अधूरा




ऐसा क्यों होता है की सब कुछ होने के बावजूद भी हमे कुछ अधूरा सा लगता है। खुश होते हुए भी दिल के किसी कोने में एक खामोशी सी होती है।
 विनय और नीता की शादी को आज पाँच साल हो गये है और इसी खुशी में एक शानदार पार्टी भी रखी गई है उन दोनो ने मुझे भी इन्वाइट किया है जाना तो पड़ेगा ही आखिर कॉलेज फ़्रेंड्स है हम। पार्टी के सभी फोटोज मैंने ही क्लिक किये बिल्कुल वैसे ही जैसे पहले किया करता था मुझे फोटो क्लिक करने का बड़ा ही शौक था उस वक्त मेरे पास एक साधारण सा कैमरा हुआ करता था। आज विनय और नीता से मिलकर कॉलेज टाइम की सारी बाते ताजा हो गयी। हम अपने दोस्तो से दो दिन बाद मिले , कुछ महीनों बाद मिलें या कुछ सालो बाद मिलें हमारे बीच कुछ नही बदलता जब भी मिलते है बिल्कुल वैसे ही हो जाते है जैसे पहले थे शरारती और बेपरवाह से।
पार्टी तो मैंने बहुत इंजॉय की पर घर आकर मैं थकान सी महसूस कर रहा हूँ थका हुआ सा मैं सोफे से अपनी पीठ टिकाकर बैठ गया। घर में कितनी खामोशी सी लग रही है कोई हलचल , कोई आवाज नही।
यूँ तो मैं पूरे दिन ही बड़ा खुश रहता हूँ कई फोटोज खिंचता हूँ कई फोटोज देखता हूँ अपने साथियो के साथ मजाक -मस्ती तो रोज की ही बात है मैं कभी - कभी रिशेप्शन पर बैठी जूही के साथ थोड़ा -फ्लर्ट भी कर लेता हूँ। और न जाने दिनभर कितने लोगों से मिलता हूँ।
पर जब घर आता हूँ तब मैं खुद से मिलता हूँ अपने अंदर के आदित्य से। जोकि अकेला है।आज विनय और नीता को साथ में खुश देख ऐसा लगा जैसे की दो फूल जो एक दूसरे का साथ पाकर मुस्कुरा रहे हो। नीता ने मुझसे स्वर्णा के बारे में पूछा मैंने कुछ नही कहा खामोश रह गया। वैसे तो मुझे रोज ही स्वर्णा की याद आती है पर आज कुछ ज्यादा आ रही है।
उसके बिना घर खाली सा लगता है।
स्वर्णा और मैं कॉलेज फ़्रेंड्स थे मुझे तभी से ही फोटोग्राफी का बड़ा शौक था मैं एक फेमस फोटोग्राफर बनना चाहता था इसलिए कभी अपने दोस्तो की कभी कॉलेज कैम्पस की , तो कभी बदलो में उड़ते पंछी की फोटो ले लेता। और स्वर्णा की तो मैं न जाने कितनी फोटो लेता कभी मुस्कुराती हुई कभी गुस्से में मुँह बनाती हुई तो कभी एग्जाम के टेंशन में बैठी हुई। उसके हर एक लम्हे खुशी, नाराजगी ,फिक्र सबकी फोटो मेरे कैमरे में कैद हो जाती। हमारा रिश्ता अब सिर्फ दोस्ती का नही रह गया था बल्कि उससे आगे बढ़ गया। पढ़ाई पूरी हो जाने के बाद मैं अपने सपने को पूरा करने मुम्बई आ गया। यहाँ आकर मेरा स्ट्रगल
शुरू हुआ। स्वर्णा कभी - कभी मुझसे मिलने यहाँ आने लगी। मेरे साथ वो भी मेरे सपने को जीने लगी हमेशा मुझे इनकरेज करती। अभी मैं अपनी मंजिल के पास नही था पर ज्यादा दूर भी नही था। धीरे- धीरे मुझे ऑफ़र्स मिलने लगे थे। और इसी बीच मैंने और स्वर्णा ने शादी भी करली। अब स्वर्णा हर वक्त मेरे साथ थी मेरे फैसलों में मेरी खुशी में मेरी उदासी में। वक्त आगे बढ़ने लगा और उसके साथ मैं भी मुझे अब बड़े -बड़े ऑफ़र्स मिलने लगे मेरी खिची हुई तस्वीरे अब खास होने लगी थी। बेस्ट फोटोग्राफर की लिस्ट में मेरा नाम भी शामिल हो गया था बड़ी- बड़ी मैग्ज़ीनस के फोटोशूट के लिए मुझे कॉल आने लगे। आठ सालों में मैंने वो हासिल कर लिया था जो मैं चाहता था मैं एक फेमस फोटोग्राफर बन चुका था। मैं क़ामयाबी की सीढ़ी तो चढ़ रहा था पर शायद स्वर्णा से दूर भी होता जा रहा था। मेरे पास उसके लिए वक्त ही नही था दिन में अपने काम में व्यस्त रहता और रात को किसी न किसी पार्टी में। मेरे अंदर गुरुर आने लगा था अपनी क़ामयाबी का। एक ही घर में साथ होते हुए भी कितने वक्त से मैंने उसे गौर से देखा भी नही ना कुछ पल उसके पास बैठकर उसके मन की कोई बात जानी न अपने मन का कुछ कहा।
आज ब्रेकफास्ट के समय स्वर्णा मुझसे कुछ बात कर रही थी। लेकिन मेरा ध्यान उसकी बातो में बिल्कुल नही था स्वर्णा शायद समझ गई थी इसलिए बात करते-करते चुप हो गई। ब्रेकफास्ट के बाद जब मैं घर से निकलने लगा तब स्वर्णा ने मुझे रोकते हुए कहा
कितने वक्त से हमने साथ डिन्नर नही किया है आज शाम को जल्दी आ जाना प्लीज़। ये स्वर्णा की हमारे बीच आई दूरी को कम करने की कोशिश थी ओके कहकर मैं चला तो गया पर रात को देर से घर पहुँचा वो भी डिन्नर करके। क्योंकि स्वर्णा भी आज गुस्से में थी तो बात तो आगे बढ़नी ही थी और बहस छिड़नि ही थी बहस के दौरान मैंने कुछ ऐसी बाते कह दी जिससे ऐसा लग रहा था की जैसे मेरी लाइफ में उसकी कोई अहमियत नही।
मेरी बातो में इतना घमंड था जो ये साफ कह रहा था की स्वर्णा की पहचान मुझसे है वो मेरे बिना अधूरी है मैं उसके बिना नही। वो हो या ना हो मुझे कोई फर्क नही पड़ता। बहस के बाद मैं गुस्से में अपने रूम में चला गया स्वर्णा रातभर जागी रही या फिर सो गई मुझे नही पता।
अगले दिन स्वर्णा उदास भले ही थी पर ब्रेकफास्ट उसने बनाया था लेकिन मैंने गुस्से में ब्रेकफास्ट नही एक फोटोशूट के लिए मुझे जाना था मैं चला गया। बिना स्वर्णा से कुछ बात किये। रात को जब घर आया तो स्वर्णा नही थी वो चली गई थी घर छोड़कर, मुझे छोड़कर। मैंने भी उसे फोन कर वापस आने को नही कहा। कुछ दिनो तक तो मुझे उसके जाने से कोई फर्क नही पड़ा। क्योंकि मैं अभी भी घमंड से भरा हुआ था पर कुछ दिनों बाद मुझे घर सुना सा लगने लगा स्वर्णा की कमी मुझे खलने लगी , हर छोटी - छोटी बात पर मुझे उसकी याद आने लगी मुझे उसकी कितनी आदत हो गई है ये मैं खुद ही नही जानता था। मैंने कैसे उसे खुद से दूर कर दिया जिसके हर एक पल की फोटो मैं अपने कैमरे में कैद कर लिया करता था उसका अकेलापन मैं कैसे नही देख सका।आज जब मैं घर से बाहर निकलता हूँ तो फोटोग्राफर आदित्य बनकर निकलता हूँ दिनभर खुश भी रहता हूँ। लेकिन घर आकर मैं सिर्फ आदित्य होता हूँ वो आदित्य जो स्वर्णा के बिना अधूरा है नाखुश है।मैंने स्वर्णा को मैसेज कर उसे लौट आने को कहा है कॉल इसीलिए नही किया क्या पता वो मुझसे बात करती या नही। मुझे उम्मीद है की वो मुझे जरूर माफ कर देगी और जल्द ही लौट आएगी अपने घर अपने आदित्य के लिये।




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