अंजाना रास्ता



दोस्तो हम सभी कभी ना कभी ऐसे अंजाने रास्ते से गुजरते है जिससे हम बिल्कुल  भी परिचित नही होते है। वह हमारे लिए पूरी तरह अंजाना होता है।आज कि कहानी ऐसे ही रास्ते से जुड़ी हुई है। ये कहानी सोनिका की है। सोनिका बी.ए. की छात्रा है। सोनिका बिल्कुल वैसी है जैसी उन्नीस से बीस वर्ष की छात्राए होती है। कभी बिल्कुल निडर ,तो कभी थोड़ा डर, कभी बड़ बोली, तो कभी शांत सहज गंभीर। ये तो सोनिका का परिचय था।हाँ तो अब कहानी पर आते है।ये उस दिन की बात है जब सोनिका कॉलेज जाने के लिए तैयार हो रही थी सोनिका की माँ अपने कार्य में व्यस्त थी घड़ी में साढ़े दस बज रहे थे। तभी टेलिफोन की घण्टी बजती है।माँ आकार फोन उठाती है। फोन सोनिका की सहेली रुचि का था। माँ ने सोनिका को बुलाया और फोन सोनिका के हाथ में दे दिया। सोनिका ने रुचि से बात की। रुचि ने बताया की वो आज कॉलेज नही आ पायेगी ।उसकी दादी की तबियत खराब है।रुचि कहती है की मैडम ने जो लेखन कार्य मुझे दिया था वह पूरा हो गया है आज ही उसे मैडम के पास जाकर देना है क्या? तुम ये काम कर दोगी । सोनिका ना नही कह सकी। रुचि का घर का पता ले माँ को सारी बात  बता कर सोनिका रुचि के घर के लिए अपनी स्कूटी लिये निकल गई जो की आदेश नगर में था। सोनिका  ने आदेश नगर कभी नही देखा था उस रास्ते वह कभी नही गई थी। उसके लिए वह अंजाना रास्ता था ।रुचि के बताये पते के अनुसार सोनिका जैसे ही आदेश नगर के रास्ते पर बढ़ी शुरुआती रास्ता काफी सुनसान था।सड़क के दोनो ओर घने पैड़ ही पैड़ सड़क पर सोनिका के अलावा कोई ओर नजर ही नही आ रहा था।सड़क भी कच्ची थी सोनिका को तो ऐसा लगा जैसे की वो जंगल में आ गई हो।कुछ दूर पहुचने पर सोनिका को एक व्यक्ति आते दिखाई देता है जो देखने में थोड़ा डरावना सा लग रहा होता है।अपनी लाल बड़ी-बड़ी आँखो से घूरते हुए।वह चलकर सोनिका के नजदीक आता है सोनिका थोड़ा सेहम जाती है वह सोनिका से पूछता है मैडम क्या आप इस रास्ते पर जा रही है ? सोनिका सिर्फ अपना सर हिलाकर हाँ का इशारा करती है। यह रास्ता थोड़ा कठिन है सम्हल कर जाना।लोग जाते तो दिखते है पर आते नही दिखते। ऐसा कहकर वह व्यक्ति चला जाता है। यह सुन सोनिका कुछ पल थम सी जाती है।शायद  वह कुछ सोचने लगती है। वह क्या सोच रही थी पता नही।लेकिन वह अपने रास्ते पर आगे जरूर बढ़ती है।कुछ दूर पहुचने पर सोनिका को एक घर नजर आता है घर दिखने मे सुन्दर लेकिन सुनसान होता है ऐसा लगता है जैसे शायद ही इस घर में कोई रहता होगा।ज्योही सोनिका घर के सामने से निकलती है उसे पीछे से एक आवाज आती है।मानो कोई सोनिका को रुकने के लिए केह रहा हो।सोनिका पलटती नही है सोनिका अब डर चुकी होतीहै वह तेज गति से आगे जाने लगति है।इतने में ही अचानक एक कार आती दिखाई देती है वह सोनिका की ओर आ रही होती है।सोनिका घबरा जाती है उसकी साँसे तेज तेज चलने लगति है घबराई डरी सी सोनिका कुछ सोच समझ नही पाती है। तब ही सोनिका के कानो के पास जोर जोर से आवाज आती है यह आवाज अलार्म की होती है घड़ी में सुबह केआठ बज चुके होते है सोनिका अब नींद से जाग चुकी होती है ओर एक गहरी साँस लिए कहती है।हे भगवान यह सपना था।                                           

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