वो रोशनी


कहीं मिली थी वो रोशनी मुझे, जो चमक रही थी खेतों पर , पेड़ों पर फूलों पर और पत्तों पर।

देखा था मैंने उसे कैसे नटखट अंदाज़ में वो पानी मे झिलमिला रही थी तेज़ चमक कर मेरी आँखों पर जाने कुछ कहना चाह रही थी। फेंका जो कंकड़ किसी ने तालाब में अब वो डुपकी भी खा रही थी पल में पड़ती आंखों पे और पल में ओझल हो जा रही थी। मैंने नज़र हटा ली छोड़ पानी को अब सीधे पहाड़ पर  डाली। 

दूर विशाल सा वो खामोश खड़ा था कुछ नही कह रहा था सालों से जैसे बस गहरी नींद में सो रहा था पर वो वहाँ भी थी , चोटी पर खड़ी रोशनी मुस्कुरा रही थी धीरे- धीरे चंचल पहाड़ पर बिखरी जा रही थी स्पर्श से अपने पर्वत को वो गुदगुदा रही थी कोरों पर उसकी चमचमाती उछलती सी जा रही थी। मैं उठ खड़ा हुआ और चल दिया। 

अब मैं रास्ते पर था रोशनी भी मेरे साथ पथ पर आगे बढ़ रही थी धूप के साथ-साथ ये भी मेरे तन पर पड़ रही थी मैं चला जा रहा था।चिलचिलाती हुई सी ये रास्तों पर चली जा रही थी कंकड़ ,पत्थर ,रेत पर भी इसकी चमक नज़र आ रही थी मोड़ों पर ऐसी इठला रही थी कि देख उसे आँखें धुंधला रही थी। ये रोशनी हर ओर छाई है जिधर भी देखूँ दी ये मुझे दिखाई है। 

मैंने अपने सिर को ऊपर उठाया आँखों को आकाश पर टिकाया आकाश प्रकाश से उज्ज्वल हो रहा था कितने अदभुत नज़ारे में मैं खो रहा था आकाश में उड़ते पंछी भी रोशनी पा रहे थे जितनी तेज़ी से वो अपने पंख चला रहे थे लग रहा था रोशन होते आकाश में उत्साह से झूमते जा रहे थे ये रोशनी उमंग भरी है आशा की उजियारी लाई है अब तो मेरे चेहरे पर भी आई है।

तेज़ मद्धम होती रोशनी मेरे चेहरे पर पड़ रही थी जैसे लुक्का- छुप्पी का खेल कोई कर रही थी तेज़ी से आते हुए धीमे से कुछ कहना चाह रही है शायद अब ये मेरे मन में रहना चाह रही है। मैंने आँखों को बंद कर लिया, रोशनी मैंने अपने अंदर भी पाई है इसकी चमक मुझमे भी आई है। चहुँ ओर है ये समाई बात उसने ये मुझे बताई। जग में जिसकी जैसी जो हो काया रही है, रहेगी रोशनी की माया। 

कहीं मिली थी वो रोशनी मुझे,जो चमक रही थी खेतों पर , पेड़ों पर फूलों पर और पत्तों पर।

एक चुटकी प्रेम

मार्च बित गया था ठंड के नख़रे अब कम हो गए थे कम क्या यूँ कहें कि अब खत्म ही हो गये थे सूरज के तीखे तेवर जो शुरू हो गये थे। अब गर्मागर्म पकोड़े...

Sonal bhatt MULAKAT-KAHANIYO-SE STORY OF OUR LIFE