कल्पना



गाड़ी में बैठे हुए मैं ऑफिस से लौट रही थी घर के रास्ते मे बीच मे मार्केट भी पड़ता है मैं रोज़ ही मार्केट की इस चमक- दमक को देखते हुए निकलती हूँ। वेलेंटाइंस वीक शुरू होते ही मार्केट की तो जैसे शक़्ल ही बदल गई आज तो हर शॉप गिफ्ट शॉप की तरह नजर आ रही थी भले ही वैलेंटाइन्स डे 14 को है पर उसका ख़ुमार लवर्स पर अभी से काफी दिखाई दे रहा है कोई टेडी लिए तो कोई बड़ी ही खूबसूरती से गिफ्ट पैक कराये हाथों में लिए बाहर आ रहे थे लेकिन मैं अभी भी गिफ्ट शॉप के बाहर खड़ी यही सोच रही थी अंदर जाऊं या नही के रहने दूँ क्या जरूरी है? मेरा कुछ लेना। फिर सोचा एक बार अंदर चलकर देख लेना चाहिए शायद कुछ अच्छा सा मिल जाये। बहुत ही प्यारे- प्यारे खूबसूरत गिफ्ट्स है यहाँ जिस पर भी नज़र ठहर रही थी वही अच्छा लग रहा था मेरे अलावा जो और लड़के- लड़कियाँ थे वो अपने साथी के  लिए अपना प्यार जताने या प्यार का इज़हार करने के लिए कुछ खास कुछ अलग गिफ्ट ढूंढ रहे थे लेकिन मुझे न तो प्यार का इज़हार करना है और ना प्यार जताना तो फिर मैं क्या लूँ मुझे किस तरह का गिफ्ट लेना चाहिये। गिफ्ट्स देखते हुए मैं ग्रीटिंगन्स कार्ड वाली रो में आ पहुँची और कार्ड्स उठाकर देखने लगी हर एक कार्ड में कुछ लिखा हुआ था जिसे में पढ़ती जा रही थी कितने खास लहेजे से लिखा है इनमें प्यार के बारे में  ऐसा लग रहा था जैसे राइटर कोई बड़ा आशिक़ रहा होगा या फिर उसने प्यार पर पीएचडी की होगी तभी तो उसे सब पता है कि किसी का प्यार उसका साथी उसके लिए क्या है वो उसे कितना चाहता है उसकी कितनी परवाह करता है लिखने वाले ने हर एक लाइन बड़ी गहराई से लिखी है कोई भी लवर अगर अपने साथी को ये कार्ड देगा तो यकीनन उसका साथी उससे खुश हो जाएगा। कार्ड्स पढ़कर मैं मन ही मन मुस्कुरा रही थी और फिर कार्ड्स देखते हुए मैं रो में थोड़ा आगे जा पहुँची वेलेंटाइन्स डे करीब होने के कारण ज्यादातर कार्डस एक जैसे थे प्यार भरे, कपल्स के लिए। पर एक कार्ड थोड़ा अलग लगा मुझे मैंने उसे उठाने के लिए हाथ बढ़ाया तो दूसरी तरफ से किसी और का हाथ भी कार्ड की ओर बढ़ता नज़र आया मैंने देखा तो ब्लू जीन्स और वाइट टीशर्ट में एक लड़का था जो बहुत ध्यान से कार्ड को देख रहा था मैंने अपना हाथ रोक लिया। कार्ड हाथ मे लेते हुए उसने मुझसे पूछा क्या आपको भी ये कार्ड चाहिए ? नही मैं कोई दूसरा कार्ड देख लूँगी मैंने कहा। ईट्स ओके अगर आपको ये कार्ड पसन्द है तो आप ले लें मैं तो ऐसे ही देख रहा था उसने कहा। अच्छा आपको नही चाहिए जी नही उसने कहा। ठीक है थैंक्यू , कहते हुए वो ग्रीटिंग कार्ड मैंने ले लिया। सुनिये क्या आप मेरी कुछ हेल्प कर सकती है उम्मीद भरी आँखों से देखते हुए उसने कहा, मैं कुछ सैकेंड चुप रही दो- तीन बार अपनी पलकें झपकाई फिर बोली जी किस तरह की हेल्प। दरसल मुझे एक गिफ्ट लेना है और जिसके लिए लेना है ना तो वो मेरी दोस्त है और ना ही गर्लफ्रेंड। इसलिए क्या लेना चाहिए मुझे कुछ समझ नही आ रहा है। ओह! ओके मैं कोशिश कर सकती हूँ आपकी हेल्प करने की। आप इन कार्ड्स में से ही कोई कार्ड ले लीजिए मैंने कहा। हाँ मैं यही सोच रहा था कहते हुए वो कार्ड्स देखने लगा पर कोई कार्ड उसे पसन्द नही आया। हम कार्ड वाली रो से बाहर आ गये। शॉप में कई तरह के गिफ्ट्स आइटम
थे फोटोफ्रेम शॉ पीस कपल्स वाले गिफ्ट्स हमने सब देख लिए पर उस लड़के को तो कुछ अच्छा ही नही लग रहा था आखिर क्या लेना है इसे कब से कुछ न कुछ देखे जा रहे है पर इस बन्दे को तो कुछ भी समझ ही नही आ रहा। लेकिन अब मुझे जरूर थोड़ा सा गुस्सा आ रहा था। 4 बज गए थे मुझे घर भी लौटना था। क्या हुआ? कुछ नही, नही मुझे लग रहा है कि शायद आपको मेरी वजह से परेशानी हो रही है कोई बात नही मैं देख लूँगा कुछ। मेरी वजह से आपका काफी समय भी बर्बाद हो गया और शायद आपको देरी भी हो रही हो आप जाना चाहें तो जा सकती है। बोलते हुए उसने इतना सेड सा चेहरा बनाया की मैं ये नही कह पाई की हाँ मैं सच में अब परेशान हो रही हूं हल्की सी स्माइल के साथ मैंने कहा नही कोई बात नही। 
जिससे हमारा कोई रिश्ता नही उसे क्या देना चाहिए सच मे ऐसे किसी के लिए गिफ्ट लेना आसान कहाँ है अपने मन मे सोचते हुए मैं शॉप में अपनी नज़रे घुमा - घुमाकर देख रही थी और फिर मेरी नज़र टेडी बियर पर पड़ी छोटा सा क्यूट सा टेडी बियर जिस पर फ्रेंड लिखा था ये देखिए ये टेडी बियर जिन्हें गिफ्ट देना है वो दोस्त नही है पर दोस्त बन तो सकती है। हाँ ठीक है ये। फाइनली गिफ्ट मिल ही गया। थैंक्यू हेल्प के लिए उसने कहा तो मैंने भी वेलकम कह दिया और राहत की साँस ली। 
शाम को ग्रीटिंग कार्ड हाथों में पकड़े हुए मैं अपनी होने वाली मीटिंग के बारे मैं सोच रही थी क्या बात करूँगी उससे और अगर उसने ये सवाल किया तो क्या जवाब दूँगी जो होगा देखा जाएगा इतना क्यों सोच रही हूँ मैं। मैं उठी और ग्रीटिंग कार्ड आपनी डायरी के बीच मे रख दिया। 
कल मासी का कॉल आया बताया उन्होंने की वो महाशय फ्री नही है अभी, तो 12 को नही अब वो 14 को मिलने का कह रहे है मासी तो कह रहीं थी कि बड़ा शरीफ़ है मुझे तो नही लगता।
मैंने बुदबुदाते हुए कहा।
दो दिन बीत गए और मुलाकात का दिन आ ही गया अजीब सी घबराहट हो रही थी मैं टैक्सी में बैठकर मिलन रेस्टुरेंट के लिए निकल गई थी अरे मासी का कॉल हाँ हैलो मासी हाँ मैं निकल गई पर मेरे पास तो उसकी कोई फ़ोटो भी नही है मैं कैसे पहचान पाऊँगी। तू फ़िक्र मत कर राहुल भी है ना उसके साथ अच्छा ठीक है बाय कहकर मैंने फोन कट कर दिया। मासी भी ना उसका कोई फ़ोटो सेंड कर देती तो अच्छा रहता ना।
किसी से पहली बार मिलकर क्या हम उसे अच्छी तरह जान सकते है मन ही मन कितने सवाल मेरे अंदर चल रहे थे।मैडम 
रेस्टुरेंट आ गया जी भईया। मैं टैक्सी से उतरी टैक्सी वाले भईया को पैसे दिये और रेस्टुरेंट मे इंटर हो गई। हर सीट पर कपल्स ही दिखाई दे रहे थे एक - दूसरे का हाथ थामे। रेस्टुरेंट भी वेलेंटाइन्स थीम पर सजा हुआ था हर तरफ रोज़ ही रोज़ दिख रहे थे मेरे थोड़े आगे पहुँचते ही राहुल भईया मिल गये आप अकेले बैठे है मैंने पूछा हाँ अभी अवनित बस आने वाला है अन्नू देखो अकड़ू बनकर बात मत करना ओके। मैंने बस हाँ में सिर हिला दिया। 
लो अवनीत आ गया अन्नू ये अवनीत है तो अब मैं चलता हूँ मुझे अब ऑफिस के लिए लेट हो रहा है अन्नू मीटिंग के बाद मम्मी को कॉल कर लेना। ठीक है भईया मैंने कहा।
मैं और अवनीत हम दोनों आस- पास मौजूद कपल्स को देखे जा रहे थे मुझे लगता है कि हमें इन लोगो को घूरना बंद कर देना चाहिए नही तो हमारी शिकायत हो सकती है अवनीत ने कहा सच मे मैंने पूछा अवनीत ने पलकें झपका दी। अनन्या तुम्हे क्या लगता है वो ब्लैक शर्ट वाला लड़का जो बड़ा सा बुके लेकर आया है क्या वो उसे वाकई चाहता होगा ये तो मैं नही बता सकती पर सच कहूँ तो मुझे लग रहा कि अभी वो दिखावा कर रहा है वैसे भी लड़के थोड़े ऐसे ही होते है। अच्छा वो उधर देखो वो लड़की जो अपने बॉयफ्रेंड पर गुस्सा किये जा रही है शायद लड़कियाँ थोड़ी ऐसी ही होती है हेना। अवनीत और मैं मुस्कुरा दिए। कुछ ही देर में चोरी - चोरी देखते हुए हमने यहाँ बैठे सारे कपल्स को अच्छी तरह ऑब्जर्व कर लिया और अपना तर्क लगाते हुए हम धीरे - धीरे उन्ही के बारे में बात कर रहे थे। इतनी सी देर में कितने कम्फ़र्टेबल हो गए थे हम दोनों। अनन्या मुझे लग रहा है की ख़ुदको छोड़कर हम बाकी सबके बारे में बात किये जा रहे है थोड़े गम्भीर लहज़े में अवनीत ने कहा। मेरे चेहरे के भाव ज़रा बदल गये और हँसी ज़रा गुम हो गई। मैंने थोड़े हिचकते हुए कहा अवनीत मुझे खुदको एक्सप्रेस करना नही आता। मैं जॉब वाला इंटरव्यू तो दे सकती हूँ पर शादी वाला इंटरव्यू नही दे सकती मुझे नही पसन्द किसी लड़के को अपनी खूबियाँ बताना की मैं इतनी होशियार हूँ इतनी अच्छी हूँ या बुरी जो भी हो मुझे ये सब अच्छा नही लगता। अवनीत खामोशी से मेरी बात सुन रहा था और मेरे चुप होने पर मेरी आँखों में देखते हुए बोला मुझे भी नही पसन्द। अवनीत की बात सुनते ही मेरे दिल और दिमाग़ को जैसे रिलीफ़ मिल गया जो इतनी देर से इस इस प्रेशर से दबे जा रहे थे कि अभी इंटरव्यू में ना जाने कितने सवालों के जवाब देने होंगें और कहीं कोई टेड़ा सवाल पूछ लिया तो। पर अब सुकून है। 
अवनीत और मैंने एक - दूसरे से कोई भी पर्सनल सवाल नही किया लेकिन हम फिर भी देर तक बातें करते रहे। कभी अपने  स्कूल, कॉलेज तो कभी जॉब से रिलेटिड बातें। हमारी बातें न तो बनावटी रही और नाही गोलमोल बिल्कुल सरल और सीधी जिसमे किसी छलावे और झूठ का कोई मिश्रण नही था। सब एक जैसे नही होते कुछ लोग होते है ऐसे भी जो हमारी बातों को समझते है कोशिश करते है हमारे मन को पढ़ने की वो भी बिना कोई भी सवाल किये, अवनीत शायद ऐसा ही है।
अनन्या कहाँ खो गई हाँ ओह! सॉरी मैं कुछ सोचने लगी थी ओह तो तुम बातें करते हुए भी कहीं खो जाती हो अवनीत ने हँसते हुए कहा मैंने मुस्कुराते हुए सिर हिला दिया और घड़ी में टाइम देखने लगी। तो हमारी मुलाकात ख़त्म अवनीत ने कहा बड़ी ही छोटी से स्माइल के साथ मैंने कहा हाँ। अब हम दोनों खामोश बैठे थे कभी इधर देखते कभी उधर देखते हम दोनों के मन मे कुछ चल रहा था क्या करूँ दें दूँ या रहने दूँ पर मैंने डिसाइड तो यही किया था अगर वो मुझे अच्छा लगा तो मैं उसे ये दे दूँगी। मेरे पास कुछ है हम दोनों ने एक साथ कहा। अच्छा पहले तुम ही बता दो मैंने कहा नही ऐसा करते है हम दोनों एक साथ बताते है अवनीत ने कहा। मैंने अपने बैग से और अवनीत ने अपने पेपर बैग से कुछ निकाला और टेबल पर रख दिया। टेबल पर अब एक ग्रेटिंग कार्ड था और एक टेडी बीयर। तो ये हमारी पहली मुलाक़ात नही है है ना मैंने अवनीत से पूछा आँखें बड़ी करते हुए शरारती सी स्माइल के साथ वो बोला येस।
उस दिन मैं जानता था की तुम अनन्या हो पर अंजान रहा क्योंकि फिर हमारी ये मुलाक़ात इतनी खास नही होती अवनीत ने कहा तो मैंने होले से अपनी पलके झपका दी।
गाड़ी की आवाज़ ने जैसे मुझे किसी ख़्वाब से जगा ही दिया अब घर मैन रोड के इतने करीब है कि गाड़ियों की आवाज़ आती रहती है आज मार्केट की गिफ्ट शॉप पर कितनी भीड़ थी शॉप की काँच की दीवार के उस पार रखा जलता- बुझता हार्ट शेप लेम्प कितना खूबसूरत लग रहा था और मेरी कल्पना भी 
सब कुछ कितना अच्छा रहा ना। कल्पनायें ऐसी ही तो होती है जिसमें हम अपने मन के मुताबिक़ कुछ भी बदल सकते है जैसा चाहे सब वैसा कर सकते है और खूबसूरत कल्पना तैयार कर सकते है बस उसे सच नही कर सकते वो सिर्फ कल्पना होती है मन की कल्पना।


No comments:

Post a Comment

एक चुटकी प्रेम

मार्च बित गया था ठंड के नख़रे अब कम हो गए थे कम क्या यूँ कहें कि अब खत्म ही हो गये थे सूरज के तीखे तेवर जो शुरू हो गये थे। अब गर्मागर्म पकोड़े...

Sonal bhatt MULAKAT-KAHANIYO-SE STORY OF OUR LIFE