पहला प्यार



पहला पहला प्यार है पहली पहली बार है रेडियो पर चल रहे इस गाने को केंटीन वाले भईया भी साथ में गुनगुना रहे थे गाना गाते वक्त उनके चेहरे पर आती दबी सी मुस्कान देख लग रहा था जैसे की भईया को शायद कोई खास याद आ गया।
मैं दो ग्लास चाय पहले ही पी चुका था और तीसरा ग्लास मेरे हाथ में था केंटीन में बैठे हुए मैं विशाल का इंतजार कर रहा था जब केंटीन वाले भैया को गुनगुनाते देखा तो मेरा ध्यान उनकी ओर चला गया।
मैं रोज ही भईया को देखता हूँ पर आज वो अलग ही लग रहे है क्यों ? बस इतना मैंने सोचा ही था की विशाल आ गया।
क्योंकि हम सीनियर्स है इसलिए विशाल और मैंने कॉलेज में होने वाली फ्रेशर्स पार्टी की सारी तैयारी का जिम्मा लिया है और हम दोनो यहाँ केंटीन में बैठकर उसी का डिस्कशन कर रहे है। हम ने सब कुछ तय कर लिया है की अपने जूनियर्स का वेलकम कैसे करना है। एक सप्ताह बाद वो दिन आ ही गया जिसकी तैयारी में मैं और विशाल लगे हुए थे। पार्टी स्टार्ट हुई शुरुआत में कुछ सीनियर्स ने अपने जूनियर्स के लिए अलग -अलग तरह की परफॉमेंस दी। और फिर इसके बाद बारी आई इंट्रो की सभी जूनियर्स ने अपना इंट्रोडक्शन दिया। जिनमे से एक काव्या भी थी
काव्या मेरा पहला प्यार।
उस दिन उसने एंट्री सिर्फ कॉलेज में ही नही की थी बल्कि मेरी जिंदगी में भी की थी। काव्या विशाल की सिस्टर की फ़्रेंड थी विशाल ने फ्रेशर्स पार्टी में मुझे अपनी सिस्टर प्रिया और उसकी फ़्रेंड काव्या दोनो से मिलाया था ये बहुत ही छोटी सी मुलाकात थी मेरी काव्या के साथ।
पर कॉलेज में आते जाते काव्या और मैं एक दूसरे से टकरा ही जाते थे हमारा कॉलेज टाइमिंग मोर्निंग का था और क्योंकि मैं काव्या का सीनियर था तो काव्या मुझे गूड मोर्निंग सर, हैलो सर जरूर कहती थी। शुरू में ये मुझे नॉर्मल ही लगा लेकिन बाद में मुझे
काव्या का गूड मोर्निंग कहना अच्छा लगने लगा था।
और जब कभी वो मुझे नही देख पाती थी तो मैं खुद उसके सामने जाकर उसे अपने सीनियर वाले अंदाज़ में कहता हेलो काव्या। फिर काव्या स्माइल करते हुए
मुझे हेलो कह देती।
ऐसे ही कभी केंटीन कभी लायब्रेरी तो कभी कॉलेज  के सामने वाले पार्क में , मैं और काव्या मिल ही जाते थे  और अब मुझे काव्या से मिलना अच्छा भी लगने लगा था। मैं और विशाल रोज की तरह क्लास के बाद कैंटीन में बैठे हुए थे हम कुछ बात कर रहे थे की सामने प्रिया और काव्या नजर आई उन दोनो को  प्रोजेक्ट तैयार करने को मिला था  प्रिया विशाल से कह रही थी की वो उन दोनो की प्रोजेक्ट बनाने में हेल्प करे पर विशाल एक साथ दोनो की हेल्प कैसे करता इसलिए विशाल ने मुझसे कहा यार तु काव्या की हेल्प कर दे प्लीज़। तब मैंने ऐसे जताते हुए ओके कहा जैसे की मैं विशाल के कहने पर काव्या की हेल्प कर रहा हूँ जबकि मैं खुद भी यही चाहता था
इसके बाद मैं जी जान से काव्या के प्रोजेक्ट में लग गया जैसे की ये मेरा ही प्रोजेक्ट हो। मैंने पूरे वन वीक अपनी क्लास भी अटेंड नही की। जब हम साथ में प्रोजेक्ट तैयार कर रहे थे तब शुरू में काव्या थोड़ी चुप- चुप थी लेकिन धीरे- धीरे उसने बात करना शुरू किया और तब मुझे पता चला के वो कितनी बाते करती है वो लगातार बोलो जा रही थी और मजेदार बात ये थी की मैं भी उसकी सारी बातो को बड़े ही ध्यान से सुने जा रहा था जैसे की कोई खास बात हो जबकि उसकी बातो में कुछ खास बात थी ही नही। मेरी मेहनत और काव्या की बातो के साथ प्रोजेक्ट तैयार हो ही गया पर प्रोजेक्ट तैयार होने पर मुझे थोड़ा दुख हुआ क्योंकि अब रोज मिलने की वजह जो खत्म हो गई थी। तीन दिन हो गये थे मैंने काव्या को देखा भी नही था
इस वक्त मन में हलचल सी मची हुई थी कुछ समझ नही आ रहा था बस काव्या का ख्याल आ रहा था। मैं रोज काव्या की क्लास के सामने से गुजरता बस उसे एक बार देखने के लिए और जब वो दिख जाती तब मैं ऐसे खुश हो जाता जैसे न जाने मैंने क्या पा लिया हो। मैं कुछ बदल गया था अब तो मैं भी केंटीन वाले भईया की तरह गुनगुनाने लगा था और अकेले ही मुस्कुराने लगा था पहले प्यार का एहसास क्या होता है ये अब मैं भी जान गया था। विशाल को भी मेरे हाल के बारे में सब मालूम हो गया था। बस मालूम नही था तो काव्या को। मुझे समझ नही आ रहा था के उससे क्या कहूँ और कैसे कहुँ उसके सामने आते ही मैं अब कुछ बोल ही नही पाता था जबकि उससे बहुत कुछ कहना चाहता था पर मैं कभी काव्या को कह ही नही पाया के वो मेरा पहला प्यार है।
पूरा एक साल बीत गया मेरे हाले दिल की खबर काव्या को भी हो गई थी और आहिस्ता आहिस्ता काव्या के दिल में भी कुछ कुछ होने लगा था और एक दिन काव्या ने मेरा प्यार एक्सेप्ट कर लिया। अब काव्या घन्टो मेरे साथ रहती है और होता ये है कि वो बोलती जाती है और मैं उसे सुनता रहता हूँ। वो बाते करती जाती है और मैं मुस्कुराता रहता हूँ। ऐसा लगता है मुझे जैसे मैं अब उसकी साँसों से जीता हूँ।
और हाँ अब मैं भी अक्सर इस गाने गुनगुनाते रहता हूँ
पहला पहला प्यार है पहली पहली बार है।





मजबूर





सबकी की नजरे बॉस के केबिन पर टिकी हुई थी तेज कदमो से चलते हुए पावनि केबिन से बाहर आई और जाकर अपनी चेयर पर बैठ गई। गुस्से से लाल चेहरा आँखो में आया पानी और उसकी खामोशी ये इस बात का इशारा कर रही थी कि आज फिर पावनि का बॉस से झगड़ा हो गया। पावनि यहाँ एक साल से जॉब कर रही है उसे यहाँ के वर्कर्स के लिए बनाये गये रूल्स सही नही लगते और इसी बात को लेकर उसका बॉस से झगड़ा हो जाता है। पावनि अब और यहाँ जॉब नही करना चाहती लेकिन न चाहते हुए भी उसे यहाँ जॉब करना पड़ रहा है क्योंकि वो मजबूर है।
इस वक्त पावनि को जॉब की सख़्त जरूरत है इसलिए
जब तक कोई दूसरी अच्छी नौकरी नही मिल जाती उसे मजबूरन यहाँ जॉब करनी पड़ेगी।
मजबूर , ऐसा लगता है जैसे इस शब्द का कोई रिश्ता सा हो पावनि से। क्योंकि हर बार ये मजबूर शब्द उसके जीवन में आ ही जाता है।
पावनि की फैमली में यूँ तो सब कुछ अच्छा था बस उसके पिता थोड़े पुराने ख्यालात के थे पावनि को अपने घर में कभी वो आजादी नही मिल सकी जो वो चाहती थी। घर के वो नियम जो उसे कभी सही लगे ही नही मजबूर होकर पावनि को मानने ही पड़ते थे
पावनि को मन ही मन गुस्सा तो बहुत आता था पर वो कुछ कह नही सकती थी क्योंकि यहाँ कुछ कहना यानी अपने लिए एक बड़ी समस्या को न्यौता देने जैसा था। इसलिए पावनि चुप रही।
पावनि का ग्रेजवेशन कम्प्लीट होते ही पावनि की शादी हो गई। पावनि इस वक्त शादी नही करना चाहती थी पर उसे करनी पड़ी। क्योंकि ये उसके परिवार का फैसला था परिवार के फैसले के आगे मजबूर हो नाखुश मन से वो उस रिश्ते में बंध गई जिसके लिए वो तैयार ही नही थी। पावनि अपनो के साथ-साथ अपनी
ख्वाईशो को भी मायके में छोड़ ससुराल आ गई।
ससुराल में उसका सबके साथ रिश्ता अच्छा था। पर अभी भी उसके मन में ये विश्वास नही आया था की वो अपनी मन की बातो को अपने पति के साथ साझा कर सकती है। खेर धीरे-धीरे वो विश्वास बनने लगा था और पावनि के मन की दबी सी ख्वाईशें एक बार फिर से अपनी जगह बनाने लगी थी।
पर आने वाले वक्त का हमे पता नही होता कि हमारी जिन्दगी में क्या होने वाला है एक दुर्घटना ने पावनि की ख्वाईशो को पूरी तरह खत्म कर दिया। पावनि के पति का एक्सीडेंट हो गया घर की जिम्मेदारी अब पावनि पर थी पावनि पढ़ी लिखी जरूर थी पर जमाने से परिचित नही थी। इसलिए उसे नौकरी में थोड़ी परेशानियो का सामना करना पड़ा। उसे इस ऑफिस के रूल्स सही लगे या ना लगे या ना चाहते हुए भी  अभी उसे ये जॉब करनी ही होगी क्योंकि इस वक्त पावनि अपने हालत से मजबूर है।
जब हम हालात से मजबूर होते है तब हम जो नही करना चाहते ना चाहते हुए भी हमे वो करना पड़ता है
लेकिन इसका मतलब ये नही की हम हर वक्त ही मजबूर रहेंगे। वक्त बदलता है और उसके साथ सब कुछ ठीक भी हो जाता है।
पावनि का वक्त भी जल्द ही बदलेगा। पावनि के पति की तबियत में सुधार हो रहा है और जल्द ही पावनि की लाइफ में सब कुछ ठीक भी हो जायेगा। और तब पावनि किसी भी वजह से मजबूर नही रहेगी।




एक चुटकी प्रेम

मार्च बित गया था ठंड के नख़रे अब कम हो गए थे कम क्या यूँ कहें कि अब खत्म ही हो गये थे सूरज के तीखे तेवर जो शुरू हो गये थे। अब गर्मागर्म पकोड़े...

Sonal bhatt MULAKAT-KAHANIYO-SE STORY OF OUR LIFE