जब भी हम अपने किसी रिश्तेदार या किसी दोस्त से मिलते है तो वे ये सवाल जरूर करते है की - क्या चल रहा है आज कल। मतलब ये की आज कल आपकी लाइफ में क्या हो रहा है। अभी कल की ही बात है
सुबह- सुबह मैं वॉक पर गया था लौटते वक्त मुझे रास्ते में मिश्रा अंकल मिल गये। अंकल कहने लगे
अरे भई विपुल बडे दिनों बाद दिखे। कैसे हो ?
मैंने कहा अंकल मैं बिल्कुल ठीक हूँ। अंकल ने फिर
पूछा क्या चल रहा है आज कल। मैने उत्तर देते हुए कहा आपके आशीर्वाद से सब ठीक चल रहा है।
अंकल ने कुछ देर मुझसे बात की और फिर चले गये। मैं भी घर आ गया बाहर का गेट खोलकर अंदर जा रहा था की आवाज आई। भाई साहब ओ विपुल भाई साहब मैंने पीछे पलट कर देखा हमारे पड़ोसी विजयदास थे कहने लगे कहाँ गायब रहते है दिखते ही नही क्या चल रहा है आज कल। मैंने कहा सब बढ़िया। ये कहकर मैं सीधे घर में आ गया।
शाम को हमे एक बर्थडे पार्टी में जाना था मैं ,मेरी वाइफ और मेरा बेटा हम पार्टी में पहुँचे। क्योंकि पार्टी रिश्तेदार के घर थी तो वहाँ और अन्य रिश्तेदारों का मिल जाना कोई आश्चर्य की बात नही थी। एक के बाद एक कई रिश्तेदारों से मुलाकात हुई।
सबसे पहले मौसीजी मिल गई मेरी मौसी नही मेरी माँ की मौसी। मौसी की काफी उम्र हो चली है अब तो उन्हें ठीक से सुनाई भी नही देता इससे समस्या ये होती है की वो तो अपनी बात कह देती है और हमारी कुछ भी
नही सुनती। वो मुझसे हालचाल पूछ रही थी मैं उन्हें तेज आवाज में कह रहा था सब ठीक है, सब ठीक है पर उन्हें है की कुछ सुनाई ही नही दे रहा था उल्टा वो मुझसे बार - बार कह रही थी क्या हालचाल है कुछ कह क्यों नही रहे बेटा। मेरा तो गला ही सुख गया और मौसीजी को कुछ सुनाई ही नही दिया। और कुछ न कहते हुए मैं पार्टी में आये मेहमानों के बीच जाकर बैठ गया। मैं जहाँ बैठा था वही आगे वाली कुर्सी पर
मौसाजी बैठे थे माँ के मौसा जी नही मेरे मौसाजी।
मुझे देखते ही मौसाजी बोले विपुल बेटा कैसे हो आजकल मैने मौसाजी के पैर छुकर आशीर्वाद लिया और कहा ठीक हूँ मौसाजी। मौसाजी यूँ तो मन के अच्छे है पर उन्हें दुसरो के जीवन के बारे में जानने की बड़ी उत्सुकता रहती है कि किसके जीवन में क्या चल रहा है। मुझसे भी मौसाजी पूछ रहे थे क्या चल रहा है आज कल। घर, नौकरी सब ठीक ठाक चल रहा है के नही। कोई समस्या हो तो बताओ।
मैंने नम्रता के साथ कहा हाँ मौसाजी सब ठीक है। कुछ देर तक मौसाजी ने यहाँ- वहाँ की बाते की और फिर उठकर कही चले गये। पर मैं वही बैठा रहा। कुछ पल
शांति से बैठा था की मेरा चचेरा भाई आ गया। उसने
भी मुझसे मेरे आजकल के बारे में जाना। और फिर वो मुझे पार्टी में आये सभी रिश्तेदारों से मिलाने ले गया सभी ने मुझसे मेरे आजकल का हाल जाना। फिर मैंने भी उनसे पूछ ही लिया क्या चल रहा है आजकल।
पर जब मैं घर आया तो रात को मैं आजकल के बारे में ही सोचता रहा और आज भी सुबह उठकर मैं इसी विषय के बारे में सोच रहा हूँ। ये आजकल कितना विशेष है हर व्यक्ति आजकल को ही जानना चाह रहा है। हर किसी व्यक्ति की जबान पर आजकल ही है।
पता है ये क्यों है क्योंकि हमे अपने आजकल से ज्यादा दूसरे के आजकल को जानने में बड़ी रुचि है। मैं तो
थक ही गया कल अपने आजकल का हाल बताते अब यही सोच रहा हूँ की हे भगवान अब कोई न पूछे की क्या चल रहा है आजकल।
पर जब ऑफिस पहुँचा तब मेरे पहुँचते ही ऑफिस के एक साथी ने पूछ ही लिया विपुल जी कुछ दिनों से आपसे बात ही नही हुई क्या चल रहा है भई आजकल।
तब मैंने कहा जी सब बढ़िया है आजकल।

No comments:
Post a Comment