गहरा घना जंगल जहाँ पेड़ो की पत्तियों पर ठहरा हुआ पानी ये बता रहा था कि बारिश होकर यहाँ कुछ वक्त पहले ही थमी है। पैरों की आहट किये बिना मैं होले से आगे बढ़ा और इस खूबसूरत सी नन्ही गौरैया को अपने कैमरे में कैद कर लिया। फुलों की , पत्तियों की, तितलियों की, मैं एक के बाद एक बहुत फ़ास्ट फ़ोटो क्लिक करता जा रहा था। कुछ देर तक यहाँ - वहाँ घूमकर मैंने और भी कई फोटोज़ क्लिक की। लेकिन काले गरजते बादलों का इशारा होते ही मैं और अविनाश वहाँ से निकल गए। हम गाड़ी में बैठे ही थे कि जोरों की बारिश होना शुरू हो गई। अविनाश गाड़ी ड्राइव कर रहा था और मैं उसके बगल वाली सीट पर बैठा था खिड़की से पानी अंदर आ रहा था तो मैंने काँच ऊपर चढ़ा लिया। बारिश की बूंदे शीशे पर पड़ती और बेह जातीं तेजी से पड़ती इन बूंदों की वजह से शीशे से कुछ दिख नही रहा था पर मैं फिर भी देखने की कोशिश कर रहा था सब कुछ धुंधला सा नजर आ रहा था कभी - कभी हम अपने अंदर भी कुछ देखने की कोशिश करते है कुछ तलाशते है पर वो साफ नजर नही आता धुंधला सा पड़ जाता है मैं यादों में कहीं खोने लगा था कि अविनाश ने गाड़ी रोक दी तेज़ बारिश अब हल्की फुआरों में बदल गई थी। अविनाश ने गाड़ी टी स्टॉल के पास रोकी वैसे मुझे चाय ज्यादा पसंद नही है पर अविनाश चाय का शौकीन है मेरे मना करने पर भी उसने मेरे लिए चाय बुलावा ली। हमारी टी स्टॉल फ़ेमस है सर एक बार चाय पियेगें तो टेस्ट भूल ना पायेंगे कहते हुए चाय वाले भईया ने कुल्हड़ हमारे हाथ मे थमा दिए। कुल्हड़ में चाय का टेस्ट अलग ही आता है। है ना अविनाश ने मेरी ओर देखते हुए कहा मैंने हाँ में सिर हिला दिया। चाय के दीवानों से पूछो की चाय क्या चीज़ है और कुल्हड़ में तो चाय का टेस्ट ही अलग है किसी की कही ये बातें मेरे कानों में गूंज उठी। तेजस चलें अविनाश ने कहा हम होटेल के लिए निकल गए खिड़की से मेरे चेहरे पर पड़ते ठंडी हवा के खोंके मेरी धुँधली हो चुकी यादों पे से जैसे पर्दा हटा रहे थे हम जा तो होटेल ही रहे थे पर मेरा मन किसी और रास्ते निकल पड़ा। हमारे दिल मे न जाने कितने राज़ होते है जिन्हें हम सबसे तो छुपा लेतें है पर खुद से नही छुपा पाते। एक सच जिससे हम भाग रहे होते है पर वो हर पल हमारे साथ होता है।
होटेल पहुँचने के बाद मैंने अपने मन को बहलाने की बहुत कोशिश की पर ऐसा हो ना सका। मैंने अपना फोटोग्राफी वाला बैग उठाया अलग - अलग तरह के कैमरे कुछ फोटोग्राफ्स और मेरी डायरी। मैं जहाँ भी जाता हूँ ये सब साथ लेकर चलता हूँ।
मैंने डायरी के उस पन्ने को खोला जब मैं शिमला गया था। इस पन्ने पर लगी ये फोटो बहुत खास है मेरी अभी तक कि ली हुई तस्वीरों में सबसे खूबसूरत।
तब मैं शिमला घूमने गया था अलग - अलग जगहों पर घूमना और फोटोग्राफी करना मेरा शौक है। हम दोनों दोस्त यानी मैं और अविनाश गये तो साथ में थे पर कुछ अर्जेंट काम की वजह से अविनाश को शिमला से दूसरे ही दिन लौटना पड़ा। पर मैं वही रहा क्योंकि मुझे तो शिमला घूमना था। दो दिनों में मैंने शिमला पूरी तरह तो नही देखा पर शिमला रिज़, मॉल रॉड , ग्रीन वेली और भी कुछ जगाहों की सैर करली थी।आज शिमला में मेरा ये तीसरा दिन है शिमला की खूबसूरती को करीब से देखने मैं सुबह जल्दी अपने होटेल से पैदल ही निकल पड़ा। देवदार के पेड़ , बर्फ से ढके पहाड़, नीला आसमान और रोशनी बिखेरता सूरज सब कुछ बहुत सुंदर था। पैदल चलते हुए मैं थोड़ा दूर आ पहुँचा और थक भी गया इसीलिए जब चाय की शॉप नजर आई तो यहाँ आकर बैठ गया। चाय पीते हुए मैं कैमरे में अभी की ली हुई तस्वीरे देख रहा था कि मेरी आँखों पर कुछ चमका मेरे सामने अभी - अभी एक लड़की आकर बैठी जिसके गले का स्टार वाला लॉकेट मेरी आँखों पर चमक रहा था मैं अपनी जगह से थोड़ा आगे शिफ्ट होकर बैठ गया और दोबारा अपने कैमरे में देखने लगा पर अब मेरा ध्यान भटकर उस लड़की की बातों पर अटक गया। तुझे पता है मैं घर से भी चाय पीकर आ रही हूँ पर जब तक ये कुल्हड़ वाली चाय न पियूँ तो चाय का मज़ा ही नही आता और वो रेड दुप्पटा उसे धोते ही उसका पूरा प्रिंट निकल गया चलेंगे वो शॉप वाले भईया से लड़ाई करने। दुप्पटे का प्रिंट ये तो ऐसे बोल रही थी जैसे दुप्पटे का प्रिंट नही मानो दुनिया की वो चमक ही चली गई हो जिससे दुनिया खूबसूरत लगती है मैं ये सोचने लगा और वो फिर अपनी सहेली से बोली। कितनी बातें कर रहे थे ऐसा दुपट्टा वैसा दुपट्टा और देखा तूने कैसा निकला दुपट्टा। कितना बोले जा रही थी वो और मुझे उसकी बातों पर हँसी आ रही थी क्योंकि मैं चोरी से उसक चेहरे की तरफ भी देख रहा था उसके चेहरे के एक्सप्रेशन इतने कमाल के थे कि जिसे देख मेरी हँसी रुक ही न सकी और मैं ज़ोर से हँस पड़ा। मेरे ऐसे हँसने पर वो और उसकी सहेली दोनों मुझे घूरने लगी मैं डर गया कि कहीं शॉप वाले को छोड़ ये मुझसे ही न झगड़ बैठे पर जैसे ही वो मुस्कुराई तो बच गये मन मे कहते हुए मैंने लम्बी साँस खींची। अब मेरे दिमाग मे कुछ चल रहा था पूछूँ या न पूछूँ पूछ ही लेता हूँ आप शिमला से है मैंने पूछा तो उसने जी हाँ कहते हुए सवाल किया पर आप क्यों पूछ रहे है वैसे आप तो यहाँ के नही लगते। हाँ मैं शिमला घूमने आया हूँ यहां की कुछ फेमस प्लेसेस तो मैंने देख लिए है पर और भी तो अच्छी - अच्छी जगहें होंगी जहाँ मैं जा सकता हूँ मैंने कहा। हाँ बिल्कुल है कहते हुए उसने दो - तीन जगहों के नाम मुझे बता दिये। फिर मैंने एक - दो सवाल और किये और उसने उसका जवाब दिया फिर मैंने और पूछा , और उसने फिर बताया वो अपने शहर की तारीफ़ करे जा रही थी ठीक वैसे ही जैसे एक बच्चा अपने घर की तारीफ करता है मेरे घर मे ये भी है ऐसा भी है हाँ। उसका उसके शहर के लिए लगाव उसकी बातों में साफ नज़र आ रहा था। आधे घन्टे तक हम ऐसे ही बात करते रहे और फिर अचानक उसे कुछ याद आया और वो चली गई। आज में दिनभर खूब घुमा उसने जितनी तारीफ की थी वाकई हर एक जगह उतनी ही खूबसूरत थी।
अगले दिन मैं फिर उस चाय शॉप पर गया मेरी नींद जरा देर से खुली पता नही वो मिलेगी भी के नही। मैं जब पहुँचा तो बालों का जुड़ा बनाये हाथ में कुल्हड़ थामे बैठी थी वो वहाँ अपनी सहेली के साथ। हाय मैंने कहा अरे आप! वो पूछते हुए बोली। हाँ मुझे यहाँ की चाय अच्छी लगी इसलिए आज भी आ गया और आपको थैंक्स कहना चाहता था इसलिए भी।
थैंक्यू मुझे यहां के और भी प्लेसेस के बारे में बताने के लिये।
वो हल्की सी मुस्कुराई और कुछ नही बोली।
मैंने अपनी चाय ली और बैठकर आगे की प्लानिंग करने लगा क्या- क्या बाकी रह गया, और कहाँ जाना है, क्या लेना मैं सोचने लगा। तो आपने घूम लिया शिमला वो बोली , हाँ पर यहाँ का मार्केट अभी अच्छे से देखना चाहता हूँ कुछ और भी प्लेसेस घूमना चाहता हूं वैसे आप बुरा न माने तो आपका नाम जान सकता हूँ मैंने पूछा
प्यारी सी मुस्कुराहट के साथ उसने कहा तारा। तारा यानी स्टार नाइस नेम आय एम तेजस। ओह तेजस वो इस तरह बोली जैसे मेरे नाम से अच्छी तरह परिचित हो।
वैसे हम भी मार्केट जाने वाले है तारा की सहेली बोली ओह ग्रेट तो क्या मैं आप लोगो को जॉइन कर सकता हूँ दरसल मुझे फैमिली और फ्रेंड्स के लिए गिफ्ट्स भी लेने है तो शायद मेरी थोड़ी हेल्प हो जाए । तारा और उसकी फ्रेंड दोनों ने एक दूसरे को देख और फिर हामी भरते हुए अपनी पलके झपका दी।
आज का पूरा दिन फूल एंजॉयमेंट वाला रहा लोअर मार्केट , लक्कड़ बाजार, तिब्बितियन मार्केट, फूड जॉन सबका फूल आनंद लिया और शाम तक तो तारा और उसकी दोस्त नीति
हम काफी घुल मिल गए जैसे कि अच्छे दोस्त हो और हमारी कोई पुरानी पहचान हो।अगले दिन मैं फिर चाय शॉप पर पहुँचा आज तारा अकेली ही चाय पी रही थी नीति वन वीक तक नही आएगी क्योंकि उसके घर मे कोई फैमली फंक्शन है। इसलिए वो अभी क्लासेस भी नही आ पायेगी। तारा ने मुझे बताया। तारा और नीति दोनों ही कॉम्पेटिटिव एग्जाम की तैयारी कर रही है। आज तारा नीति को मिस कर रही थी वैसे ही जैसे मैं अविनाश को कर रहा था। इसलिए उसका मुड़ ठीक करने के लिए मैंने अपने कैमरे में उसे शिमला की कुछ तस्वीरें दिखा दी बड़े ध्यान से वो एक के बाद एक सारी फोटोज़ देखती जा रही थी और मैं उसे। मेरी ट्रिप 5 दिनों की थी लेकिन पता नही क्यों मैं कुछ दिन और रुक गया। अब हर रोज़ की चाय मेरी तारा के साथ ही होती थी कुल्हड़ वाली चाय। तारा के साथ - साथ मैं भी चाय का शौकीन होने लगा था और वो कैमरे की शौकीन। हम देर तक साथ बैठकर बातें करते रहते और न जाने कितनी चाय पी लिया करते। चाय का हर एक घुट लेते हुए मेरे मन को न जाने कौनसी खुशी होने लगी थी। तारा के साथ एक बार फिर मैं शिमला घूमने निकल पड़ा और सब कुछ मुझे पहले से भी ज्यादा खूबसूरत नज़र आ रहा था। तारा न बेहद खूबसूरत थी और न ही स्टालिश। जींस के साथ सिंपल सी कुर्ती , कानो में बड़े से इयररिंग और बालों का जुड़ा कुछ ऐसा ही लुक रहता था उसका। तारा है तो आम लड़कियों जैसी पर उसकी बातें सबसे कुछ अलग ही थी जो मुझे अच्छी लगने लगी थी गरमा- गर्म चाट को चटकारे लेकर खाना
पानी पूरी का तीखा - तीखा पानी पी जाना मॉल की जगह मार्केट में घूम - घूम कर शॉपिंग करना वो भी पूरे मोलभाव के साथ जैसे तारा मैडम सब जानती है, आकाश में पंछियों को उड़ते देखना और शाम को निहारना पसन्द था उसे। शाम के वक्त बादलो का तेज सुनहरा और हल्का लाल रंग जिसके बीच सूरज का सफेद रोशनी के साथ चमकना ऐसा लग रहा था जैसे सुनहरे लाल बादलो के बीच उसे खुशी मिल रही और उस खुशी से वो चमक रहा है। जिसे मैं और तारा साथ मे देख रहे थे। इन सात दिनों में न जाने क्या कुछ बदल गया था मेरा दिल मेरे सपने मेरी आदतें जो कहीं न कहीं तारा से जुड़ने लगीं थी।
होटेल आकर मैं अपने कैमरे में तारा की कुछ तस्वीरें देख रहा था मुस्कुराती हुई , चाय पीती और अलग - अलग एक्सप्रेशन देती हुई मैं उसकी तस्वीरों को देखकर मुस्कुरा रहा था तभी मोबाइल की रिंग बज उठी फोन पर तारा थी। तारा क्या हुआ क्यों कॉल किया पहले खिड़की के पास जाओ। ओके आ गया। अब आसमान में चाँद को देखो और उसके पास वाले तारे को भी हाँ देख रहा हूँ तो बताओ वो दोनों साथ मे कैसे लग रहे है खूबसूरत मैंने तारा से कहा। उसने फिर पूछा वो आसमान वाला तारा तुम्हे ज्यादा पसंद है या फिर मैं। तुम। तारा ने मेरे दिल की बात को एक सवाल से जुबां पर ला दिया था खुश होते हुए तारा ने गुड़ नाइट कहकर फोन रख दिया। लेकिन मैं खिड़की के पास खड़े होकर आसमान में चाँद और तारे को ही देख रहा रातभर। शिमला में आज मेरा लास्ट डे है गुलाबों वाला बुके लेकर मैं तारा से मिलने पहुँचा। रोज़ की तरह वो चाय शॉप पर मेरा इंतज़ार कर रही थी तारा ये तुम्हारे लिए थैंक्स तारा इस अनजान शहर में मेरी इतनी अपनी बन जाने के लिए। उसने फिकी सी मुस्कान के साथ बुके लेकर अपने पास रख लिया आज वो ज्यादा कुछ भी नही बोल रही थी आख़री मुलाकात शायद ऐसी ही होती है जब शब्द हमारे अंदर ही रह जाते है और ज़बान खामोश हो जाती है होता है तो सिर्फ एहसास। मैं तारा से कुछ कहने वाला था कि मोबाइल स्क्रीन पर विशाखा का मैसेज दिखा।
उसके मैसेज को इग्नोर करते हुए मैंने तारा को सब कह दिया अपनी फीलिंग्स अपने जज़्बात और अपना सच।
सच कहना बहुत मुश्किल होता है और उसके दर्द को सह पाना उससे भी मुश्किल। आज पहली बार तारा ने मुझे गले लगाया ये कहते हुए की उसने मुझे माफ़ किया वो मुझसे नाराज़ नही है हम सब दिल के हाथों मजबूर हो जाते है क्योंकि इस पर हमारा कोई ज़ोर नही होता।
शाम को मैं शिमला से निकल गया अपने शहर के लिए लेकिन तारा के साथ बिताए हर लम्हे को मैंने अपने दिल मे कैद कर लिया हमेशा के लिए।
मैंने उसकी हर एक फ़ोटो अपने कैमरे से डिलीट कर दी। बस अपनी डायरी में ये तस्वीर लगा रखी है जिसमें हम दोनों के हाथ नज़र आ रहे है और हाथों में पकड़ा हुआ चाय का कुल्हड़। और उसका ये स्टार वाला लॉकेट आज भी मेरे पास है मैंने तारा को एक स्टार वाला लॉकेट गिफ्ट किया था तब उसने अपने गले से पुराना लॉकेट निकालकर मुझे दे दिया था। अपनी याद के तौर पर।
कभी - कभी सोचता हूँ कि ख़्वाइशों के परिंदे कितने आज़ाद होते है ना। जहाँ चाहे वहीं उड़ जाते है वो हमारी तरह किसी वादे या रिश्तों के आगे मजबूर नही होते बस आज़ाद होते है।
दिल जिसे चाहता है खुद उसकी ओर खीचने लगता है शायद इसीलिए विशाखा से इंगेजमेंट हो जाने के बाद भी मैं तारा से प्यार कर बैठा क्योंकि विशाखा तो कभी मेरे दिल मे थी ही नही। मैंने कभी चाहा ही नही था उसे। वो बचपन की दोस्त थी घर मे सबको पसन्द थी तो बस शादी के लिए हाँ कह दिया। तब नही पता था मुझे की मेरी ज़िंदगी मे कभी तारा भी आएगी और मेरे मन मे इस कदर बस जाएगी के किसी और के लिए वो जगह पाना नामुमकिन हो जाएगा। आज विशाखा मेरी वाइफ़ है जिसकी मैं बहुत केयर करता हूँ लेकिन मेरे दिल मैं सिर्फ़ और सिर्फ़ तारा है एक चमकते तारे की तरह और इस सच को मैं कभी झुठला नही सकता बस इसे छुपाने की पूरी कोशिश करता रहता हूँ।

