सबकी की नजरे बॉस के केबिन पर टिकी हुई थी तेज कदमो से चलते हुए पावनि केबिन से बाहर आई और जाकर अपनी चेयर पर बैठ गई। गुस्से से लाल चेहरा आँखो में आया पानी और उसकी खामोशी ये इस बात का इशारा कर रही थी कि आज फिर पावनि का बॉस से झगड़ा हो गया। पावनि यहाँ एक साल से जॉब कर रही है उसे यहाँ के वर्कर्स के लिए बनाये गये रूल्स सही नही लगते और इसी बात को लेकर उसका बॉस से झगड़ा हो जाता है। पावनि अब और यहाँ जॉब नही करना चाहती लेकिन न चाहते हुए भी उसे यहाँ जॉब करना पड़ रहा है क्योंकि वो मजबूर है।
इस वक्त पावनि को जॉब की सख़्त जरूरत है इसलिए
जब तक कोई दूसरी अच्छी नौकरी नही मिल जाती उसे मजबूरन यहाँ जॉब करनी पड़ेगी।
मजबूर , ऐसा लगता है जैसे इस शब्द का कोई रिश्ता सा हो पावनि से। क्योंकि हर बार ये मजबूर शब्द उसके जीवन में आ ही जाता है।
पावनि की फैमली में यूँ तो सब कुछ अच्छा था बस उसके पिता थोड़े पुराने ख्यालात के थे पावनि को अपने घर में कभी वो आजादी नही मिल सकी जो वो चाहती थी। घर के वो नियम जो उसे कभी सही लगे ही नही मजबूर होकर पावनि को मानने ही पड़ते थे
पावनि को मन ही मन गुस्सा तो बहुत आता था पर वो कुछ कह नही सकती थी क्योंकि यहाँ कुछ कहना यानी अपने लिए एक बड़ी समस्या को न्यौता देने जैसा था। इसलिए पावनि चुप रही।
पावनि का ग्रेजवेशन कम्प्लीट होते ही पावनि की शादी हो गई। पावनि इस वक्त शादी नही करना चाहती थी पर उसे करनी पड़ी। क्योंकि ये उसके परिवार का फैसला था परिवार के फैसले के आगे मजबूर हो नाखुश मन से वो उस रिश्ते में बंध गई जिसके लिए वो तैयार ही नही थी। पावनि अपनो के साथ-साथ अपनी
ख्वाईशो को भी मायके में छोड़ ससुराल आ गई।
ससुराल में उसका सबके साथ रिश्ता अच्छा था। पर अभी भी उसके मन में ये विश्वास नही आया था की वो अपनी मन की बातो को अपने पति के साथ साझा कर सकती है। खेर धीरे-धीरे वो विश्वास बनने लगा था और पावनि के मन की दबी सी ख्वाईशें एक बार फिर से अपनी जगह बनाने लगी थी।
पर आने वाले वक्त का हमे पता नही होता कि हमारी जिन्दगी में क्या होने वाला है एक दुर्घटना ने पावनि की ख्वाईशो को पूरी तरह खत्म कर दिया। पावनि के पति का एक्सीडेंट हो गया घर की जिम्मेदारी अब पावनि पर थी पावनि पढ़ी लिखी जरूर थी पर जमाने से परिचित नही थी। इसलिए उसे नौकरी में थोड़ी परेशानियो का सामना करना पड़ा। उसे इस ऑफिस के रूल्स सही लगे या ना लगे या ना चाहते हुए भी अभी उसे ये जॉब करनी ही होगी क्योंकि इस वक्त पावनि अपने हालत से मजबूर है।
जब हम हालात से मजबूर होते है तब हम जो नही करना चाहते ना चाहते हुए भी हमे वो करना पड़ता है
लेकिन इसका मतलब ये नही की हम हर वक्त ही मजबूर रहेंगे। वक्त बदलता है और उसके साथ सब कुछ ठीक भी हो जाता है।
पावनि का वक्त भी जल्द ही बदलेगा। पावनि के पति की तबियत में सुधार हो रहा है और जल्द ही पावनि की लाइफ में सब कुछ ठीक भी हो जायेगा। और तब पावनि किसी भी वजह से मजबूर नही रहेगी।

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