे का हाथ थाम लिया है और कोई भी झूठी हँसी नही हँसता सब सच मे मुस्कुराते है। रंग गुलाल का हो ,अपनेपन का हो या सबके साथ का अपनाने से खुशी ही मिलेगी क्यों खुद को इससे दूर रखना। जीजी ने ममता से कहा और बाहर चली आयी। कुछ देर बाद ममता भी बाहर आ गई और आकर सबसे पहले जीजी को गुलाल लगाया और बाकी सबको भी होली की बधाई दी ममता के मन में दुख अभी भी था पर सब इस बात से खुश थे कि ममता ने कोशिश की अपने दुख को पीछे छोड़ दोबारा मुस्कुराने की। सब हँसी - खुशी के साथ होली के गीत गाने लगे माहौल बड़ा ही खुशनुमा हो गया ये खुशी का रंग था जो सबके चेहरे पर झलक रहा था सब खुशी में गीत गा रहे थे मुस्कुरा रहे थे थोड़ी देर से ही सही पर ममता के चहरे पर भी मुस्कान आई । इसी बीच कोई जीजी से मिलने आ गया उसने जीजी के पैर छूकर आशीर्वाद लिया उन्हें रंग लगाया कुछ देर बातें की और चला गया। ममता उसे जाते हुए ध्यान से देख रही थी तभी जीजी ममता के पास आ खड़ी हुई वो सुमित है हमारी बहन का बड़ा बेटा बहुत समझदार है आता रहता है वो हमसे मिलने।पहली बार वो ही तो लाया था हमे यहाँ दिवाली पर सबको मिठाई देने तब पता नही था कि बहुत जल्द यहां का हिस्सा बनने वाले है। जब घर से निकल कर अपनी बहन के घर पहुँचे थे तो बहुत ज़िद की थी हमारी बहन और सुमित ने की हम उनके साथ रहे लेकिन हमने उनकी बात नही मानी और सुमित से बोल दिया कि वो हमें यहाँ छोड़ जाए क्योंकि हम यहाँ रहना चाहते थे कहते हुए जीजी की आवाज में ज़रा सा दर्द उभर आया जो दिल के किसी कोने में छुपा रखा है कितनी भी कोशिश कर लें पर मन के दर्द कभी न कभी उभर आते ही है। जीजी ने बडी जल्दी खुुद को सम्हाला अरे तुमने तो मुझे रंग लगा दिया पर मैंने तो कहते हुए जीजी ने थाली से गुलाल उठाया और ममता के दोनो गालो पर झट से लगा दिया लो लगा दिया कहकर जीजी हँसने लगी ममता भी जोर से हँसकर जीजी के गले लग गई।

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