एक दोस्त



पार्टी के बाद हॉल का जो हाल था वो बड़ा ही बेहाल था हॉल की हर एक चीज़ अस्त- व्यस्त थी क्या जरूरत थी ये पार्टी करने की देखा आपका काम और बढ़ गया मैंने नाराज़ होते हुए माँ से कहा।अच्छा तू कर तो रहा है मेरी मदद माँ ने मुस्कुराते हुए कहा हाँ पर आप प्रॉमिस करिये की आप सब अब कभी मेरे लिए पार्टी नही रखोगे आप जानती हो न माँ मुझे नही पसन्द अपना बर्थडे सेलिब्रेट करना कहते हुए मैं थोड़ा उदास हो गया। माँ ने प्यार से अपने हाथ को मेरी ओर बढ़ाया और मेरे गाल को छूते हुए बोली नही करेंगे कोई पार्टी खुश। मैंने पलके झपका दी। माँ और मैंने हॉल में हर एक चीज़ वैसे ही रख दी जैसे पहले रखी हुई थी अपने काम से फ्री हो जाने के बाद माँ तो अपने रूम में चली गयीं पर मैं यहीं बैठ गया कुछ देर इस खामोशी में बैठने को जी कर रहा था मेरा। कुछ वक्त पहले कैसे मैं सबसे घिरा हुआ था और अब एक दम अकेला हूँ । मेरे साथ अभी है तो सिर्फ ये खामोशी जो मुझे रास आने लगी है अच्छा लगता है मुझे अकेले बैठना खुद से बातें करना , खुद से सवाल करना और फिर उनका जवाब ढूंढना। नही पसन्द मुझे वो भीड़ जहाँ लोग झूठ के नकाब के साथ होते है। माँ ने पार्टी में मेरे कॉलेज फ्रेंड्स मेरे ऑफिस के कलीग्स सबको बुलाया और सब आये भी अपने कॉलेज फ्रेंड्स से तो मैं कितने वक्त बाद मिला पर फिर भी मुझे उनसे मिलकर न ज्यादा खुशी हुई और न ही मन को कोई सुकून मिला। कहते है कि सच्चे दोस्त बहुत मुश्किल से मिलते है उनका हाथ हमेशा थामे रहना चाहिए ताकि जब भीड़ में आप अकेले पड़ जाएं तो वो हो आपके साथ आपका हाथ थामे हुए ये कहने को मैं हूँ ना यार जैसे शिवांश कहा करता था
मैं जब भी किसी प्रॉब्लम में पड़ जाता या मुझे जरूरत होती किसी के साथ कि तो कहता था वो क्यों परेशान हो रहा है मैं हूँ ना यार चल केंटीन चलते है चाय पीने तब मैं उसे घूरते हुए पूछता पैसे वो कौन देगा पैसे वो तो तू देगा ना वो सीरियस होकर कहता और फिर हँसने लगता। पर मैं मन ही मन गुस्सा करने लगता हमेशा मुझसे ही चाय के पैसे दिलवाता है खुद तो कभी देता ही नही है। ना जाने क्या खुशी मिलती थी उसे मुझसे पैसे दिलवा कर जबकि मेरे बर्थडे पर पार्टी वही देता था और मेरे क्लास में टॉप करने पर मुझसे ज्यादा खुश वो होता था।
कल रात मैंने हॉल में ही गुजारी कुछ देर अकेले बैठना चाहता था पर कब सोफे पर बैठे हुए मैं लेट गया मुझे भी पता नही चला और फिर आँख लग गई। मैं सुबह घर मे दस्तक देते सूरज के उजाले से नही बल्कि हम काले है तो क्या हुआ दिल वाले है हम तेरे तेरे चाहने वाले है पापा के रेडियो में चल रहे इस गाने से जागा। उन्हें ओल्ड सॉन्ग्स बहुत पसंद है और उनकी रोज़ सुबह ऐसे ही होती है गानो के साथ। वैसे मेरा सन्डे का कभी कोई प्लान नही होता पर न जाने क्यों फिर आज मन टेकरी जाने को कर रहा है बस मुड़ बना और मैं घर से निकल गया। ये पिकनिक स्पॉट ही है पर भीड़ यहां बारिश के मौसम में ज्यादा होती है ऊँचाई पर होने की वजह से यहां से शहर खूबसूरत नजर आता है नीले सफेद बादल भी यहाँ से पास दिखाई पड़ते है ऐसा लगता है जैसे हम ज़मीन से दूर और बादलों के करीब आ गए हों। मैं बदलों को निहार रहा था कि मोबाइल की रिग बज उठी फोन पर जयस था हेलो। हाँ अभिकल्प मिले तुम शिवांश से जयस ने पूछा। हाँ,  नही अच्छा सुन मैं टेकरी आया हूँ अपने कुछ फ्रेंड्स के साथ बाद में बात करते है कहकर मैंने फ़ोन काट दिया। कितना मुश्किल होता है ना जब कोई वो सवाल करले जिसका जवाब हम देना नही चाहते। एक महीने पहले मैंने ही जयस को कॉल किया था एक उम्मीद से और जयस वाक़ई बहुत अच्छा है उसने मेरी उम्मीद को टूटने नही दिया। इसके बाद मैं लखनऊ के लिए निकल गया खुशी और डर इस वक्त ये दोनों ही एहसास एक साथ मेरे मन में थे जैसे की दिल दो भागों में बट गया हो एक तरफ खुशी हो और दूसरी तरफ मेरे मन का डर। लखनऊ पहुँचने के बाद मैं उस जगह पर था जहाँ का एड्रेस मुझे जयस ने दिया था मैं दरवाज़े पर खड़ा हुआ सोच रहा था कि क्या होगा मुझे देखकर खुश होगा गले लग जायेगा या फिर नाराज़ होकर मुझसे मुँह मोड़ लेगा। हिचकिचाते हुए मैंने डोर बेल बजाई दरवाज़ा खुला मेरे सामने जीन्स और वाइट् टीशर्ट में एक शख्स खड़ा था जोकि शिवांश नही था।मुझे अपनी कहि बात याद आ गई मुझसे कभी नही मिलना और यही हुआ नही मिला वो मुझे मेरे आने से पहले ही वो लखनऊ छोड़ कर जा चुका था। मेरा हाल अभी उस पंछी जैसा था जो अपने साथियों से बिछड़ जाने पर उन्हें खोजने उड़कर दूसरे देस तो निकल जाता है पर जब तक वो पहुँचता है तब तक उसके साथी अपना खोसला छोड़ नई मंजिल की ओर निकल पड़ते है और पंछी अपने साथियों से मिल ही नही पाता रह जाता है अकेला मेरी तरह। एक हारे और निराश मन के साथ मैं घर वापस लौट आया। जयस अभी मुझसे सवाल करता क्यों नही मिल पाया कैसे क्या हुआ लेकिन मन नही था मेरा अभी किसी सवाल का जवाब देने का इसलिए फोन ही कट कर दिया।
शिवांश को ये जगह पसन्द थी मैं उसी के साथ तो टेकरी आया करता था बारिश के मौसम में ये जगह इतनी खूबसूरत हो जाती है कि यहाँ से जाने का मन ही नही करता। आसमान में छाए काले बादल एक साथ निकलता पक्षियों का छुंड हवा से  झूमते पेड़ भीगे हुए पत्थर और बारिश की बूंदे जो तुम्हे भी छूकर अपने आने का एहसास करा रही हो। तू हमेशा यहां क्यों आता है सुकून मिलता है मुझे यहाँ मेरे पूछने पर वो कहता था। शिवांश और मैं नेचर में अलग थे पर फिर भी हम अच्छे दोस्त थे वो शायद इसलिए क्योंकि वो हमेशा झुक जाया करता था मान लिया करता था मेरी हर बात और मैं अपने घमंड में खुश हो जाता था। आदत पड़ गई थी शिवांश से मुझे अपनी बातों को मनवाने की और अपनी तारीफ सुनने की। शिवांश मेरी हर बात में तारीफ़ किया करता था मुझे सराहा करता था फिर वो चाहे पढ़ाई को लेकर हो,
मेरी पर्सनालिटी को लेकर हो या अदर एक्टिविटीज को लेकर अभिकल्प तू हर काम में होशियार है यार। मैं बड़ा ही खुश हूं कि मेरा दोस्त इतना टेलेंटेड है वो मुझसे कहता और मैं अपने गुरुर के साथ मुस्कुरा देता। शिवांश बहुत फ्रेंक था आसानी से सबके साथ घुलना - मिलना आता था उसे इसलिए बाकी क्लासमेट के साथ भी थी उसकी दोस्ती पर उसका खास दोस्त मैं ही था मैं जब कभी कहता कि मुझे लाइब्रेरी में ही बैठकर पढ़ना है तब मन न होते हुए भी वो मेरे साथ बुक लेकर बैठ जाता पड़ता नही था बस पन्ने पलटता रहता उसे लाइब्रेरी में बैठकर पढ़ना बिल्कुल पसंद नही था वो तो कॉलेज के गार्डन एरिया में आसमान के नीचे खुली हवा में बैठकर पढ़ना पसन्द किया करता था।
अब हमारे थर्ड ईयर के एग्जाम हो चुके थे और रिजल्ट आने वाला था मैं शिवांश से पहले कॉलेज आ गया था बहुत गुस्से में था मैं उस दिन।अभिकल्प रुकना क्या हुआ इतने गुस्से में क्यों लग रहा है देख शिवांश मुझे कुछ जरूरी काम है इसलिए मैं घर जा रहा हूँ प्लीज़ कोई सवाल मत करना तू ठीक तो है ना शिवांश ने पूछा पर मैं बिना कुछ कहे चला गया। ठीक ही तो नही था मैं। दो सालों से क्लास का टॉपर मैं था सही कहा है किसी ने की दोस्त के फेल हो जाने से ज्यादा दुख उसके टॉप कर जाने का होता है। मुझे भी हुआ। चाहकर भी मैं खुश नही हो पा रहा था अब धीरे- धीरे सब बदलने लगा था या फिर मैं। मैं और शिवांश अदर एक्टिविटीज़ मैं भी पार्टिसिपेट किया करते थे लेकिन आजकल शिवांश मुझसे बेहतर परफॉर्म कर रहा था जब सब उसकी तारीफ़ करते तो मैं होंठों से तो मुस्कुराता पर मेरा मन जैसे बैठ सा जाता। खटक रही थी ये बात मुझे की शिवांश मुझसे आगे निकल गया। मैं अपने आपको शिवांश से बहुत बेहतर मानता था और घमंड था मुझे अपने इंटेलिजेंट होने पर। इसलिए अब मैं मन ही मन शिवांश से जेलिस होने लगा था चिड़ने लगा था मैं उससे और शिवांश सब बातों से बेखबर था। उसके लिए मैं अभी भी उसका दोस्त था पर मेरे लिए वो मेरा कम्पेटिटर बन गया था जिससे मुझे आगे निकलना था हर हाल में। नोट्स छुपाना कुछ शेयर न करना रूढ़ बिहेव करना और तंज कसना कुछ ऐसा हो गया था मैं।
अब लास्ट एयर था कॉलेज में फेयरवेल पार्टी चल रही थी अपने मस्तीभरे अंदाज़ से पार्टी में रौनक शिवांश ही बिखेर रहा था शिवांश आज बहुत हैंडसम और डेशिंग लग रहा है पीहुँ ने कहा तो मुझे बुरा लग गया लाइक करता था मैं पीहुँ को। लेकिन उसे शिवांश अच्छा लग रहा था। ये वो वक्त था जब मेरे अंदर की जलन उफान पर थी यानी बाहर आने को रेडी थी शिवांश मेरे पास आया और अपने साथ डांस करने लिए कहने लगा बहुत खुश था वो, इसलिए मेरे मना करने पर भी मेरा हाथ पकड़ कर खिंचने लगा और मुझे गुस्सा आ गया
मेरे मन की नाराज़गी आज बाहर आ गई थी बहुत कुछ कह दिया था मैंने शिवांश को। शिवांश को छोड़कर बाकी सब मुझे हैरानी से देख रहे थे पर शिवांश क्यों नही ? एक सच्चा दोस्त अपने दोस्त की उलझनों को , परेशानियों को बिना कहे जान लेता है शिवांश को सब मालूम था लेकिन फिर भी वो चुप रहा।
समुद्र में जब तेज़ लहरें आतीं है तो ऐसा लगता है जैसे अपने साथ जाने क्या- क्या बहा लें जाएँगी लेकिन कुछ देर बाद वो शान्त हो जाती है एक दम खामोश। ऐसे ही मेरे अंदर भी सब कुछ खामोश हो गया था। पार्टी के अगले दिन मुझे जयस मिला बहुत भड़क रहा था मुझ पर गुस्सा किये जा रहा था क्योंकि मैंने उसके स्कूल फ्रेंड को दुख जो पहुँचाया था। जयस मेरा नही शिवांश का फ्रेंड है और वो उसे मुझसे ज्यादा अच्छी तरह से जानता है। जयस से मिलने के बाद मैं पूरे कॉलेज में शिवांश को ढूंढ रहा था पर शिवांश मुझे कहीं नही मिला। दौड़ता- भागता में टेकरी जा पहुँचा बैठा था शिवांश टेकरी के पहाड़ पर पैर लटकाये आसमान देख रहा था। शिवांश मैंने  पुकारा अभिकल्प तू यहाँ क्या कर रहा है कहते हुए शिवांश के चेहरे पर मुझे कोई नाराज़गी नजऱ नही आ रहा थी। मैं उसके गले लगकर रोने लगा और वो मुझे सम्हालने की कोशिश कर रहा था शिवांश एक प्रॉमिस करेगा हाँ बोल ना। उस दिन मैंने उससे वादा लिया और उसने वो पूरा किया। शिवांश ने पूरे कॉलेज में टॉप किया और चला गया मुझसे दूर। मैंने कहा था उससे की मुझसे कभी न मिले, अभिकल्प ने शिवांश से कहा था भला शिवांश अभिकल्प की बात कैसे नही मानता। वो हमेशा से मुझसे ज्यादा बेहतर था लेकिन मैंने कभी देखने की कोशिश ही नही की और न उसने जताने की।  मैं जब भी उससे स्मार्ट बनकर कोई सवाल करता तो वो जानबूझकर अंसर नही देता था बेवकूफ़ था मैं जो ये मान बैठता था कि मैं बड़ा होशियार हूँ जबकि ये शिवांश का बड़प्पन था। वो मेरे मन की उत्सुकता को भाप लेता था समझ जाता था कि मैं जवाब देना चाहता हूँ।इसलिए चुप रह जाता क्योंकि वो मेरे कॉन्फिडेंस को कम नही होने देना चाहता था। एक अच्छा दोस्त ऐसा ही होता है जो अपने दोस्त को ये एहसास न होने दे की वो उससे कुछ कम है।
मैंने शिवांश को खुद से दूर इसीलिए जाने को कहा क्योंकि अब खुद पर भरोसा नही था मुझे , कब किस बात पर मैं फिर से उससे जेलिस होने लगूँ या कब मेरे मन मे उसके लिए कड़वाहट आ जाये ये विश्वास खो चुका था मैं। जब एक दोस्त के मन मे अपने दोस्त के लिए जलन पैदा होने लगती है तो धीरे- धीरे वो उसे उसका दुश्मन बना देती है और एक सच्चा प्यारा रिश्ता हमेशा के लिए खत्म हो जाता है जो मैं नही चाहता था और साथ ही मेरी सज़ा भी यही थी कि मेरा सबसे अच्छा दोस्त मुझे छोड़कर चला जाये। शिवांश के जाने के बाद मैंने सबसे दूरी बना ली बिज़ी कर लिया खुदको अपने काम मे। सोचता रहता था कि शिवांश जहाँ होगा ठीक होगा। लेकिन मैं उसे बस एक बार देखना चाहता हूं मिलना चाहता हूं उससे,  कहना चाहता हूँ उसे की कितना मिस करता हूँ मैं अपने दोस्त को। क्यों परेशान हो रहा है मैं हूँ न यार चल चाय पीते है किसी ने पीछे से कहा मैं फ़ौरन पलटा शिवांश जयस के साथ मेरे सामने खड़ा था उसे अचानक अपने सामने देख  मेरी आँखें नम हो गई और जुबान खामोश शिवांश हँस पड़ा ये कहकर की पैसे तुझे ही देने होंगे।
जब हमारा सबसे अच्छा दोस्त जो हमसे दूर चला जाये और एक दिन अचानक वापस लौट आये तो उस खुशी को बयां कर पाना मुश्किल होता है उसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है। इतने साल बाद अपने दोस्त से मिलने की कुछ ऐसी ही खुशी को अभी महसूस कर रहा था मैं।





एक चुटकी प्रेम

मार्च बित गया था ठंड के नख़रे अब कम हो गए थे कम क्या यूँ कहें कि अब खत्म ही हो गये थे सूरज के तीखे तेवर जो शुरू हो गये थे। अब गर्मागर्म पकोड़े...

Sonal bhatt MULAKAT-KAHANIYO-SE STORY OF OUR LIFE