मेरे लिए



बहुत चले हम सबके लिए , मेरा हर कदम अब मेरे लिए
बहुत जिया मैंने सबके लिए, मेरी हर साँस अब मेरे लिए
बहुत दुआएँ मांगी सबके लिए, मेरी हर दुआ अब मेरे लिए
बहुत सोचा मैंने सबके लिए , मेरी हर सोच अब मेरे लिए
बहुत सपने देखे मैंने सबके लिए , मेरा हर सपना अब मेरे लिए
बहुत खुशियाँ चाही सबके लिए , मेरी हर खुशी अब मेरे लिए
बहुत दर्द झेले हमने सबके लिए , मेरा हर दर्द अब मेरे लिए
बहुत वक्त दिया अपना सबके लिए , मेरा हर पल अब मेरे लिए
बहुत रोए हम सबके लिए , मेरा हर आंसू अब मेरे लिए
बहुत थके हम सबके लिए , मेरी हर थकान अब मेरे लिए
बहुत तमन्नाएँ की सबके लिए , मेरी हर तमन्ना अब मेरे लिए
बहुत फिक्र की हमने सबके लिए , मेरी हर फिक्र अब मेरे लिए
बहुत लड़े हम सबके लिए , मेरी हर लड़ाई अब मेरे लिए
बहुत चले हम सबके लिए , मेरा हर कदम अब मेरे लिए
बहुत कोशिशें की सबके लिए , मेरी हर कोशिश अब मेरे लिए
बहुत दौड़े हम सबके लिए , मेरी हर दौड़ अब मेरे लिए
बहुत जीते हम सबके लिए , मेरी हर जीत अब मेरे लिए
बहुत रंग भरे मैंने सबके लिए , मेरा हर रंग अब मेरे लिए
बहुत रोशनी फैलाई मैंने सबके लिए, मेरा हर उजाला अब मेरे लिए
बहुत सुबह जागे हम सबके लिए , मेरी हर सुबह अब मेरे लिए
बहुत दिन गुजारे हमने सबके लिए , मेरा हर दिन अब मेरे लिए
बहुत शामे जाने दी सबके लिए , मेरी हर शाम अब मेरे लिए
बहुत हँसे हम सबके लिए , मेरी हर मुस्कान अब मेरे लिए
मेरे लिए , मेरे लिए और सिर्फ मेरे लिए।





होस्टल



बात उन दिनों की है जब मैं होस्टल में रहता था। मैं पहले कभी होस्टल में रहा नही तो मुझे कुछ खास आइडिया नही था कि यहां का सिस्टम कैसा होता है। मुझे तो अपने घर की आदत ज्यादा थी जहां मेरे कमरे पर सिर्फ मेरा ही हक था। जैसे चाहो वैसे रहो। पर होस्टल में ऐसा नही होता आपके कमरे पर आपके अलावा किसी और का भी हक़ होता है जिसे रूममेट कहते है। जब में पहली बार अपने रूममेट से मिला था तो हाय हेलो की जगह उसने मुझे अपने रूल बताना शुरू कर दिया।
एक के बाद एक वो मुझे रूम के नियम बताये जा रहा था। मुझे ये तो पता था कि होस्टल के कुछ रूल्स होते है पर रूम में रहने के भी रूल्स होते है ये अभी पता चला था। मैंने अपना सामान अपने कबर्ड में जमा लिया अपने टेबल पर अपनी बुक्स और कुछ थोड़ा बहुत सामान रख लिया। 
अगले दिन से मेरी होस्टल लाइफ शुरू हुई। यहां अगर आपको टाइम पर नहाना है तो सुबह जल्दी उठना होगा और अपनी बाल्टी को लाइन में लगाना होगा। और अगर आपको खाना खाना है तो जो टाइम है उसी बीच खाना लेना होगा नही तो बाद में बस जली रोटियां ही बचती है। और जो बना है वही खाये या फिर भूखे रह जाएं। मैंने जब होस्टल ही आलू गोभी खाई तो मुझे माँ के हाथ की बनी दाल याद आई वैसे तो मुझे दाल पसन्द नही है पर अगर अभी मुझे वो दाल मिलती तो बड़े ही खुश होकर खा लेता। 
दो दिन बाद एक और नई बात पता चली की अगर छत पर कपड़े सुखाने है तो खुद भी साथ में सुखना पड़ता है नही तो नजर हटी और दुर्घटना घटी। कपड़े यहां से छू मन्तर हो जाते है। और मैं यहां नया आया था तो सब मेरे सीनियर और मैं अकेला उनका जूनियर। हाँ जी जो नया आता है सब थोड़ा बहुत उस पर अपना रोप जरूर दिखाते है। इसलिए मैं कह सकता हूँ कि मुझे शुरुआती वक्त में थोड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा। मैंने जो शुरू में अनुभव किया कि सबके सब अपना भला चाहते है और हर बात में मुझे फसाना चाहते है
चाहे वो पानी की टँकी खाली हो गई हो या चाहे बगल वाले रूम का कोई गेट बार - बार खटखटा रहा हो हर बात में नाम मेरा ही लगाया जा रहा था और नाम भी कैसे वो नया लड़का।
हाँ अभी सब इसी नाम से मुझे जानते थे।
पर सबसे ज्यादा परेशान तो मैं अपने रूम मेट अतुल से हुआ।
जब मुझे लाइट ऑन करनी होती तो उसको ऑफ करनी होती। जब में सोता तो वो अपने होस्टल के दोस्तों को रूम में बुलाकर शोर मचाना शुरू कर देता मतलब पूरी तरह से मेरी नींद में खलल डालने की कोशिश करता। और जब कभी मैं धीमी आवाज में ही गाने चलाकर सुनता तो वो पढ़ने बैठ जाता और फिर कहता कि वो डिस्टर्ब हो रहा है मुझे तो समझ ही नही आता था कि आखिर इसे मुझसे क्या परेशानी है
वैसे शुरू में मैंने कोशिश की हम दोनो की किसी भी तरह से कोई लड़ाई न हो पर ऐसा कहाँ होने वाला था
एक दिन मैं अपने बेड पर बैठे हुए बुक पढ़ रहा था तब अतुल रूम में नही था कुछ देर बाद बड़ी ही तेजी से दरवाजा खोलते हुए थोड़ा परेशान सा वो रूम में आया। और अपने कबर्ड में कुछ ढूंढने लगा उसके बाद फिर टेबल पर भी सारा सामान हटा- हटाकर कुछ ढूंढने लगा। मुझे उसे देखते कुछ मिनट हो गए थे परेशान भी दिख रहा था तो मुझसे रहा नही गया और मैने पूछ लिया क्या हुआ क्या तुम परेशान हो। बस इतना बोला था कि वो तो मुझ पर बरस पड़ा। उसके ऐसे बर्ताव से मुझे भी गुस्सा आ गया और फिर हम दोनों की जमकर लड़ाई हो गई।
दो- तीन दिन तक शांति सी छाई रही न वो मुझे परेशान कर रहा था न मैं उसे। कल से मेरे एग्जाम स्टार्ट होने वाले थे मैंने पहले से ही अपने एग्जाम की तैयारी शुरू कर दी थी उस दिन मेरा लास्ट एग्जाम था मुझे सुबह से ही अपनी तबियत कुछ ठीक नही लग रही थी पर मैं जैसे - तैसे अपना एग्जाम देकर होस्टल आ गया। और आकर बेड पर लेट गया मेरी कब आंख लग गई मुझे पता ही नही चला। अगली सुबह जब मेरी आँख खुली तो मेरे सामने अतुल था। मुझे बहुत तेज बुखार आ गया था मैं जब रूम मैं आया तो अपने बेड की जगह अतुल के बेड पर सो गया था अतुल रात को मेरे लिए जागा भी और उसने ठंडे पानी की पट्टी भी मेरे सिर पर बार - बार रखी। मैं तो पूरी तरह हैरान था कि जो मुझे परेशान करने का एक मौका नही छोड़ता वो मेरी केयर कर रहा है वैसे मैं अब बेहतर महसूस कर रहा था मैं उठा अपने कबर्ड से वॉच निकली और अतुल को दे दी। ये वही वॉच है जिसके खो जाने पर अतुल परेशान था क्योंकि ये उसे उसके बेस्ट फ्रेंड ने दी थी। उस दिन टेबल के पास गिरी हुई ये वॉच मुझे मिल गई थी पर क्योंकि हम दोनों की लड़ाई हो गई थी तो गुस्से में मैंने उसे ये वॉच दी ही नही।
मुझसे पहले अतुल का फ्रेंड ही उसका रूममेट था
मैं समझ सकता हूँ जब हमारा बेस्ट फ्रेंड हमसे दूर जाता है तो बुरा लगता ही है। खैर अब हम दोनों मैं भी दोस्ती हो गई है मैं उसका बेस्ट फ्रेंड तो नही पर फ्रेंड जरूर बन गया हूँ।
होस्टल के बाकी लोगो से भी मेरी थोड़ी बहुत दोस्ती हो ही गई है क्योंकि अब सबसे घुल मिल गया हूँ तो अब यहां अच्छा भी लगने लगा है और मैं सबके लिए वो नया लड़का भी नही रहा।
वैसे होस्टल इतना बुरा भी नही होता जितना कि मुझे लग रहा था।






एक चुटकी प्रेम

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Sonal bhatt MULAKAT-KAHANIYO-SE STORY OF OUR LIFE