नाराज़



ऑफिस से हाफ डे लेकर मैं आज बैंक गया था मुझे कुछ काम था जो कई दिनों से टल रहा था इसलिए
आज तो मैंने ठान लिया थे कि बैंक जा कर ही रहूंगा।
अपना काम हो जाने के बाद जब मैं बैंक से बाहर आया तो सामने एक गिफ्ट शॉप दिखाई दी। मैं शॉप में गया और अपनी वाइफ अंजना के लिये कोई अच्छा गिफ्ट देखने लगा। मेरे ही बगल में करीब 12-13 साल का एक लड़का खड़ा था जो की अपने नाराज फ़्रेंड को मनाने के लिये गिफ्ट ले रहा था। मैंने भी अपना गिफ्ट लिया और घर आकर अंजना को दे दिया उसने खुश होते हुए मुझे थैंक यू कहा और बदले में मैं मुस्कुरा दिया। अंजना किचन में जाकर डिनर की तैयारी करने लगी और मैं हॉल में बैठा हुआ कुछ सोचने लगा।
आज उस लड़के को अपने दोस्त के लिए गिफ्ट लेते देख मुझे अजित की याद आ गई। अजित मेरा कॉलेज
फ़्रेंड था अजित और मुझमे कोई समानता ना होते हुए भी हम दोनो बहुत अच्छे दोस्त थे। अजित खुशमिजाज था और हर वक्त मस्ती के मुड़ में ही रहता था और मैं बोलता कम था और सोचता ज्यादा था। पर अजित के साथ रहकर मैं भी
थोड़ा मस्ती खोर हो गया था। मैने अजित के साथ अपनी कॉलेज लाइफ को खूब इंजॉय किया। लास्ट ईयर तक आते हम दोनो की दोस्ती इतनी गहरी हो गई थी की हम साथ में बिल्कुल बेस्ट फ़्रेंड जैसे ही लगते थे। और एक दूसरे पर बहुत भरोसा भी करते थे। तब मुझे ये लगा नही था कि ये भरोसा कभी डगमंगाएगा। पर ऐसा हुआ।
बात एग्जाम के समय की है हमारा लास्ट ईयर था ये वो वक्त था जब सभी के दिमाग में एक ही बात थी टॉपर लिस्ट में आना। अजित और मैं भी इस दौड़ का हिस्सा थे। मैं जोर- शोर से एग्जाम की तैयारी में लग गया था वैसे तो मैं सारे सब्जेक्ट्स में ठीक था बस केमिस्ट्री में मैं थोड़ा विक था पर अजित केमिस्ट्री में अच्छा था इसलिए वो केमिस्ट्री में मेरी हेल्प कर दिया करता था।
क्योंकि अभी एग्जाम नजदीक थे और 2-3 चैप्टर ऐसे थे जिनमे मुझे अजित की हेल्प चाहिए। और अजित ने मुझसे कहा भी था की कल हम साथ साथ बैठकर
केमिस्ट्री के चैप्टर्स डिस्कस करेंगे। अगले दिन मैं कॉलेज के कॉमन रूम में बैठा हुआ अजित का इंतजार करता रहा था अजित का इंतजार करते - करते 11 से 2 और 2 से 5 बज गये पर अजित नही आया। इसके बाद अगले दिन भी ऐसा ही हुआ मैं हैरान था की अजित क्यों नही आया और अगर उसे नही आना था तो उसने मुझे बताया क्यों नही।
जब मैं कॉमन रूम में बैठकर अजित का इंतजार कर रहा था उस वक्त विक्की जोकि मेरा क्लासमेट था वो भी वहीं था उसने मुझसे कहा की इस वक्त हर एक स्टूडेंट यही चाहता है की एग्जाम में वही सबसे बेहतर करे और बाकी सारे उससे पीछे रहे। फिर भले ही कोई किसी का फ़्रेंड भी हो पर अभी वो सिर्फ अपने लिए ही सोचेगा। इतना कहकर विक्की चला गया।
विक्की की बातो का मेरे दिमाग पर कहीं न कहीं असर हो गया था इसलिए तो मैं ये सोचने लगा की हो सकता है अजित जानबूझकर नही आया वो नही चाहता हो की मेरा रिजल्ट उससे बेहतर हो। हम चाहे कितने भी अच्छे दोस्त हो पर कभी एक पल ऐसा आ जाता है जहाँ हम स्वार्थी होकर सिर्फ अपने बारे में सोचते है। हम अपने दोस्त की मदद कर तो सकते है पर नही करते क्योंकि हमे डर होता है उसके हमसे आगे निकल जाने का। बस मैं यही सब सोचता रहा और मैंने मान लिया के अजित ने भी शायद यही सोचा होगा। मैं मन ही मन उससे नाराज हो गया।
इसके बाद अजित ने फोन पर मुझसे बात करने की कोशिश की पर मैं उससे बात नही करना चाह रहा था क्योंकि मैं उससे नाराज था। लेकिन सात दिन बाद जब अजित कॉलेज आया तब उसने मुझे मनाने की बहुत कोशिश की पर मैं अपनी नाराजगी के चलते उसकी बात सुनने की कोशिश ही नही कर रहा था लेकिन फिर  आखिरकार मैंने उसकी बात सुनी और उसने मुझे बताया की वो कॉलेज क्यों नही आ पाया। दरसल उसे किसी जरूरी काम से अपने शहर अपने घर जाना पड़ा था वो इतनी जल्दी में गया था की वो मुझे कुछ बताकर भी न जा सका। पर उसका जाना जरूरी था। अजित की बात सुनने के बाद मुझे लगा की मैं बेवजह ही अजित से नाराज हो गया था और अजित जोकि ये मान रहा था की मैं उससे इसलिए नाराज हूँ क्योंकि वो बिना बताये चला गया था और मैं दिनभर बैठकर उसका इंतजार करता रहा। बस इसलिए जब वो वापस आया तब वो अपने नाराज फ़्रेंड यानी मेरे लिये एक बहुत ही सुन्दर वॉच लाया था मुझे मनाने के लिए। अजित की दी हुई वॉच अभी भी मेरे पास है। अजित मेरा बहुत ही अच्छा दोस्त था बस मेरा ही भरोसा डगमगा गया और मैं उसे गलत समझ बैठा। अजित और मेरी दोस्ती आज भी वैसी ही बरकरार है बस मिलना जरा कम हो पता है क्योंकी हम दोनो अलग - अलग शहर में रहते है।
ऐसा अक्सर हो जाता है की हम बिना पूरी बात जाने अपनो से नाराज हो जाते है और उन्हें पता भी नही होता। पर उस वक्त से मैंने ये जान लिया था की बिना पूरी बात जाने अपने दिनाग में चल रही बातो को सच मानकर किसी से नाराज हो जाना पूरी तरह गलत है।









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