नमस्कार , दोस्तो आज से मैं अपना ब्लॉग लेखन शुरू कर रही हूँ अपने ब्लॉग के जरिये मैं जीवन से जुड़ी कुछ कहानिया कुछ किस्से व रोचक घटनाये साझा करने वाली हूं आशा करती हूं आपको पसंद आयेगी। दोस्तो सभी बच्चो को गर्मियो की छुट्टियों का इंतजार होता है क्योकि उन्हें मामा, बुआ ,दादा-दादी के पास छुट्टिया बिताने का मोका जो मिलता है ये कहानी भी ऐसे दो बच्चो की है मीरा और अभिषेक जो अपनी वार्षिक परीक्षा खत्म होने के बाद मिलने वाली छुट्टियों को लेकर खुश थे मीरा और अभिषेक को माँ मीरू और अभि कहकर पुकारा करती थी मीरू अभि से बड़ी थी इसलिये अभि मीरू को दीदी कहकर पुकारा करता था मार्च का महिना था परीक्षा समाप्त हो चुकी थी शाम के खाने के बाद मीरू ओर अभि दोनो झूले पर बैठे हुए बाते कर रहे थे के इस बार वे कहा जाने वाले है मीरू अभि से कुछ कहने वाली होती है तभी माँ आकार कहती है इस बार तुम दादी के पास गाँव जाने वाले हो माँजी का बोहोत मन है के इस बार तुम छूट्टीयो मे उनके पास रहो। मीरू और अभि चेहेक उठे की वे दादी के पास जाने वाले है रात को सोते वक़्त भी वह सोचते रहे की गाँव मे दादी के साथ कितना मजा आने वाला है यह सोचते -सोचते उनकी आँख लग गई। और अगले दिन ही सुबह पिताजी मीरू और अभि को लेकर गांव के लिए निकल गये । गांव जाते समय दोनो ही बच्चे बस की खिड़की से बाहर देखते जा रहे थे बाहर का दृश्य उन्हें लुभावना लग रहा था कभी पहाड़ तो कही हरियाली नजर आ रही थी सड़क किनारे बने कबेलू के घर यह सब देख उन्हें कुछ नया सा लग रहा था देखते-देखते सफर खत्म हो गया और वे गांव आ पहुचे । बस से उतरते ही वे तेज कदम बढाये दादी के घर की ओर चले जा रहे थे घर पहुचते ही अभि ने जोर से आवाज लगाई दादी दादी देखो हम आ गये ।फिर क्या था आवाज सुन दादी भी झटपट बाहर आई । बच्चो को देखते ही स्नेहपूर्वक गले से लगा लिया और उन्हें दुलारने लगी ।मीरू अभि के पिताजी ने अपनी माँताजी के पैर छुकर आशीर्वाद लिया और कुछ समय उनके साथ व्यतीत किया व रात रुक्कर अगली सुबह शहर चले गये।पिताजी के जाते ही मीरू अभि, दादी से गांव में घुमाने लेजाने की जिद करने लगे दादी ने भी तुरंत हाँ कर दी । अब क्या था हर रोज मीरू ओर अभि का मौज-मस्ती में बितने लगा वे कभी गांव की सैर करते तो कभी हाट घूमने जाते । आज तो दोनो दादी के साथ खेत पर गये थे पहेली बार उन्होंने फसल कटते देखी महुए भी खाये वाह क्या मीठा स्वाद है यह कह दोनो मुस्कूरा दिये।अब तो मीरू और अभि के नये दोस्त भी बन गये थे जिनके साथ सितोलिया खेलना , बगीचों में जाकर आम तोड़ना ,नीम के पेड़ो पर झूला झूलना सबके साथ मेला देखने जाना ,कटपुतली का नाच देख खुश होनो ,रंग बिरंगे गोले खाना इस तरह से दोनो के दिन गुजर रहे थे गाँव की शांत सुबह देखना कोयल की मधुर आवाज सुनना शीतल मंद हवा का साथ सबका आँगन में इकट्ठा होकर बैठना बतियाना ,दादी के हाथ का बना शीरा मजे से खाना। दादी से रोज नई कहानियां सुनना । इस तरह दिन बितते रहे ओर छुट्टियां कब खत्म हो गई पता ही नही चला ओर वापस शहर जाने का समय गया। मीरू और अभि दोनो खुश थे की उनकी ये छुट्टिया आन्नद बारी रही। जो भी समय यहा बिताया उसमे बहुत कुछ देखा और जाना । दादी के प्यार को मन में बसाये बिताये पलो की सारी यादो को लिए हस्ते मुस्कुराते मीरू और अभि वापस शहर चले गये!☺️😊
गर्मियो की छुट्टिया
नमस्कार , दोस्तो आज से मैं अपना ब्लॉग लेखन शुरू कर रही हूँ अपने ब्लॉग के जरिये मैं जीवन से जुड़ी कुछ कहानिया कुछ किस्से व रोचक घटनाये साझा करने वाली हूं आशा करती हूं आपको पसंद आयेगी। दोस्तो सभी बच्चो को गर्मियो की छुट्टियों का इंतजार होता है क्योकि उन्हें मामा, बुआ ,दादा-दादी के पास छुट्टिया बिताने का मोका जो मिलता है ये कहानी भी ऐसे दो बच्चो की है मीरा और अभिषेक जो अपनी वार्षिक परीक्षा खत्म होने के बाद मिलने वाली छुट्टियों को लेकर खुश थे मीरा और अभिषेक को माँ मीरू और अभि कहकर पुकारा करती थी मीरू अभि से बड़ी थी इसलिये अभि मीरू को दीदी कहकर पुकारा करता था मार्च का महिना था परीक्षा समाप्त हो चुकी थी शाम के खाने के बाद मीरू ओर अभि दोनो झूले पर बैठे हुए बाते कर रहे थे के इस बार वे कहा जाने वाले है मीरू अभि से कुछ कहने वाली होती है तभी माँ आकार कहती है इस बार तुम दादी के पास गाँव जाने वाले हो माँजी का बोहोत मन है के इस बार तुम छूट्टीयो मे उनके पास रहो। मीरू और अभि चेहेक उठे की वे दादी के पास जाने वाले है रात को सोते वक़्त भी वह सोचते रहे की गाँव मे दादी के साथ कितना मजा आने वाला है यह सोचते -सोचते उनकी आँख लग गई। और अगले दिन ही सुबह पिताजी मीरू और अभि को लेकर गांव के लिए निकल गये । गांव जाते समय दोनो ही बच्चे बस की खिड़की से बाहर देखते जा रहे थे बाहर का दृश्य उन्हें लुभावना लग रहा था कभी पहाड़ तो कही हरियाली नजर आ रही थी सड़क किनारे बने कबेलू के घर यह सब देख उन्हें कुछ नया सा लग रहा था देखते-देखते सफर खत्म हो गया और वे गांव आ पहुचे । बस से उतरते ही वे तेज कदम बढाये दादी के घर की ओर चले जा रहे थे घर पहुचते ही अभि ने जोर से आवाज लगाई दादी दादी देखो हम आ गये ।फिर क्या था आवाज सुन दादी भी झटपट बाहर आई । बच्चो को देखते ही स्नेहपूर्वक गले से लगा लिया और उन्हें दुलारने लगी ।मीरू अभि के पिताजी ने अपनी माँताजी के पैर छुकर आशीर्वाद लिया और कुछ समय उनके साथ व्यतीत किया व रात रुक्कर अगली सुबह शहर चले गये।पिताजी के जाते ही मीरू अभि, दादी से गांव में घुमाने लेजाने की जिद करने लगे दादी ने भी तुरंत हाँ कर दी । अब क्या था हर रोज मीरू ओर अभि का मौज-मस्ती में बितने लगा वे कभी गांव की सैर करते तो कभी हाट घूमने जाते । आज तो दोनो दादी के साथ खेत पर गये थे पहेली बार उन्होंने फसल कटते देखी महुए भी खाये वाह क्या मीठा स्वाद है यह कह दोनो मुस्कूरा दिये।अब तो मीरू और अभि के नये दोस्त भी बन गये थे जिनके साथ सितोलिया खेलना , बगीचों में जाकर आम तोड़ना ,नीम के पेड़ो पर झूला झूलना सबके साथ मेला देखने जाना ,कटपुतली का नाच देख खुश होनो ,रंग बिरंगे गोले खाना इस तरह से दोनो के दिन गुजर रहे थे गाँव की शांत सुबह देखना कोयल की मधुर आवाज सुनना शीतल मंद हवा का साथ सबका आँगन में इकट्ठा होकर बैठना बतियाना ,दादी के हाथ का बना शीरा मजे से खाना। दादी से रोज नई कहानियां सुनना । इस तरह दिन बितते रहे ओर छुट्टियां कब खत्म हो गई पता ही नही चला ओर वापस शहर जाने का समय गया। मीरू और अभि दोनो खुश थे की उनकी ये छुट्टिया आन्नद बारी रही। जो भी समय यहा बिताया उसमे बहुत कुछ देखा और जाना । दादी के प्यार को मन में बसाये बिताये पलो की सारी यादो को लिए हस्ते मुस्कुराते मीरू और अभि वापस शहर चले गये!☺️😊
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Very nice and a simple story
ReplyDeleteBhot achchi story h☺
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