शुभ दिवाली




त्यौहार के पहले ही बाजार जो जगमगाता है वो देखकर ही मन बड़ा उत्साहित हो जाता है। झिलमिल करती लाइट घर के सजावट का सामान , नये- नये प्रकार के दिये, अलग-अलग रंगों की रंगोली। दिवाली
की रोनक ऐसी होती है की हर एक घर रोशन हो जाता है। चारो ओर प्रकाश ही नजर आता है। आँगन में बनी सुन्दर रंगोली उसमे रखे जलते दिये अपनी रोशनी बिखरते अच्छे लगते है। बचपन में दिवाली पर लक्ष्मी माता की पूजा करने के लिए मैं सबसे ज्यादा उत्साहित रहता था क्योंकि मैंने अपनी दादी को कहते सुना था की लक्ष्मी माता की पूजा करने से लक्ष्मी आती है। मैं तब यही सोचता था के मैं पहले पूजा करूँगा तो सबसे ज्यादा पैसे मेरे पास ही आयेंगे। तब ज्यादा समझ तो थी नही। उस वक्त हर बच्चे ही तरह मेरे लिए भी दिवाली का मतलब नये कपड़े लेना पटाखे चलना और घर में बनी मिठाई गुजिया शक्करपारे का आनन्द लेना था। लेकिन जब बड़ा हुआ तब दिवाली का सही महत्व समझ आया।
दिवाली खुशियों का त्यौहार है हम खुशियां मनाते है खुशियां बाँटते है बड़े जोश और उत्साह के साथ परिवार के सभी सदस्य मिलकर साथ में इस त्यौहार को मनाते है ये त्यौहार फैमली मेंम्बर्स के लिए भी आपस में मिलने का एक बहुत अच्छा मौका होता है। ज्यादातर फैमली मेंम्बर्स किसी न किसी वजह से अपनी फैमली से दूर रह रहे है सब इस तरह बिज़ी है की उनके लिए अपने ही परिवार से मिल पाना मुश्किल हो जाता है।
ऐसे में हमारे ये त्यौहार ही है जो इस मुश्किल को हल करते है दिवाली पर न जाने कितने लोग अपने घर वापस जाते है भले ही बहुत ज्यादा नही पर कुछ वक्त अपने परिवार के साथ बिता पाते है। उनके अपने भी उनका इंतजार कर रहे होते है ये सोचकर की इस बार
दिवाली के बहाने उनका अपना जो उनसे दूर है वो घर आयेगा और खुशी के  कुछ पल उनके साथ बिताएगा।
मैं ये सब बाते इसलिए कर रहा हूँ क्योंकि मैं भी अपनो से, अपने परिवार से दूर हूँ आठ साल हो गये है उनके बिना रहते हुए। इन आठ साल में मैं दो बार ही दिवाली पर घर जा सका। लेकिन पिछली दिवाली मैंने डिसाइड कर लिया था की इस दिवाली अपने घर जरूर जाऊंगा। ऑफिस से छुट्टी भी मिल गई थी मैं बिल्कुल रेडी था लेकिन जिस फ्लाइट से मैं जाने वाला था किसी वजह से उसका जाना केंसिल हो गया। और इतने अचानक से
जाने का कुछ और अरेंजमेंट नही हो सका। मैं मन ही मन उदास हो गया। जब हम कहीं जाने वाले होते है तो पहले से ही बहुत कुछ प्लानिंग मन में कर लेते है मैंने भी की थी सभी के लिए गिफ्ट्स लिए थे की सबको गिफ्ट्स दूँगा और हमेशा की तरह पापा से अपना मन चाहा कुछ लूँगा। पर ये होना सका। मैं अपने फ्लेट की बाल्कनी में बहुत देर उदास हुए बैठा रहा। जब मुड़ थोड़ा ठीक हुआ तो अपने उदास मन को ठीक करने के लिए
मैं घर से बाहर घूमने निकल पड़ा। मैं एक पार्क में जाकर बैठ गया यहाँ मैं अक्सर आता रहता हूँ  मैं बैठे हुए वहाँ आते - जाते हुए लोगों को देख रहा था। कुछ देर बाद मेरे मन मैं कुछ ख्याल आया मैंने अपने दोस्त को कॉल किया और फटाफट अपने फ्लेट पर जा पहुँचा और 20 मिनिट मैं वापस पार्क मैं आ गया। तब तक मेरा दोस्त भी आ गया था मैंने जो गिफ्ट्स अपनी फैमली के लिए थे वो मैंने यहाँ आये लोगों को शुभ दिवाली कहते हुए दे दिये और वीडियो कॉल पर अपनी फैमली से बात करते हुए मैंने अपने दोस्त के साथ मिलकर  दिवाली के दिये भी जलाएं इस तरह मैंने पार्क में ही दिवाली सेलिब्रेट की जिसमे वहाँ मौजूद लोग भी इस सेलिब्रेशन में शामिल हुए।
घर जैसी खुशी भले न मिली हो पर खुशी मिली।
मगर हाँ इस बार मैं दिवाली पक्का अपनी फैमली के साथ ही मनाऊंगा क्योंकि मैं अपने घर आ गया हूँ।
और सबके लिए गिफ्ट्स भी लाया हूँ। मैं बहुत खुश हूँ
अपनो के साथ दिवाली ही मेरे लिए शुभ दिवाली है।

 


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