नीला आसमा



आसपास शोर दिन भर की भाग दौड़ घड़ी की सुई के
साथ - साथ मैं भी दौड़े जा रही थी। सुबह जल्दी ऑफिस जाना थक कर घर आना और आकर घर के 
काम निपटाना और इसी बीच अगर मार्केट जाना पड़
जाये फिर तो हालत ऐसी जैसे कोई फूल जो सुबह खिला रहता है और शाम होते - होते मुर्झा जाता है।
कुछ टाइम से लाइफ ऐसी ही तो चल रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे कोई भारी सी चीज मेरे सिर पर रखी हो और मैं उससे दबी जा रही हूँ। मेरा मन खुश नही था। ऐसा नही था की कोई बहुत बड़ी परेशानी हो या
कोई बड़ा दुख हो। बस रोज की भागदौड़ से थोड़ा थक गई। पाँच साल से बस ऐसी ही जिंदगी चल रही है ऑफिस से घर, घर से ऑफिस और बीच में कभी कभार मार्केट चले जाना।
एक बार ऑफिस मीटिंग में मुझे प्रजेंटेशन देनी थी वैसे मैंने हमेशा अपना काम अच्छे से ही किया है पर इस बार मैं उतना अच्छा नही कर पाई। धीरे-धीरे मेरी परफॉमेंस खराब होने लगी। मैं समझ नही पा रही थी के काम का प्रेशर ज्यादा है या मैं ही उसे ज्यादा समझ रही हुँ। कोई भी काम ठीक से नही हो पा रहा था।
आज मुझे माँ की याद आ रही है और साथ ही अपना बचपन भी और अपने घर की छत भी। मुझे घर की छत पर खड़े होकर दूर तक देखना अच्छा लगता था।
हमारे घर की छत से कुछ ही दूर सामने देखने पर हरा-भरा खेत नजर आता था जिसे देखकर बड़ा अच्छा लगता था। और साथ ही नजर आता था नीला आसमा। मैं रोज नीले आसमा को देखती रहती और सोचती रहती की ये नीला क्यों है अपने सवाल के जवाब मैं खुद ही ढूंढने की कोशिश करती लेकिन जब उत्तर नही मिला तो मैंने माँ से पूछा- माँ ये आसमा नीला क्यों  दिखाई देता है तब माँ ने कहा क्योंकि इसका रंग नीला है इसलिए। माँ को भी नही पता था के आसमा नीला क्यों है। सवाल का उत्तर भले ही न मिला हो पर मैं नीले आसमा को अभी भी बड़े गौर से देखती थी कितना चुप कितना शांत उसे देख मन को सुकुन सा महसूस होता था। मैं उस नीले आसमा से बहुत कुछ कहती थी पर वो मुझसे कुछ नही कहता था। बस मेरी सारी बात सुनता रहता था। 
आज मैने काफी देर तक बैठकर यही सोचा की ऐसा क्या करूँ की इस भागती दौड़ती लाइफ में कुछ पल मन को सुकुन मिल सके। वैसे जब घर की याद आई तो समझ आ गया था की मुझे क्या करना है।
मैंने ऑफिस से 10 दिन की छुट्टी लेली। और निकल गई अपने घर के लिए। घर पर सभी मुझे देखकर बहुत खुश हुए मुझे भी अच्छा लगा अपने घर आकर अपने अपनो से मिलकर। इन दस दिनों में लाइफ इतनी बदल गई की क्या कहूँ किसी काम की कोई चिंता नही अपनी छोटी बहन के साथ मैं हर पल खूब इंजॉय कर रही हूँ और माँ पापा सभी मुझे बहुत लाड कर रहे है। और हाँ बचपन की तरह मैं  अभी भी अपने घर की छत पर जाकर दूर तक अपनी नजरे दौड़ा रही हूँ। अच्छा लग रहा है सब कुछ। और वो खेत वो जो दूर सामने नजर आ रहा है हरा- भरा। मैं बिल्कुल सही समय पर आई हूँ इस समय खेत हरे भरे रहते है। 
जिसे देखकर बड़ा अच्छा लगता है। 
खेत के साथ - साथ मुझे नीला आसमा भी दिखाई दे रहा है। जिसे मैं बचपन मैं देखा करती थी अभी भी वैसा ही शांत चुप सा है। मैं कई देर तक इसे देखती रही पता नही क्यों इस नीले आसमा को देखकर मुझे सुकुन मिलता है। ऐसा लगता है जैसे ये अपने अंदर बहुत कुछ समाये हुए है लेकिन तब भी कितना शांत है
और बहुत खूबसूरत भी। ऐसा नही की मैं जहाँ अभी रह रही हूँ वहाँ का आसमा नीला नही है वहाँ भी आसमा ऐसा ही है बस वो अपनापन वो सुकुन वहाँ नही है जो यहाँ है।
इन दस दिनों मैं मैने बहुत सुकुन महसूस किया। अब मन खुश है मैं नई एनर्जी और खुशी लिए वापस जा रही हूँ। इन दिनों लाइफ जैसी रही उससे एक बात समझ आ गई की काम के बीच एक ब्रेक बहुत जरूरी है। ताकि आप एक नई एनर्जी के साथ खुश मन और शांत दिमाग से काम कर सके। जैसे मैंने किया।
मुझे अपने घर जाकर जो खुशी और सुकुन मिला उससे मैं बहुत अच्छा और काफी फ्रेश फील कर रही हुँ। हम सब की लाइफ में कुछ तो ऐसा होना ही चाहिए 
जिसे देखकर या जहाँ रहकर हमे खुशी मिले है ना।




आजकल



जब भी हम अपने किसी रिश्तेदार या किसी दोस्त से मिलते है तो वे ये सवाल जरूर करते है की - क्या चल रहा है आज कल। मतलब ये की आज कल आपकी लाइफ में क्या हो रहा है। अभी कल की ही बात है
सुबह- सुबह मैं वॉक पर गया था लौटते वक्त मुझे रास्ते में मिश्रा अंकल मिल गये। अंकल कहने लगे
अरे भई विपुल बडे दिनों बाद दिखे। कैसे हो ?
मैंने कहा अंकल मैं बिल्कुल ठीक हूँ। अंकल ने फिर
पूछा क्या चल रहा है आज कल। मैने उत्तर देते हुए कहा आपके आशीर्वाद से सब ठीक चल रहा है।
अंकल ने कुछ देर मुझसे बात की और फिर चले गये। मैं भी घर आ गया बाहर का गेट खोलकर अंदर जा रहा था की आवाज आई। भाई साहब ओ विपुल भाई साहब मैंने पीछे पलट कर देखा हमारे पड़ोसी विजयदास थे कहने लगे कहाँ गायब रहते है दिखते ही नही क्या चल रहा है आज कल। मैंने कहा सब बढ़िया। ये कहकर मैं सीधे घर में आ गया।
शाम को हमे एक बर्थडे पार्टी में जाना था मैं ,मेरी वाइफ और मेरा बेटा हम पार्टी में पहुँचे। क्योंकि पार्टी रिश्तेदार के घर थी तो वहाँ और अन्य रिश्तेदारों का मिल जाना कोई आश्चर्य की बात नही थी। एक के बाद एक कई रिश्तेदारों से मुलाकात हुई।
सबसे पहले मौसीजी मिल गई मेरी मौसी नही मेरी माँ की मौसी। मौसी की काफी उम्र हो चली है अब तो उन्हें ठीक से सुनाई भी नही देता इससे समस्या ये होती है की वो तो अपनी बात कह देती है और हमारी कुछ भी
नही सुनती। वो मुझसे हालचाल पूछ रही थी मैं उन्हें तेज आवाज में कह रहा था सब ठीक है, सब ठीक है पर उन्हें है की कुछ सुनाई ही नही दे रहा था उल्टा वो मुझसे बार - बार कह रही थी क्या हालचाल है कुछ कह क्यों नही रहे बेटा। मेरा तो गला ही सुख गया और मौसीजी को कुछ सुनाई ही नही दिया। और कुछ न कहते हुए मैं पार्टी में आये मेहमानों के बीच जाकर बैठ गया। मैं जहाँ बैठा था वही आगे वाली कुर्सी पर
मौसाजी बैठे थे माँ के मौसा जी नही मेरे मौसाजी।
मुझे देखते ही मौसाजी बोले विपुल बेटा कैसे हो आजकल मैने मौसाजी के पैर छुकर आशीर्वाद लिया और कहा ठीक हूँ मौसाजी। मौसाजी यूँ तो मन के अच्छे है पर उन्हें दुसरो के जीवन के बारे में जानने की बड़ी उत्सुकता रहती है कि किसके जीवन में क्या चल रहा है। मुझसे भी मौसाजी पूछ रहे थे क्या चल रहा है आज कल। घर, नौकरी सब ठीक ठाक चल रहा है के नही। कोई समस्या हो तो बताओ।
मैंने नम्रता के साथ कहा हाँ मौसाजी सब ठीक है। कुछ देर तक मौसाजी ने यहाँ- वहाँ की बाते की और फिर उठकर कही चले गये। पर मैं वही बैठा रहा। कुछ पल
शांति से बैठा था की मेरा चचेरा भाई आ गया। उसने
भी मुझसे मेरे आजकल के बारे में जाना। और फिर वो मुझे पार्टी में आये सभी रिश्तेदारों से मिलाने ले गया सभी ने मुझसे मेरे आजकल का हाल जाना। फिर मैंने भी उनसे पूछ ही लिया क्या चल रहा है आजकल।
पर जब मैं घर आया तो रात को मैं आजकल के बारे में ही सोचता रहा और आज भी सुबह उठकर मैं इसी विषय के बारे में सोच रहा हूँ। ये आजकल कितना विशेष है हर व्यक्ति आजकल को ही जानना चाह रहा है। हर किसी व्यक्ति की जबान पर आजकल ही है।
पता है ये क्यों है क्योंकि हमे अपने आजकल से ज्यादा दूसरे के आजकल को जानने में बड़ी रुचि है। मैं तो
थक ही गया कल अपने आजकल का हाल बताते अब यही सोच रहा हूँ की हे भगवान अब कोई न पूछे की क्या चल रहा है आजकल।
पर जब ऑफिस पहुँचा तब मेरे पहुँचते ही ऑफिस के एक साथी ने पूछ ही लिया विपुल जी कुछ दिनों से आपसे बात ही नही हुई क्या चल रहा है भई आजकल।
तब मैंने कहा जी सब बढ़िया है आजकल।


एक चुटकी प्रेम

मार्च बित गया था ठंड के नख़रे अब कम हो गए थे कम क्या यूँ कहें कि अब खत्म ही हो गये थे सूरज के तीखे तेवर जो शुरू हो गये थे। अब गर्मागर्म पकोड़े...

Sonal bhatt MULAKAT-KAHANIYO-SE STORY OF OUR LIFE